Saturday, March 7, 2026
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इबादतगाहों के दुश्मनों को अल्लाह खाक में मिला देगा: राशिद आजमी

 

जनवाणी संवाददाता |

देवबंद:  जमीयत उलमा-ए-हिंद के अधिवेशन में बनारस की ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा की शाही ईदगाह के संबंध में पारित हुए अहम प्रस्ताव का समर्थन करते हुए दारुल उलूम देवबंद के नायब मोहतमिम मुफ्ती राशिद आजमी ने कहा कि देश की आजादी में जमीयत का अहम योगदान रहा है। जिस समय देश पर अंग्रेज काबिज हुए, उस समय लग रहा था कि गोरे सभी इबादतगाहों को खत्म कर देंगे। लेकिन न तो अंग्रेज इबादतगाहों का कुछ बिगड़ सकेऔर न ही आज धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचेगा।

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उन्होंने चेताते हुए कहा कि जो लोग आज इबादतगाहों को खत्म करने की सोच रहे हैं, उनके घरों को अल्लाह खुद खाक में मिला देगा। उन्होंने कहा कि मुल्क में साझा संस्कृति है। यही हमारी विरासत है। इसको छिन्न-भिन्न करने की कोशिश करने वाले कहीं के नहीं रहेंगे। अधिवेशन में कुल 11 प्रस्ताव पारित हुए।

जमीयत के अधिवेशन में यह प्रस्ताव हुए पारित:

1- देश में नफरत के बढ़ते हुए दुष्प्रचार को रोकने के लिए उपायों पर विचार।

2- इस्लामोफोबिया की रोकथाम के उपाय।

3- समान नागरिक संहिता लागू करने का विरोध करते हुए संवैधानिक सीमाओं में रहकर हर संभव उपाय करना।

4- अल्पसंख्यकों के शैक्षिक और आर्थिक हालात में सुधार लाने के लिए प्रयास करना।

5-. बनारस की ज्ञानवापी मस्जिद, मथुरा की शाही ईदगाह समेत देश में मौजूद तमाम इबादतगाहों की हिफाजत करना।

6- वक्फ सम्पत्तियों की हिफाजत करना अ‍ैर उनकी आमदनियों के सही इस्तेमाल की कोशिश करना।

7- सद्भावना मंच बनाना और उसे मजबूत करना।

8- इस्लामी शिक्षा के बारे में फैलाए जा रहे भ्रमो को विभिन्न माध्यमों से दूर करने का प्रयास करना।

9- फलस्तीन, सीरिया, यमन समेत अन्य मुस्लिम देशों के प्रति मुस्लिम देशों के शासकों से अपनी जिम्मेदारी निभाने की अपील करना।

10-. हिंदी जुबान और इलाकाई भाषाओं का प्रचार-प्रसार करना।

11- पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य करना। इसके अलावा श्रद्धांजलि प्रस्ताव के तहत देश और विदेश में प्रमुख इस्लामी विद्वानों की मृत्यु पर शोक प्रकट करते हुए उनके लिए दुआएं मगफिरत की गई।

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