जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा LAC पर चीनी सेना की गतिविधियों को लेकर अमेरिकी सेना के जनरल चार्ल्स ए. फ्लिन के दावे पर सवाल उठने लगे हैं। एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने इसे लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। ओवैसी ने कहा कि अमेरिकी जनरल का दावा चिंताजनक है। केंद्र सरकार को शर्म आनी चाहिए।
अमेरिकी सेना के प्रशांत मामलों के जनरल फ्लिन ने बुधवार को कहा था कि लद्दाख में समूची एलएसी पर चीनी गतिविधियां आंखें खोलने वाली हैं। इसे लेकर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल-मुसलमीन (AIMIM) के प्रमुख ओवैसी ने गुरुवार को केंद्र सरकार की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने वास्तविक नियंत्रण रेखा के हालात को लेकर संसद में चर्चा कराने से इनकार किया था, लेकिन अमेरिका के एक शीर्ष जनरल ने जो कहा है कि वह आंखें खोलने वाला है। एक विदेशी हमें बता रहा है कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने चिंताजनक बुनियादी ढांचा खड़ा कर लिया है।
जनरल फ्लिन के दावे को लेकर आई मीडिया रिपोर्ट के बाद ओवैसी ने ट्वीट किया, ‘मोदी सरकार चीन के बारे में भारतीयों को अंधेरे में रख रही है। वह कमजोर और डरपोक है। राष्ट्रीय सुरक्षा एक पार्टी का मुद्दा नहीं है, यह हर एक भारतीय से संबंधित है।’ ओवैसी ने यह भी कहा कि लद्दाख के हालात पर हमें अमेरिकी जनरल से पता चल रहा है, क्योंकि हमारे पीएम चीन का नाम लेना भूल गए हैं। यह दुखद है कि लद्दाख के हालात को लेकर संसद में मेरे सवाल को ठुकरा दिया गया और सीमा पर चीन की गतिविधियों को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई।
जनरल फ्लिन चार दिनी भारत यात्रा पर हैं। उन्होंने कहा है कि चीन की गतिविधियां आंखें खोलने वाली हैं। पीएलए की पश्चिमी थिएटर कमांड द्वारा तैयार किया जा रहा बुनियादी ढांचा चिंताजनक है। उससे पूछा जाना चाहिए ऐसा क्यों किया जा रहा है और इसके पीछे उसका क्या इरादा है? अमेरिकी सेना के प्रशांत क्षेत्र के कमांडिंग जनरल चार्ल्स ए. फ्लिन ने बुधवार को कहा कि भारत से लगती सीमा के निकट चीन द्वारा कुछ रक्षा बुनियादी ढांचे स्थापित करना चिंता की बात है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी का अस्थिर और कटू व्यवहार ठीक नहीं है। भारत से लगती अपनी सीमा के निकट चीन द्वारा स्थापित किए जा रहे कुछ रक्षा बुनियादी ढांचे भी चिंताजनक हैं।
भारत और चीन के सशस्त्र बलों के बीच पांच मई 2020 से पूर्वी लद्दाख में सीमा पर तनावपूर्ण संबंध बने हुए हैं। पैंगोंग त्सो क्षेत्रों में दोनों पक्षों के बीच हिंसक झड़प के बाद तो हालात और चिंताजनक हो गए थे। पिछले महीने यह पता चला कि चीन पूर्वी लद्दाख में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पैंगोंग झील के आसपास अपने कब्जे वाले क्षेत्र में एक अन्य पुल का निर्माण कर रहा है और वह ऐसा कदम इसलिए उठा रहा है ताकि सेना को इस क्षेत्र में अपने सैनिकों को जल्दी से जुटाने में मदद मिल सके।
भारत गतिरोध से पहले की स्थिति की बहाली पर जोर देता रहा है। भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख विवाद को सुलझाने के लिए अब तक 15 दौर की सैन्य वार्ता की है। दोनों पक्षों के बीच राजनयिक और सैन्य वार्ता के परिणामस्वरूप पैंगोंग त्सो के उत्तर और दक्षिणी तट और गोगरा से सैनिकों को हटा लिया गया था।

