Tuesday, March 31, 2026
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बेसिक शिक्षा विभाग में छुट्टी के नाम पर बड़ा ‘खेल’

  • ब्लॉक क्षेत्र के अधिकांश सरकारी स्कूलों में मामला चर्म सीमा पर

जनवाणी संवाददाता |

हस्तिनापुर: बेसिक शिक्षा विभाग में छुट्टी के नाम पर बड़ा खेल चल रहा है। खंड शिक्षा अधिकारी की मौन स्वीकृत के चले शिक्षक स्कूल से गायब रहते हैं। सरकारी पोर्टल पर प्रार्थना पत्र के बाद अपने साथी शिक्षक को प्रार्थना पत्र देकर छुट्टी मार लेते हैं। ब्लॉकों क्षेत्र के अधिकांश स्कूलों में मामला चर्म पर है।

अधिकारी चेकिंग के लिए पहुंचता है तो रेफरेंस नंबर सीएल स्वीकृत हो जाती है। विभागिय अधिकारियों की मौन स्वीकृत के चलते बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालय में तैनात शिक्षक-शिक्षिकाएं छुट्टी के नाम पर खूब खेल कर रहे हैं। इस खेल में विभाग का पूरा सिस्टम दोषी है। मामला सबकी जानकारी में है, लेकिन कार्रवाई करने से हर कोई बचता है।

ऐसा ही मामला पिछले कई महीनों से ब्लॉक क्षेत्र के गांव दबखेड़ी का है। जहां महीनों से शिक्षक गायब है, लेकिन जांच होने पर सीएल, ईएल और मेडिकल के बहाने स्कूल से गायब नजर आ रहे हैं। स्कूल स्टाफ से लेकर खंड शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के कारण आज तक जांच के दायरे में नही आये।

ग्राामीणों की शिकायत के बाद मंगलवार को जनवाणी की टीम मौके पर पहुंची तो मामले का खुलासा हुआ। ग्रामीणों का कहना है प्रधानाध्यापक स्कूल से कई माह से स्कूल से गायब है। जिसके चलते स्कूलों में बच्चों की सख्या भी बढती नजर नही आ रही।

सीएल-ईएल, मेडिकल के नाम पर चल रहा छुट्टी का खेल

स्कूलों में बच्चों की घटती संख्या को बढाने के लिए सरकार ने 16 जून को स्कूल खोलने के आदेश जारी किये, लेकिन विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के कारण दबखेड़ी स्थित प्राथमिक विद्यालय में जहां प्रधानाध्यपक सीएल, ईएल और मेडिकल गायब ही नजर आये। ग्रामीणों की माने तो इस पूर्व भी प्रधानाध्यपक अधिकांश स्कूल से गायब ही नजर आते हैं, लेकिन आजतक विभागीय कार्रवाई नहीं की गई।

छुट्टी के नाम पर वसूली जाती है मोटी रकम

विभागीय सूत्रों की मानें तो शिक्षकों की छुट्टी के नाम पर रकम तक वसूली जा रही हैै। पोर्टल पर रेफरेंस नंबर आने के बाद कई बार उन्हे रद कर दिया जाता है। जिससे शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई न हो। शिक्षकों को भी इसमें कोई आपत्ति नहीं होती है और शिक्षक की छुट्टियां सुरक्षित रहती है।

एक महीने में लगभग दर्जन भर सीए और ईएल

शिक्षा विभाग के आकडोंं की माने तो दबखेड़ी स्थित प्राइमरी विद्यालय में प्रधानाध्यपक द्वारा 16 जून के रफेंरस नंबर 1040583, 10442317, 1050291, 10517573, 10524441, 10551489 27 जून तक 10559334 आधा दर्जन से भी अधिक बार छुट्टी के लिए रेफरेंस नबंर लिया गया, लेकिन इन रेंफरेंसों पर कितनी बार छुट्टी स्वीकृत की गई यह विभागीय अधिकारी ही जानते हैं।

मेडिकल में भी होता है खेल

विभागीय अधिकारियों की माने तो हस्तिनापुर स्थित खंड शिक्षा विभाग के आंकड़े किसी को भी भ्रमित कर सकते हैं। मेडिकल के नाम पर भी जमकर चांदी बटोरी जा रही है। उक्त विद्यालय के प्रधानाध्यापक प्रदीप राठी द्वारा लगभग एक माह पूर्व लगभग एक माह पूर्व 10 दिन के लिए मेडिकल का आवेदन किया गया ग्रामीणों को जानकारी होने के बाद जब ग्रामीणों ने हंगामा किया तो खंड शिक्षा अधिकारी ने आनन-फानन में मेडिकल समाप्ति से महज एक दिन पूर्व मेडिकल को स्वीकृत कर दिया।

क्या कहते हैं विभागीय अधिकारी?

ग्रामीणों द्वारा अध्यापक के विद्यालय न आने के लगाये गये आरोप निराधरा है। प्रधानाध्यपक द्वारा सीएल और ईएल के साथ मेडिकल लिया गया है। जो सही है।
-राहुल धामा, खंड शिक्षा अधिकारी

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