- बकरीद पर 10 लाख लीटर दूध की होती खपत, होगी परेशानी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: आज ईद-उल-अजहा (बकरा ईद) हैं। ऐसे में दूध का प्रयोग भी होता हैं। पराग ऐसा संस्थान है, जहां पर ईद पर दूध की भरमार होती थी, लेकिन वर्तमान में दूध एक लीटर भी नहीं हैं। आखिर ऐसी स्थिति में पराग कैसे पहुंचा? इसके जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही हैं।
फिर आर्थिक स्थिति भी सही नहीं हैं। पिछले चार माह से दूध का किसानों को भुगतान भी नहीं हो पाया है, जिसके चलते किसानों ने पराग को दूध देना बंद कर दिया हैं। यही नहीं, पंजाब से पाउडर खरीदकर दूध बनाया जा रहा था, वह पाउडर भी खत्म हो गया हैं, जिसके चलते दूध पराग के पास नहीं हैं। ऐसा पहली बार हुआ हैं, जब पराग के पास दूध नहीं है।
मीडिया को इसकी भनक नहीं लगे, इसके भी पूरे इंतजाम किये गए हैं। इसकी सूचना मीडिया को देने वाले के खिलाफ कार्रवाई करने की भी धमकी दी गई हैं। जो गाड़ियां पराग में दूध की ढुलाई करती थी, उनका भी भुगतान नहीं हुआ हैं। वो भी आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रही हैं।

1968 में फैक्ट्री चालू की गई थी। बकरा ईद पर कम से कम दस लाख लीटर दूध की खपत होती थी। इसमें पराग पचास लाख से ज्यादा का मुनाफा एक दिन का होता था। पांच लाख लीटर प्रतिदिन की क्षमता पराग संस्थान की थी, जिसमें मात्र बीस हजार लीटर दूध तोला जा रहा हैं।
गाड़ियों का खर्च पांच से आठ लाख का प्रतिदिन नुकसान हो रहा हैंं। मजदूरों और ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर जो खर्च हो रहा है, वो भी नहीं निकल पा रहा हैं। पंजाब से जो पाउडर ओर बटर खरीदा था, वो भी खत्म हो गया। यूपी सरकार ने 3.52 करोड़ का अनुदान आया था, जो खत्म हो गया।
इसका खर्च सेलरी पर और दूध का भुगतान रुका हुआ था, उसमें दर्शा दिया गया। यह भुगतान किसानों के उत्थान के लिए दिया गया था। गत आठ मार्च तक का किसानों के दूध का भुगतान रुका हुआ हैं। ठेकेदार और ट्रांसपोर्टरों का भुगतान भी रुका हुआ हैं। इस तरह से पराग की आर्थिक स्थिति खराब हो गई हैं।
कम से कम 35 करोड़ के घाटे जाना बताया जा रहा हैं, हालांकि इसकी पुष्टि अधिकृत रूप से नहीं की गई। 35 करोड़ पराग पर देनदारी हैं। बैलेंस सीट में देनदारी नहीं दर्शायी जाती हैं। इससे ही अधिकारियों को गुमराह किया जाता है। दूग्ध मंत्री भी इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
प्रदेश के ऊर्जा राज्यमंत्री डा. सोमेन्द्र तोमर ने भी इसकी शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की थी। राज्य मंत्री ने मुख्यमंत्री को भेजे शिकायती पत्र में स्पष्ट किया हैं कि पराग में बैठे अधिकारियों ने भ्रष्टाचार किया हैं। गंभीर शिकायतें हैं, फिर इसकी जांच भी हुई, मगर कार्रवाई इसमें फिर भी नहीं हुई।
पराग को गर्त में पहुंचाने वाले जिम्मेदारों पर आखिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही हैं? यह ऐसा संस्थान था, जिसका पश्चिमी यूपी में अपना नाम था। हजारों किसानों को इससे रोगजार भी मिल रहा था, लेकिन अब स्थिति खराब हो गई हैं, जिसके बाद भी संभालने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाये जा रहे हैं।