- श्रावणी पर्व के उपलक्ष में वेद प्रकाश सप्ताह का पांचवा दिन
जनवाणी संवाददाता |
शामली: आर्य उपदेशक आचार्य उमेश चंद कुलश्रेष्ठ ने कहा कि आर्य समाज मत, पंथ नहीं बल्कि एक वैचारिक आंदोलन है।
आर्य समाज मंदिर में श्रावणी पर्व के उपलक्ष्य में चल रहे वेद प्रचार सप्ताह के पांचवें दिन वैदिक यज्ञ, भजन एवं प्रवचनों के कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। यज्ञ के मुख्य यज्ञमान सुशील वर्मा व पुष्पा वर्मा, मनोज कुमार व चंचल , महीपाल व व राजेश देवी, मानी व अनुष्का दोनों बहनें रही। यज्ञ के ब्रह्मा आर्य समाज के पुरोहित डा़ रविदत्त आर्य रहे। नोएडा से आई भजनोपदेशक अलका आर्य ने बताया कि भक्त चार प्रकार होते हैं, जिनकी उन्होंने भजनों के माध्यम से व्याख्या की।
आगरा से आये आर्य उपदेशक आचार्य उमेश चंद कुलश्रेष्ठ ने धर्म और अधर्म की बड़े सरल शब्दों में व्याख्या की। उन्होंने कहा कि जिस स्वयं के साथ दूसरों को सुख देना धर्म है और दूसरों को पीड़ा देना अधर्म है। उन्होंने कहा कि ऋषि दयानंद के आने से पूर्व ब्राह्य आडम्बरों को धर्म समझा जाता था। उन्होंने कहा कि यज्ञ से बड़ा कोई धर्म नहीं है। किसी जीव की हत्या कर किया जाने वाला मांसाहार अधर्म है। कार्यक्रम संयोजक राजपाल आर्य, सुभाष धीमान और नितिन वर्मा रहे।
इस अवसर पर संरक्षक रघुवीर सिंह आर्य, प्रधान विनोद आर्य, मंत्री गिरधारी लाल गोयल आर्य, कोषाध्यक्ष देवेंद्र देव आर्य, शैलेश मुनि सत्यार्थी, ज्ञानेंद्र आर्य, रामेश्वर दयाल आर्य, त्रिलोक चंद जागड़ा, विकास कुमर, नरेंद्र सिंह आर्य, बीरबल आर्य, कृष्णपाल ताना, रणबीर सिंभालका, संतोष आर्य, नीलम आर्य, कौशल्या आर्या, शशिबाला, दिव्या, अमिता आर्या, मंजू आर्या, सीमा आर्या, वेदवती, मानसी आदि उपस्थित रहे।

