Saturday, May 16, 2026
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कोच की एंट्री पर रोक, रूपल जीत रही पदक

  • कोच विशाल सक्सेना और पत्नी अमिता सक्सेना नो एंट्री पर हर कोई स्टेडियम प्रशासन को इसको लेकर ठहरा रहा है गलत

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कितनी हैरानी की बात है कि एथलीट के कोच विशाल सक्सेना और उसकी पत्नी अमिता सक्सेना की स्टेडियम में एंट्री पर रोक लगी हुई है और उनकी शिष्या रूपल चौधरी पदक जीतने में लगी हुई है। हर कोई स्टेडियम प्रशासन को इसको लेकर गलत ठहरा रहा है।

मेरठ की बेटी रूपल चौधरी ने रजत पदक के बाद एक और पदक देश की झोली में डाल दिया है। रूपल चौधरी ने आज विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक झटक लिया। रूपल चौधरी ने अपने पहले ही अंतराष्ट्रीय दौरे में यह कमाल कर दिया। रुपल ने लगातार एथलेटिक्स चैंपियनशिप में दो पदक झटके हैं। रूपल चौधरी ने चांदी पर निशाना लगाने के बाद अब अंडर-20 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में दमदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक जीता है।

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कोलंबिया में हो रहे अंतराष्ट्रीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रूपल चौधरी ने लगातार दूसरा पदक झटका है। रूपल चौधरी ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 51.85 सेकंड के साथ यह उपलब्धि हासिल की। रूपल के कोच विशाल सक्सेना व अमिता सक्सेना भी अपनी शिष्या की इस बहुत खुश हैं। दोनों कोच का कहना है कि उनकी मेहनत सफल हो गई है।

कैलाश प्रकाश स्टेडियम में सिंथेटिक स्टेडियम न होने के कारण विशाल उसे दिल्ली प्रैक्टिस कराने ले जाते थे। वहीं स्टेडियम प्रशासन कोच विशाल के खिलाफ तुगलकी कार्रवाई कर रहा है। खुद विशाल का कहना है कि उसकी शिष्या पदक जीत रही है और स्टेडियम प्रशासन उसके साथ अन्याय कर रहा है।

किसान की बेटी ने फिर किया गांव का नाम रोशन

रोहटा: दो दिन पहले छोटी उम्र में बड़ा कारनामा करके दिखाने वाली शाहपुर-जैनपुर गांव की रूपल चौधरी ने आज फिर जिद का अपना लोहा मनवाया। 17 साल की भारतीय धावक रूपल चौधरी ने वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप के सेमीफाइनल में 52:77 सेकंड में 400 मीटर की रिले रेस 27 किलोमीटर की स्पीड से तय करते हुए न सिर्फ फाइनल में जगह बनाते हुए फाइनल जीतने का टारगेट बनाया, बल्कि एक बार फिर देश का नाम रोशन किया।

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इसे लेकर रूपल चौधरी के गांव में दूसरे दिन भी होली और दिवाली जैसा माहौल रहा। जहां परिवार के लोग खुशी से झूम उठे और पूरे गांव में उनकी सहेलियों ने होली और दिवाली एक साथ खेली पूरे गांव में मिठाई बांटी गई। रूपल की मां ममता चौधरी फुले नहीं समा रही है तो पिता ओमवीर भी गांव में उसके सहेलियों द्वारा किये गये जश्न में शामिल रहे। परिवार वालों ने एक-दूसरे को फिर न सिर्फ मिठाई बांटकर खुशी मनाई बल्कि पूरे गांव में सहेलियों ने मिठाई बाकी गांव में दूसरे दिन फिर दिवाली और होली जैसा माहौल बना दिया।

गांव के लोगों ने किसान की बेटी द्वारा लगातार नाम रोशन करने पर गर्व महसूस किया। रूपल चौधरी ने अपना लोहा दूसरे दिन मनाते हुए देश और दुनिया में फिर अपने नाम का डंका बजाकर 17 साल की उम्र में किसान की बेटी ने वो कर दिखाया जो हर मां-बाप का सपना होता है,इससे मां-बाप फूले नहीं समा रहे हैं उनका सीना चौड़ा हो रहा है।

वहीं दूसरी और रूपल चौधरी के लगातार सफलता को लेकर गांव में उसकी वापस लौटने पर जश्न की तैयारी को लेकर खासे उत्साहित नजर आ रहे हैं। इसे लेकर गांव के लोगों ने ऐलान किया कि से मेरठ बाइपास से गांव तक फूल माला से लदी गाड़ी में लादकर पूरे जोर-शोर के साथ स्वागत के साथ गांव में लाया जाएगा।

गांव में रूपल को मिला उड़न परी का नाम

लगातार सफलता दर सफलता शिखर के पायदान पर चढ़ती जा रही किसान की बेटी रूपल चौधरी को अब गांव के लोगों ने पूर्ण परिणाम दे दिया है। उसके सहेलियों ने बताया कि वह शुरू से ही स्कूल जाते के समय से लेकर खेल के मैदान तक में अपनी लोहा मनवा कर सबसे आगे निकल जाती थी। जो उसने आज भी सिद्ध कर दिखाया।

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इसे लेकर हम गांव के लोगों ने से उड़न परी रूपल का नाम दे दिया है । उड़न परी के नाम से मशहूर छरहरी काया और शरीर की मालिक महज 17 साल की उम्र में रूपल चौधरी ने वो कर दिखाया जो हर मां बाप का सपना होता है। इसे लेकर आप लोग गांव के लोग उसे गांव की बेटी नहीं उड़न परी से नाम से पुकारने लगे हैं।

भाजपा नेता पहुंचे रूपल के घर परिजनों को दी बधाई

क्षेत्र के शाहपुर-जैनपुर की बेटी रूपल ने कोलंबिया में अंडर 20 वर्ल्ड जूनियर एथलेटिक्स चैंपियन में मेडल जीतकर अपने गांव और क्षेत्र का नाम ऊंचा किया।

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इसको लेकर भाजपा नेता मनिंदर पाल सिंह ने गांव में पहुंच कर रूपल की मां ममता व पिता ओमवीर को फूलों का गुलदस्ता देकर बधाई दी। इनके साथ सचिन मलिक, लोकेंद्र रोहटा, भारतवीर, मदन आदि मौजूद रहे।

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