Thursday, July 2, 2026
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साढ़े पांच हजार से ज्यादाा मरीज दे चुके हैं टीबी को मात

  • लक्षण नजर आने पर तुरंत कराएं टीबी की जांच : डा. रणधीर, सहारनपुर में कुल है 47 टीबी चैंपियन

जनवाणी संवाददाता |

सहारनपुर: सन् 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। जिला क्षय रोग विभाग का प्रयास है कि शुरूआत में ही टीबी रोगी की पहचान हो जाए और उसे तुरंत उपचार मिलने लगे, ताकि उनके संपर्क वाले लोग संक्रमण से बच सकें। इसी के साथ विभाग का प्रयास रहता है कि टीबी मरीज के संपर्क में आने वाले हर व्यक्ति की स्क्रीनिंग हो और उसे प्रीवेंटिव थेरेपी के तहत दवा दी जाए। यह जानकारी जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ रणधीर सिंह ने दी।
डॉ रणधीर सिंह ने बताया- सन 2022 में अब तक टीबी के कुल 8568 रोगी चिन्हित किए गए हैं। इनमें से करीब 55 सौ रोगी टीबी को मात दे चुके हैं। उन्होंने बताया -जनपद में कई टीवी चैंपियन काउंसलिंग के जरिए लगातार रोगियों की मदद कर रहे हैं। उन्होंने बताया- निक्षय मित्र भी टीबी मरीजों को पुष्टाहार के साथ सामाजिक व भावनात्मक सहयोग प्रदान कर रहे हैं। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर जिलाधिकारी अखिलेश सिंह, मुख्य विकास अधिकारी विजय कुमार, मेयर संजीव वालिया, राज्य मंत्री कुंवर बृजेश सिंह, विधायक राजीव गुंबर, विधायक मुकेश चौधरी, विधायक कीरत सिंह ने भी टीवी रोगियों को गोद लिया। जनपद में करीब 2470 टीवी रोगियों को गोद लिया जा चुका है। डॉ रणधीर सिंह ने बताया -अभी कुछ और निक्षय मित्रों का पंजीकरण किया जाएगा, ताकि इस दिशा में और तेजी से काम हो सके और टीवी का पूरी तरह से उन्मूलन किया जा सके। दस्तक अभियान में चिन्हित किए गए टीबी मरीजों को संबंधित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र (पीएचसी) से हर संभव

उपचार दिया जा रहा है। यही नहीं क्षय रोग विभाग निक्षय मित्रों के सहयोग से न्यूट्रिशन सपोर्ट तथा काउंसलिंग पर भी विशेष रूप से जोर दे रहा है। उन्होंने जनपद वासियों से अपील की है कि क्षय रोग के लक्षण आने पर तत्काल अपने नजदीकी टीबी केंद्र पर जाकर निशुल्क टीबी जांच कराएं। जांच में टीबी की पुष्टि होने पर क्षय रोग विभाग की ओर से तत्काल निशुल्क उपचार शुरू किया जाएगा। जिला क्षय रोग अधिकारी ने कहा- कई क्षय रोगी बीच में ही दवा खाना छोड़ देते हैं जिससे उन्हें एमडीआर (मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट) टीबी हो जाती है। एमडीआर टीबी ज्यादा खतरनाक है और उसका उपचार भी लंबा चलता है जबकि नियमित रूप से दवा खाने पर अधिकतर क्षय रोगी छह माह में ठीक हो जाते हैं।

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