Sunday, March 22, 2026
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धनाभाव में टूटे शटलर दीपक के सपने

  • पैरा खिलाड़ी का नाम सूची से हटाया, दक्षिणी अमेरिकी देश पेरू में देश का प्रतिनिधित्व करने का आया था बुलावा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: देश के लिए खेलने का सपना देख रहे पैरा खिलाड़ी की किसी ने मदद नहीं की। नतीजा अंर्तराष्टÑीय प्रतियोगिता में जाने वाली टीम से इस खिलाड़ी का नाम हटा दिया गया। खिलाड़ी को पेरू में 28 नवंबर से 4 दिसंबर तक होनें वाली प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए अपना खर्च उठाने की सहमति देनी थी, लेकिन तमाम प्रयासों के बाद भी उसे कहीं से कोई मदद नहीं मिल सकी जिसके बाद खिलाड़ी का नाम टीम से हटा दिया गया और उसका सपना टूट गया।

पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी दीपक जावला में प्रतिभा कूट-कूट कर भरी हैं। उसने राष्टÑीय स्तर की बैडमिंटन प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल भी प्राप्त किया है, लेकिन उसकी प्रतिभा को पहचानने वाला कोई नहीं हैं। दीपक को पेरू से अपने देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए बुलावा आया था,

लेकिन पैसों के अभाव में वह उस टीम में शामिल होने की सहमति नहीं दे सका जो टीम पेरू जा रही हैं। प्रतियोगिता का सारा खर्च जिसमें फ्लाइट के खर्च से लेकर वहां रहने, खाने व जरूरी खेल के सामान पर होने वाला खर्च शामिल है खिलाड़ी को ही वहन करना था, लेकिन पैसे न होने की वजह से वह इसके लिए तैयार नहीं हो सका।

सांसद और प्रशासन तक से मांगी थी मदद

रुड़की रोड स्थित इंद्रलोक कॉलोनी के रहने वाले दीपक ने सबसे पहले सांसद राजेन्द्र अग्रवाल से मदद मांगी थी। जिसके बाद उनके एक प्रतिनिधि ने उससे संपर्क भी किया, लेकिन मदद नहीं हो सकी। इसके बाद दीपक डीएम दीपक मीणा से भी मिला और बात सामने रखी, लेकिन जिलाधिकारी ने भी उसे सिर्फ आश्वासन ही दिया मगर मदद नहीं हो सकी। इससे पहले दीपक ने राज्यसभा सांसद जयंत चौधरी के पीए से मिलकर मदद मांगी थी। क्योंकि उसे पता चला था कि जयंत चौधरी ने अपनी सांसद निधि को खिलाड़ियों पर खर्च करने की घोषणा की है, लेकिन वहां से भी मायूसी हाथ लगी।

क्या ऐसे ही खेलेगा इंडिया और आगे बढ़ेगा इंडिया?

एक तरफ तो केन्द्र व राज्य सरकारें खेलों को बढ़ावा देने के लिए खिलाड़ियों को तमाम तरह की मदद उपलब्ध कराने के दावे करती है। जबकि हकीकत इससे बिल्कुल उलट हैं, होनहार खिलाड़ी द्वारा जनप्रतिनिधियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक के चक्कर लगाने के बाद भी मदद नहीं मिल सकी। इससे बड़ी विडम्बना और क्या हो सकती है?

खिलाड़ी की मदद करने के लिए हम पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन समय कम होने की वजह से मामला अधर में लटक गया। यदि थोड़ा पहले वह हमसे मिल लेता तो हम जरूर उसे प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए सभी जरूरी कदम उठते। -राजेश चौधरी, सचिव जिला बैडमिंटन एसोसिएशन

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