जनवाणी ब्यूरो |
बलरामपुर: माह नवम्बर के तृतीय बुधवार को किसान दिवस उप कृषि निदेशक डा0 प्रभाकर सिंह की अध्यक्षता में विकास भवन सभागार में सम्पन्न हुआ। उनके द्वारा फसल अवशेष/पराली प्रबन्धन के बारें में विस्तृत जानकारी दी गयी। उन्होंने कहा कि किसान भाई फसल अवशेष प्रबन्धन के लिए उचित माध्यम अपनाएं जैसे- वेस्ट डिकम्पोजर, कृषि यन्त्रों के माध्यम से या फिर अपनी नजदीकी गौ-आश्रय स्थल को दान दे सकते है।
फसल अवशेष जलाने से रोकने हेतु सैटेलाइट से इसकी निरन्तर निगरानी की जा रही है यदि कोई किसान भाई फसल अवशेष जलाता है तो 02 एकड़ तक कृषि क्षेत्र के लिए रु0 2500, 02 एकड़ से 05 एकड़ तक कृषि क्षेत्र के लिए रु0 5000 व 05 एकड़ से अधिक कृषि क्षेत्र के लिए रु0 15,000 प्रति घटना आर्थिक दण्ड देना होगा। इसके साथ ही उनके द्वारा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, पी0एम0 कुसुम योजना के सम्बन्ध में जानकारी दी गयी।
इस दौरान जिला कृषि अधिकारी आर0पी0 राणा द्वारा जनपद में कृषि निवेशों यथा- खाद्य, बीज की उपलब्धता के सम्बन्ध में जानकारी दी गयी। उन्होंने कहा कि पर्याप्त मात्रा में चना, मटर, गेंहूॅ, सरसों के बीज उपलब्ध है जो भी किसान बीज लेना चाहते है अपने क्षेत्र के विकास खण्ड में बीज गोदाम पर बीज ले सकते है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जिन किसान भाइयों का पी0एम0 किसान सम्मान निधि का पैसा नहीं आया है वे अपना ई-के0वाई0सी0 अवश्य करालें।
डिप्टी आर0एम0ओ0 नरेन्द्र तिवारी ने बताया कि जनपद में 36 क्रय केन्द्र के माध्यम से धान की खरीद की जा रही है। 02 नए क्रय केन्द्र कौवापुर(तुलसीपुर) व श्रीनगर (पचपेड़वा ) प्रस्तावित है। जनपद का कुल लक्ष्य 35 हजार मीट्रिक टन है। कृषक भाई fcs.up.gov.in पर पंजीकरण कराकर अपने उत्पाद का विक्रय कर सकते है। अभी तक जनपद में कुल 2009 कृषक पंजीकृत हुये जिसमें 1092 किसानों का सत्यापन हो चुका है। इसके अतिरिक्त उद्योग एवं गन्ना विभाग ने अपने विभाग की योजनाओं के बारे में जानकारी दी।
किसान दिवस के दौरान किसानों ने अधिकारियों के सामने अपनी समस्याएं बताई जिसमें सतीश श्रीवास्तव कृषक बलरामपुर द्वारा बजाज चीनी मिल द्वारा किसानों के अवशेष भुगतान की मांग की गयी। इसके अतिरिक्त कृषकों द्वारा धान क्रय केन्द्रों पर सी0सी0 कैमरे लगाने की मांग की गयी। उप कृषि निदेशक द्वारा किसान भाइयों को आस्वासन दिया गया कि किसानों की जो भी समस्याएं है उनके समाधान के लिए उच्च अधिकारियों को अवगत कराकर समाधान कराया जाएगा।
उन्होंने कहा कि किसान भाई तकनीकी खेती करें, खेतों में जैविक खाद का प्रयोग अधिक से अधिक मात्रा में करें, रसायनिक खादों का प्रयोग कम मात्रा में करें इससे अधिक पैदावार प्राप्त कर सकते है।

