Friday, May 1, 2026
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एमबीबीएस प्रकरण: तीसरी बार बयान लेने विवि पहुंची एसआईटी

  • कर्मचारियों और कुछ अधिकारियों के दर्ज हुए बयान
  • 2018 से एमबीबीएस प्रकरण की जांच कर रही है एसआईटी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: चौधरी चरण सिंह विवि में दो साल पहले हुए एमबीबीएस कॉपी घोटाले की जांच एसआईटी कर रही है। बुधवार को अचानक से एसआईटी टीम सीसीएसयू पहुंची और विवि के कुछ कर्मचारियों समेत अधिकारियों के एमबीबीएस कॉपी अदला-बदली के प्रकरण में तीसरी बार बयान दर्ज किए।

बता दें कि 18 मार्च 2018 को एसटीएफ मेरठ ने विवि में एमबीबीएस की कॉपियां बदलने में शामिल गिरोह का पर्दाफाश किया था। एसटीएफ का दावा था कि यह गिरोह परीक्षा के बाद में विद्यार्थियों की फिर से कॉपियां लिखवाकर उत्तर पुस्तिका विभाग में बदल देता था। इस प्रकरण में विवि के कुछ कर्मचारी भी शामिल थे। एसटीएफ ने पूरे मामले मे कवि राज को मुख्य आरोपी बनाया था।

एसटीएफ ने दावा किया था कि कविराज विवि के बाहर कॉपियां लिखवाता था और फिर उत्तर पुस्तिका विभाग में इन्हें बदल देता था। एसटीएफ ने प्रेसवार्ता करते हुए इसे गिरफ्तार किया था। उसके बाद हरियाणा से डॉक्टर की बेटी और मुजफ्फरनगर कॉलेज का नाम आने पर एसटीएफ ने इस मामले को एसआईटी को ट्रांसफर कर दिया था।

हाल ही में एसआईटी ने विवि के 31 कर्मचारियों को नोटिस भेज बयान दर्ज कराने के लिए लखनऊ बुलाया था, लेकिन कोरोना की वजह से कर्मचारी लखनऊ नहीं जा सकें थे।

जिसके बाद एसआईटी खुद ही विवि में कर्मचारियों के बयान लेने पहुंच गई थी। वहीं उसके बाद टीम एक बार फिर विवि आई थी, जिसमें विवि के गोपनीय विभाग में जाकर कॉपियों के ले जाने व लाने की व्यवस्था को जानने की कोशिश की थी। मगर बुधवार को तीसरी बार अचानक से एसआईटी टीम दोपहर में विवि पहुुंच गई और कुछ कर्मचारियों के साथ अधिकारियों के बयान भी दर्ज किए गए। सूत्रों की माने तो एमबीबीएस प्रकरण में एसआईटी को कुछ बड़ा सबूत हाथ लगा है। जिससे विवि के कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई है।

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