- चुप्पी के साथ मतदान कर मतदाताओं ने बदला हवाओं का रुख
जनवाणी संवाददाता |
मुजफ्फरनगर: विधानसभा चुनाव में मतदाताओं ने अपने मत के प्रयोग को लेकर जो खामोशी अख्तियार की, उससे राजनीतिक गणित पूरी तरह बिगड गया। खामोश मतदान के चलते प्रत्याशियों के समर्थक आंकलन नहीं लगा पा रहे हैं कि किसका वोट उन्हें मिला तथा किसका वोट खिलाफ गया। हालांकि प्रत्याशियों के समर्थक अपने-अपने हिसाब से मतों का जोड-घटा कर अपने प्रत्याशी की जीत का दावा कर रहे हैं, परन्तु हकीकत यह है कि दोनों प्रत्याशियों की तकदीर का फैसला ईवीएम में बंद हो गया है, जो 8 दिसम्बर को ही सामने आयेगा।
गौरतलब है कि खतौली विधायक विक्रम सैनी को दंगों के एक मामले में सजा होने के बाद उनकी विधानसभा की सदस्यात समाप्त कर दी गयी थी, जिसके बाद खतौली विधानसभा सीट खाली हो गयी थी। सोमवार को इस सीट पर उपचुनाव हो रहा था। भाजपा ने इस उपचुनाव में विक्रम सैनी की ही पत्नी राजकुमारी सैनी को अपना प्रत्याशी बनाया था, जबकि गठबंधन ने मदन भैया को अपना प्रत्याशी बनाया था। दोनों प्रत्याशियों के बीच जमकर मुकाबला हुआ।
गठबंधन प्रत्याशी जहां इस चुनाव में मुस्लिम मतदाताओं के साथ-साथ जाट, गुर्जर व दलित वोटों के अलावा कुछ त्यागी समाज के वोटों को भी अपने पाले में मानकर अपनी जीत तय मान रहा था, वहीं भाजपा समर्थक इस चुनाव में सभी सम्प्रदायों के वोटों को अपने पक्ष में मानकर भाजपा प्रत्याशी की सीट पहले से भी ज्यादा वोटों से मान रहे है। अब देखना है कि 8 दिसम्बर को को किसके सिर पर जीत का ताज सजेगा और कौन विधायक बनेगा।
साईलेंट वोट होगा निर्णायक स्थिति में
उपचुनाव में जहां कुछ लोगों द्वारा जोर-शोर से अपने-अपने प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान किया, वहीं बड़ा तबका ऐसा था, जिसने चुपचाप अपने मताधिकार का प्रयोग किया। यह वोट बैंक ऐसा था, जिसने मतदान तो किया पर यह खुलासा नहीं किया कि उसने किसके पक्ष में मतदान किया है।
इस वोट बैंक को दोनों प्रत्याशी अपना वोट बैंक मानकर अपनी जीत को सुनिश्चित कर रहे हैं, परन्तु इस वोट बैंक ने किसके पक्ष में अपना मतदान किया, यह भविष्य के गर्भ में है, जो 8 दिसम्बर को ही पता चल पायेगा, परन्तु यह तय है कि यह वोटबैंक जिसके पक्ष में भी जायेगा, उसी के सिर पर जीत का सहेरा बंधेंगा।

