Saturday, March 28, 2026
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आखिर किस ‘चश्मे’ से दिखेगी पीडब्ल्यूडी को अपनी कमियां

  • सबसे बड़ा सवाल! सब कुछ जानकर भी अंजान क्यों बने बैठे रहते हैं अधिकारी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) क्या अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ रहा है। क्या उसे अपनी कमियां दिखाई नहीं दे रही हैं? हस्तिानापुर प्रकरण हो या फिर सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का अभियान। अपने ही ठेकेदारों से अनबन हो या फिर उनके भुगतान का मामला। विभागीय अधिकारी हर स्तर पर फेल हो रहे हैं। वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों की डांट फटकार के बावजूद स्थानीय पीडब्ल्यूडी अधिकारी अपने काम के प्रति जरा भी सजग नहीं दिख रहे हैं।

हस्तिनापुर जैसे बड़े मुद्दे पर भी अधिकारी जरा भी संवेदनशीलता का परिचय नहीं दे रहे। यदि भीकुण्ड पुल पर पूर्व में हुए कटान पर फौरन एक्शन होता तो न तो गंग नहर में नाव हादसा होता और न ही एक बेकसूर पीडब्ल्यूडी अधिकारियों की उदासीनता के चलते अपनी जान गंवाता। यदि एप्रोच रोड पर विभागीय अधिकारी उदासीन न होते तो अब मेरठ की ओर से शुरू हुए एप्रोच रोड के कटान को रोका जा सकता था, क्योंकि दैनिक जनवाणी पूर्व में ही पुल पर आई दरारों को लेकर चेता चुका था।

ठेकेदारों से भी विभागीय अधिकारी ढंग से काम नहीं ले पा रहे हैं। ठेकेदारों का आरोप है कि जब पूर्व में कराए गए कामों का मेहनताना नहीं मिल पाए तो अग्रिम काम की उम्मीद विभाग ठेकेदारों से कैसे कर सकता है। कई बार ठेकेदार अधीक्षण अभियंता से लेकर मुख्य अभियंता व अन्य अधिकारियों के समक्ष विरोध तक दर्ज करा चुके हैं। मेरठ पीडब्ल्यूडी के कुछ अधिकारियों में आपसी खींचतान भी जग जाहिर है। उधर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सड़कों को गड्ढा मुक्त कराने के निर्देश भी हवा हवाई हैं।

और भी कई विभागीय मुद्दे हैं जिन पर पीडब्ल्यूडी अधिकारियों की छीछालेदर होती है। एक बानगी भर यह भी देखिए कि ग्राम सठला का एक पुल जो छह गांवों को आपस में जोड़ रहा है वो इतनी जर्जर हालत में हैं कि कभी भी यहां हादसा हो सकता है, लेकिन इसके बावजूद यह पुल विभाग की नजरों में क्षतिग्रस्त पुलों की श्रेणी में ही शामिल नहीं है। कुल मिलाकर यदि विभागीय कार्यों का विश्लेषण किया जाए तो विभिन्न स्तरों पर मेरठ पीडब्ल्यूडी में खामियों की भरमार है।

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