Sunday, June 28, 2026
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मेडिकल इमरजेंसी में वार्ड ब्वॉयों की संख्या कम

  • कोरोना के लिए अलग से स्टाफ की जरूरत
  • लेकिन स्टॉफ की कमी से जूझ रहा मेडिकल प्रशासन
  • 75 बेडों की इमरजेंसी में महज 15 वार्ड ब्वॉय, कैसे लड़ेंगे कोरोना से?

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मेडिकल कॉलेज 24 घंटे मरीजों को हर तरह की चिकित्सा सेवाएं देने के लिए तैयार रहता है, लेकिन यहां की इमरजेंसी में ही स्टाफ की कमी है। 75 बेडों की इमरजेंसी में महज 15 वार्ड ब्वॉय नियुक्त है, इनमें भी कुछ छुट्टी पर रहते हैं।

जिस वजह से मरीजों की देखभाल में समस्या पैदा हो रही है। वहीं, कोरोना की दस्तक के बाद मेडिकल में अलग से कोविड वार्ड बनाया गया है। जिसमें इस समय 20 बेड है। इनके लिए अलग से स्टाफ की जरूरत होगी ऐसे में किस तरह कोरोना से जंग लड़ी जाएगी यह बड़ा सवाल है।

नया वेरिएंट 18 गुना ज्यादा खतरनाक

कोरोना के जिस नए वेरिएंट बीएफ.7 ने इस बार दस्तक दी है वह ओमिक्रान वेरिएंट का ही नया स्वरूप है, लेकिन इस वेरिएंट को ओमिक्रॉन से 18 गुना ज्यादा खतरनाक बताया जा रहा है। एक व्यक्ति इससे संक्रमित होनें के बाद अगले 18 लोगो को संक्रमित कर सकता है। जिले में कोरोना से निपटने के लिए सभी तैयारियां पूरी करने के दावें किए जा रहे हैं, लेकिन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में केवल 15 वार्ड ब्वॉय है जो 75 बेडों पर भर्ती मरीजों की देखभाल कर रहे हैं।

ट्रामा और इमरजेंसी में महज 15 वार्ड ब्वॉय

मेडिकल की इमरजेंसी व ट्रामा सेंटर में कुल 75 बैड है, इन बैडों के लिए महज 15 वार्डब्वॉय ही नियुक्त है। इनमे से 8 वार्डब्वॉय नीचे इमरजेंसी में जबकि 7 ऊपर ट्रामा सेंटर में ड्यूटी पर रहते है। वहीं इनमें से भी 10 वार्डब्वॉय संविदा पर हैं, जबकि परमानेंट वार्डब्वॉयों की संख्या पांच है।

परमानेंट में से भी एक या दो वार्डब्वॉय छुट्टी पर रहते है तो इनकी संख्या भी कम ही रहती है। इमरजेंसी में कुल तीन शिफ्टे चलती है जिनका समय सुबह 7 से दोपहर 1 बजे, दोपहर 1 बजे से शाम 7 बजे और शाम 7 बजे से सुबह 7 बजे तक रहता है। ऐसे में महज 15 वार्डब्वॉय किस तरह मरीजों की देखभाल करते है इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

वार्ड ब्वॉयों की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण

मेडिकल में भर्ती किसी भी मरीज के लिए वार्ड ब्वॉय की ड्यूटी काफी अहम होती है। मरीज की शिफ्टिंग से लेकर आॅक्सीजन देनें में वार्ड ब्वॉय का ही योगदान रहता है। इसी तरह मरीज की ड्रेसिंग, सीटी स्कैन, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड के साथ ही एंबुलेंस से मरीज को बैड तक लानें व ले जानें के लिए वार्ड ब्वॉय का ही सहारा होता है। उनकी उनुपस्थिति में मरीजों के तीमारदार इन जिम्मेदारियों को निभाते है।

कोरोना के लिए अलग रहता है स्टाफ

कोरोना को लेकर मेडिकल में भी अलग से वार्ड बनाया गया है जिसमें 20 बैड सुरिक्षित रखे गए है। हालांकि इस समय यहां एक भी संक्रमित नहीं है लेकिन जरूरत पड़नें पर यहां के लिए अलग से स्टाफ रहता है। यह स्टाफ कोरोना मरीजों की देखभाल में होने की वजह से किसी और मरीज से दूर ही रहता है।

कोरोना वार्ड के स्टाफ को ड्यूटी करने के बाद क्वारेटींन रहना होता है, साथ ही उन्हें अपने घर जानें से पहले भी आइसोलेशन में रहना होता है। सवाल यह कोरोना संक्रमितों के मेडिकल में भर्ती होने के बाद उनकी देखभाल करने के लिए स्टाफ की जरूरत कहां से पूरी की जाएगी। यदि इमरजेंसी के स्टाफ को कोरोना वार्ड में तैनात किया जाता है तो इमरजेंसी के मरीजों की देखभाल कैसे होगी यह बड़ा सवाल है।

कोरोना ओमिक्रोन के सब वेरिएंट बीएफ.7 से रहे सतर्क

मोदीपुरम: डा. दिव्यांशु सेंगर मेडिकल आॅफिसर प्यारेलाल अस्पताल मेरठ ने बताया कि चीन में लगातार बढ़ते कोरोना के मामले के चलते हमें भी सतर्क रहने की जरूरत है। क्योंकि कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रोन के सब वेरिएंट बीएफ.7 के 4 मामले भारत में भी रिपोर्ट किए गए हैं। वहीं, इसके मद्देनजर सभी को सतर्क रहने की आवश्यकता है। बीएफ.7 के लक्षण भी कॉमिक रोल के पहले मिले वेरिएंट के लक्षण के जैसे ही दिखाई देते हैं।

इनमें बुखार गले में खरास और सिरदर्द की शिकायतें मिलती है। यह इंसान के स्वाश्न तंत्र के ऊपरी हिस्से को प्रभावित करता है। कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के लिए काफी घातक साबित हो सकता है। इसलिए दो गज की दूरी फिर से है जरूरी का पालन करना होगा। इस समय जरूरी है कि सभी लोग मास्क लगाना प्रारंभ कर दें, क्योंकि जब आप मास्क लगाना प्रारंभ करेंगे तो निश्चित ही कोरोना को हरा सकेंगे कोरोना से डरने की आवश्यकता नहीं है

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केवल सुरक्षा उपायों को अपनाना प्रारंभ करें। डा. दिव्यांशु सेंगर ने बताया कि टीकाकरण अभी सबसे अच्छा हथियार है। ब्रिटेन ने हाल में मॉडर्ना के टीके बाय बैलेंस बूस्टर की मंजूरी दी है। यह कोरोना के सभी वेरिएंट के साथ ओमिक्रोन के सभी सब वेरिएंट को खत्म करने में कारगर है। जिन लोगों ने बूस्टर डोज नहीं लगाई है।

वह लोग बूस्टर डोज लगाने यदि कोई भी लक्षण दिखाई देते हैं तो जिनोम सिक्वेंसिंग अवश्य कराएं। दिव्यांशु सेंगर ने बताया किसी को भी घबराने की जरूरत नहीं है केवल गाइडलाइन के अनुसार मास्क और सैनिटाइजर का प्रयोग करें 2 गज की दूरी बनाए रखें और हरी सब्जियां तथा फलों का सेवन अधिक से अधिक करें, जिससे आपकी यूनिटी बड़ी रहे।

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