Saturday, May 2, 2026
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जान के ‘दुश्मन’ बन सड़कों पर घूम रहे आवारा ‘गोवंश’

  • किसानों की फसल को चट कर रहे आवारा गोवंश
  • सड़क, दफ्तर, स्कूल हर जगह झुंड के रूप में घूम रहे गोवंश

जनवाणी संवाददाता |

रोहटा: लाखों करोड़ों खर्च के बाद भी खेत-खलिहान, सड़कों और सरकारी दफ्तरों में आवारा गोवंश की भरमार है। झुंड के रूप में सड़कों पर यमदूत बनकर घूम रहे आवारा गोवंश लोगों की जान ले रहे हैं तो खेतों में किसानों की फसल को भी चट कर रहे हैं। क्षेत्र में बनाई गई करोड़ों रुपये की गोशाला होने के बावजूद स्थानीय प्रशासन के नुमाइंदे इस ओर से आंखें फेरे बैठे हैं। जबकि आवारा गोवंश पड़ रही कड़ाके की ठंड में भी सिकुड़ने को मजबूर हैं।

वहीं, दूसरी ओर छुट्टा घूम रहे आवारा गोवंश से किसान परेशान हो चुके हैं। किसानों से पहले खेत पर पहुंचने गोवंश फसल को चट कर रहे हैं। जिससे किसानों को खासी आर्थिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों की लह-लहाती हरी-भरी फसल को आवारा गोवंश झुंड के रूप में खेत में घुसकर तथा और बर्बाद कर रहे हैं। इससे किसान परेशान हाल है और स्थानीय प्रशासन से बार-बार शिकायत और मांग कर चुके हैं, लेकिन बावजूद इसके स्थानीय प्रशासन के कानों तक पर जूं नहीं रेंग रही है।

सरकारी दफ्तर ब्लॉक हो अस्पताल या स्कूल या फिर सड़क सब जगह आवारा गोवंश झंड के रूप में दिखाई दे रहे हैं। सड़कों पर छुट्टा घूम रहे आवारा गोवंश आए दिन लोगों की जान ले रहे हैं। यूपी सरकार की महत्वकांक्षी योजना गोशाला बनने की कार्रवाई पर भी सवालिया निशान खड़े कर रहे हैं। गौरतलब है कि ब्लॉक के उकसया गांव में करोड़ों की लागत से गोशाला बनाई गई है, लेकिन बावजूद इसके छुट्टा घूम रहे आवारा गोवंश को गोशाला पहुंचाने का कोई ठोस बंदोबस्त नहीं है।

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वहीं, इस संबंध में खंड विकास अधिकारी प्रभात श्रीवास्तव से बात की गई तो उनका कहना था कि नियमानुसार लोकल बॉडी नगर पंचायत ग्राम पंचायत को पशुओं को संरक्षित करना है। वर्तमान में गोशाला ओवरक्राउडेड है, फिर इतने पशु आ गए हैं या किसानों द्वारा छोड़े जा रहे हैं। जब तक किसानों का सहयोग संभव नहीं होगा पशुओं की समस्या जनता द्वारा ही पैदा की गई। इस समस्या का समाधान जनता द्वारा ही किया जा सकता है।

अधिकारियों को बना चुके बंधक, फिर भी नहीं समाधान

छुट्टा घूम रहे आवारा गोवंश के पकड़ने की मांग को लेकर पांच दिन पहले जहां ब्लॉक पर तालाबंदी क अफसरों को बंधक बनाने वाले मानव अधिकार राष्ट्रीय पहरी संस्था के लोगों ने खूब बवाल किया था और चेतावनी दी थी, लेकिन बावजूद इसके प्रशासन के कानों पर जूं नहीं रेंगी।

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