जनवाणी संवाददाता |
मुजफ्फरनगर: नव दलित लेखक संघ की कहानी वाचन, परिचर्चा एवं काव्य पाठ गोष्ठी दिल्ली के मयूर विहार फेस टू में संपन्न हुई। गोष्ठी डा. संजीत कुमार की कहानी ‘इक्कीस पोस्ट’ पर केंद्रित रही। यह कहानी दलित समाज के सफाई कर्मियों की इक्कीस पोस्ट में हुई धांधलेबाजी और न्यायिक प्रक्रिया की लेटलतीफी को आधार बनाकर लिखी गई है।
इक्कीस पोस्ट के बहाने, इस एक कहानी में संबंधित दलित समाज की त्रासदियों से जुड़ी और भी कई कहानी आ समाई हैं। गोष्ठी की अध्यक्षता बंशीधर नाहरवाल ने की और संचालन डा. अमित धर्मसिंह ने किया। गोष्ठी में प्रमुख रूप से डा. संजीत कुमार, डा. पूनम, रायल, ममता अंबेडकर, नीशू सिंह, डा. पूनम तुषामड, मामचंद सागर, जोगेंद्र सिंह, बृजपाल सहज, समय सिंह जौल, डा. घनश्याम दास, डा. अमित धर्मसिंह, हुमा खातून, पुष्पा विवेक, डा. मनोरमा गौतम, डा. गीता कृष्णांगी और बंशीधर नाहरवाल आदि रचनाकार उपस्थित रहे। गोष्ठी के आरंभ में, डा. संजीत कुमार द्वारा कहानी इक्कीस पोस्ट का प्रभावी वाचन किया गया।
इसके उपरांत कहानी पर उपस्थित रचनाकारों ने सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए। विचार प्रस्तुत करने वालों में डा. पूनम तुषामड, मामचंद सागर, जोगेंद्र सिंह, ममता अंबेडकर, डा. पूनम, बृजपाल सहज, समय सिंह जौल, डा. घनश्याम दास, डा. अमित धर्मसिंह, हुमा खातून, पुष्पा विवेक, डा. मनोरमा गौतम, डा. गीता कृष्णांगी और बंशीधर नाहरवाल रहे। विचारों में कहानी के सभी पक्षों पर खुलकर चर्चा की गई।
कोई संदेह नहीं कि इक्कीस पोस्ट कहानी एक मजबूत और बेजोड़ कहानी बन पड़ी है, तभी उस पर विस्तृत बातचीत हो पाई। कहानी परिचर्चा के बाद उपस्थित कुछ कवियों ने काव्य पाठ किया। काव्य पाठ करने वालों में डा. पूनम तुषामड, ममता अंबेडकर, डा. संजीत कुमार, मामचंद सागर और जोगेंद्र सिंह रहे। गोष्ठी के अंत में डा. संजीत कुमार को नदलेस की वार्षिकी सोच और पैन भेंटस्वरूप दिया गया। मामचंद सागर और डा. पूनम तुषामड को नदलेस के आजीवन सदस्यता पत्र और पैन भेंट किए गए। उपस्थित रचनाकारों का अनौपचारिक धन्यवाद ज्ञापन हुमा खातून ने किया।

