Wednesday, March 18, 2026
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फाइटर जेट क्रैश में एक पायलट की मौत, दो की हालत गंभीर

  • लड़ाकू विमानों के आपस में टकराने से हुआ हादसा?

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के मुरैना में शनिवार की सुबह हुए एक बड़े हादसे में एयरफोर्स के दो लड़ाकू विमान सुखोई-30 और मिराज 2000 दुर्घटनाग्रस्त के शिकार हो गए।

बताया जा रहा है कि दोनों विमानों ने एमपी के ग्वालियर एयरबेस से उड़ान भरी थी, जहां अभ्यास चल रहा था। रक्षा मंत्री ने एयरफोर्स चीफ से इस हादसे को लेकर बातचीत की है।

वहीं, फाइटर जेट क्रैश को लेकर वायुसेना ने जांच बैठा दी है। साथ ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मामले पर नजर बनाए हुए हैं।

मध्य प्रदेश में दो विमान आसमान में टकरा गए। हालांकि, आपस में ये टकाराए या नहीं इसकी जांच के लिए वायु सेना ने जांच के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी का आदेश दिया है।

बताते हैं, सुखोई और मिराज 2000 ग्वालियर के एयरबेस से आज सुबह अभ्यास के लिए उड़ान भरी थी। उड़ान भरने के तुंरत बाद दोनों विमान क्रैश होकर जंगल में गिर गए। एक में दो पायलट थे और दूसरे में एक पायलट। दो पायलटों को बचा लिया गया है, हादसा मुरैना के जंगल में हुआ।

ग्रामीणों के अनुसार, घटना सुबह लगभग दस बजे की है। पहाड़गढ़ इलाके में ग्रामीणों ने आसमान में एक विमान जलते हुए देखा और फिर उसके टुकड़े जमीन में गिरते हुए देखा।

इसके बाद आसपास हड़कंप मच गया। लोगों ने उस तरफ दौड़ लगाई, जिस तरफ विमान के टुकड़े जलकर गिर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि ईश्वर महादेव मंदिर के पास दुर्घटना ग्रस्त हो गया।

लोगों का कहना है कि इन विमानों में जब आग लगी तब वे मुरैना जिले के कैलारस कस्बे के ऊपर से गुजर रहे थे। तभी लोगों ने हवा में उन्हें आग से जलते देखा तो हड़कंप मच गया कि अगर इसका मलबा नीचे गिरा तो पूरा कस्बा तबाह हो सकता है। लेकिन मलवा काफी दूर जंगल मे गिरा। माना जा रहा है कि पायलट ने अपनी जान की बाजी लगाकर फादग्रह कस्बे को जलने से बचाया।

घटना की सूचना मिलते ही मुरैना के कलेक्टर और एसपी मौके पर पहुंचे और बड़ी संख्या में डॉक्टर और पुलिस के दल भी वहां पहुंच गए। घटना के बाद ग्वालियर के महाराजपुरा एयरबेस सेंटर से आधा दर्जन से ज्यादा हेलीकॉप्टर रवाना हुए। इसमें रेस्क्यू दल के सदस्य थे। दिल्ली और इलाहवाद से भी वायुसेना के वरिष्ठ अफसर मौके के लिए रवाना हुए।

जानकारी के मुताबिक, दुर्घटना के दौरान सुखोई 30 में दो पायलट थे। जबकि मिराज 2000 में एक पायलट था। बता दें कि मिराज 2000 फाइटर जेट्स को उड़ाने के लिए सिर्फ एक पायलट की जरूरत होती है। इस जेट की लंबाई 47.1 फीट होती है। विंगस्पैन 29.11 फीट होती है, ऊंचाई 17.1 फीट होती है।

हथियारों और ईधन के साथ इसका वजन 13,800 किलोग्राम हो जाता है। वैसे यह 7500 किलोग्राम वजन का है। 26 फरवरी 2019 को 12 मिराज 2000 फाइटर जेट्स ने ही पाकिस्तान के बालाकोट में घुसकर जैश-ए-मोहम्मद की आतंकी ट्रेनिंग कैंप को ध्वस्त किया था।

वहीं, सुखोई 30 की बात करें तो इसकी लंबाई 72 फीट है। विंगस्पैन 48.3 फीट है, ऊंचाई 20.10 फीट है। इसका वजन 18,400 KG है। इसमें लीयुल्का एल-31एफपी आफ्टरबर्निंग टर्बोफैन इंजन लगे हैं, जो उसे 123 किलोन्यूटन की ताकत देता है।

इस इंजन और अपनी एयरोडायनेमिक बनावट की बदौलत फाइटर जेट 2120 किमी प्रतिघंटा की स्पीड से उड़ता है। इसकी रेंज भी 3000 किलोमीटर है। बीच रास्ते में ईंधन मिल जाए तो यह 8000 किलोमीटर तक जा सकता है। यह करीब 57 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हादसे पर ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने लिखा, मुरैना के कोलारस के पास वायुसेना के सुखोई-30 और मिराज-2000 विमानों के दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर अत्यंत दुखद है। मैंने स्थानीय प्रशासन को त्वरित बचाव एवं राहत कार्य में वायुसेना के सहयोग के निर्देश दिए हैं। विमानों के पायलट के सुरक्षित होने की ईश्वर से कामना करता हूं।

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