- हाईकोर्ट का ब्लैकलिस्ट की कैंट बोर्ड की कार्रवाई को सही ठहराते हुए गारंटी राशि रिलीज कराने से इनकार
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: टोल के चुनावी कनेक्शन के चलते कैंट के भाजपाइयों की आपस में ही आस्तीनें चढ़ गयी हैं। वहीं, दूसरी ओर हाईकोर्ट से ठेकेदार की जमानत राशि रिलीज करने से ना के बाद ठेके में तकनीकि दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा टोल ठेके में रेवेन्यू सेक्शन की झोलझाल यही तक सीमित नहीं।
ठेकेदार को रियायत के नाम पर रेवेन्यू सेक्शन की तमाम पटकथाएं जांच के दायरे में हैं। यदि निष्पक्ष जांच करा दी जाए तो तकनीकि तौर पर कई खामियां सामने आ सकती हैं। नवागत सीईओ कैंट नागेन्द्र नाथ से टोल ठेके की तकनीकि खामियों की जांच की उम्मीद तमाम संस्थाएं कर रही हैं।
कोर्ट कार्रवाई से खुली पोल
ब्लैकलिस्टेड कंपनी को ठेका देने की तैयारियों की रेवेन्यू सेक्शन की पोल भी ठेकेदार की वजह से ही कोर्ट में खुली। हुआ यूं कि मैसर्स गौरव ट्रेडर्स ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 8.30 लाख रुपये की जमानत राशि को रिलीज कराए जाने की प्रार्थना कोर्ट में थी। हाईकोर्ट ने ठेकेदार की याचिका पर सुनवाई के बाद मैसर्स गौरव को ब्लैकलिस्ट किए जाने की कैंट बोर्ड की पूर्व की कार्रवाई को सही ठहराते हुए जमानत राशि रिलीज कराए जाने से साफ इनकार कर दिया।
ठेके में अब फंसा पेंच
विधि विशेषज्ञों की राय में मैसर्स गौरव के कैंट बोर्ड में ब्लैकलिस्ट होने पर हाईकोर्ट की मुहर के बाद वैभव सिंह के नाम पर ठेका छोड़ जाने की सारी प्रक्रिया विवादित हो गयी है। हालांकि ठेका दिए जाने या कैंसिल किए जाने की कार्रवाई पर अंतिम होकर कैंट बोर्ड की बैठक में लगनी है, लेकिन विधि विशेषज्ञों की मानें तो तकनीकि रूप से मैसर्स गौरव से जुडे वैभव को भी ये ठेका स्वतंत्र रूप से भी नहीं दिया जा सकता।
रियायतों पर भी विवाद
लॉकडाउन के नाम पर टोल ठेकेदार को तीन बार दी गयी अलग-अलग रियायतों को लेकर भी कुछ संस्थाएं रेवेन्यू सेक्शन पर कैंट बोर्ड को गलत रिपोर्ट के आधार पर राजस्व की हानि पहुंचाने का मामला बनाकर जीओसी इन चीफ व डिफेंस सेक्रेटरी के यहां शिकायत कर चुके हैं। इस शिकायत का आधार हाईकोर्ट के उस आदेश को बनाया गया है।
जिसमें ठेके को लेकर चल रहे विवाद के दौरान यथास्थिति के आदेश जारी किए थे तथा लीगल एडवाइजर की रिपोर्ट जिसमें ठेके को लेकर किसी प्रकार के निर्णय को स्थगित रखने की बात कही गयी है को शिकायत में शामिल किया गया है। विधि विशेषज्ञों की राय में ठेकेदार को लॉकडाउन के नाम पर जो तीन बार बोर्ड ने रेवेन्यू सेक्शन की रिपोर्ट के आधार पर रियायतें दी हैं। तकनीकि रूप से वो रियायते हाईकोर्ट के स्टे के बाद संभव नहीं थीं।
वादा खिलाफी का जिम्मेदार कौन?
इस सारे फसाद की जड़ 30 मई को हुई बैठक में ठेकेदार का कैंट बोर्ड से किए गए वादे से मुकर जाना है। रेवेन्यू सेक्शन की जिस रिपोर्ट के आधार पर ठेकेदार को रियायत की स्क्रिप्ट तैयार की गयी तथा जिसके एवज में ठेकेदार ने कैंट बोर्ड के खिलाफ किसी भी प्रकार की कोर्ट की मार्फत कार्रवाई न करने का वादा किया और उसके बाद भी ठेकेदार कैंट बोर्ड के खिलाफ हाईकोर्ट व जिला कोर्ट में आर्बिटेÑशन में चले गए, उसका जिम्मेदार कौन है।

