Tuesday, April 7, 2026
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मेरठ में अफसरों की नजर में कोरोना घातक नहीं?

संक्रमित क्षेत्र नहीं हो रहे सील, संक्रमण बढ़ने की आशंका

सैनिटाइज को लेकर भी बरती जा रही लापरवाही लोगों में भारी दहशत

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: हॉट स्पॉट इलाकों को लेकर स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों की लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। अफसरों के रवैये से यही लगता है कि या तो अब कोरोना पहले जैसा घातक नहीं रह गया है या फिर लोगों को संक्रमित होने के लिए छोड़ दिया गया है।

जिन इलाकों में संक्रमित मरीज मिल रहे हैं, वहां न तो आसपास का इलाका सील किया जा रहा है और न ही सैनिटाइजेशन की ओर से कोई ध्यान दिया जा रहा है। पिछले एक माह की यदि बात की जाए तो तमाम ऐसे इलाके हैं जहां संक्रमित मिले हैं, लेकिन इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से वहां सैनिटाइजेशन को लेकर कोई गंभीरता नहीं बरती गयी।

कोरोना संक्रमण की यदि बात की जाए तो अप्रैल का पहला सप्ताह जरा याद कीजिए। जिस भी इलाके में एक भी संक्रमित मिलता था, वो इलाका पुलिस प्रशासन से लेकर स्वास्थ्य विभाग तक के रडार पर होता था।

संक्रमित मरीज के इलाके को सील कर दिया जाना। वहां पुलिस का पहरा बैठाया जाना। सप्ताह में दो बार पूरे इलाके को सैनिटाइज किया जाना। लोगों को भी लगता था कि उनके इलाके की सिस्टम को चिंता है।

उन्हें उनके हाल पर नहीं छोड़ा गया है। कोरोना संक्रमण के केस अब पहले से ज्यादा आ रहे हैं। पिछले एक सप्ताह की बात की जाए तो संक्रमण के तेजी से बढ़ रहा ग्राफ कोरोना के अधिक घातक व ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच होने की गवाही दे रहा है, लेकिन सिस्टम के अफसरों का जो रवैया है उसे देखकर तो लगता है कि उनकी नजरों में कोरोना अब पहले सरीखा घातक नहीं रह गया है।

न तो इलाके को सैनिटाइज कराने की जरूरत है और ही नहीं उसको सील किए जाने की जरूरत है। जिन इलाकों में संक्रमित मरीज निकलते हैं, वहां आवाजाही पर कोई रोक नहीं। हैरानी तो इस बात है कि क्वारंटाइन को लेकर भी पूरी लापरवाही बरती जा रही है।

कुछ मामलों में तो संक्रमित के परिजनों को क्वारंटाइन सेंटर तक नहीं ले जाया जा रहा है। केवल इतना भर कहा जाता है कि घर में ही रहें। इस बात का भी कोई ध्यान नहीं दिया जाता कि जिनके यहां संक्रमित मिला है। उनके यहां आवाजाही बंद है या नहीं।

संक्रमण के लिए अफसर कुसूरवार

मेरठ में कोरोना संक्रमण के तेजी से बढ़ते हुए मामलों ने शासन की नींद उड़ाई हुई है। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बार-बार स्वास्थ्य विभाग तथा मेरठ प्रशासन के अफसरों को संक्रमण को रोकने के लिए प्रभावी कदमों की हिदायत दे रहे हैं, लेकिन सीएम के कठोर रवैये के बाद भी अफसरों के स्तर पर सिर्फ मीटिंग व मेडिकल तक दौड़ से ज्याद कुछ नहीं किया जा रहा है। बड़ा सवाल तो यही कि संक्रमण कैसे रोका जाए। आईसीएमआर, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय व विश्व स्वास्थ्य संगठन सरीखे बड़े स्वास्थ्य प्रतिष्ठानों की ओर से कोरोना प्रोटोकॉल खासतौर से इन्फेक्शन प्रिवेंशन के लिए जो गाइड लाइन तय की गयी है। उनको लेकर कोई बात करता नजर नहीं आ रहा।

जरूरी प्रभावी उपायों को भूल बैठे अफसर

कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए जो प्रभावी उपाय पहले किए जाते थे, सिस्टम चलाने वाले अफसर व स्वास्थ्य उनको लेकर पूरी तरह से लापरवाह नजर आता है। माना जा रहा है कि इसी लापरवाही के चलते संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ रही हैं। अफसर भले ही कुछ भी दावें करें। राशन की दुकान, शराब का ठेका, सब्जी मंडी, रोडवेज बस स्टैंड या फिर किराना आदि की दुकान तथा भीड़ वाले अन्य इलाकों में एक नजर डालिए मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग की पोल खुल जाएगी।

संक्रमित इलाके सैनिटाइज नहीं किए जा रहे, जिसकी वजह से कई इलाके ऐसे हैं, जिनमें पूरे परिवार या फिर कई परिवारों में संक्रमण के केस निकल रहे हैं।

संक्रमित इलाकों को सील न किए जाने की वजह से वहां अन्य इलाकों के लोगों की लगातार आवाजाही रहती है। खासतौर से ऐसे इलाकों में फल, सब्जी, दूध व वहां रहने वालों के शहर के दूसरे स्थानों अथवा काम धंधे पर जाने की वजह से बहुत मुमकिन है कि कोरोना का वायरस भी एक इलाके से दूसरे इलाके आराम से पहुंच रहा हो।

ये कहना है विशेषज्ञों का

कोरोना संक्रमित इलाकों को सैनिटाइज व सील किया जाना बेहद जरूरी है। आईसीएमआर बार-बार सोशल डिस्टेंसिंग व मास्क पर जोर देता है, लेकिन शहर में उसको लेकर गंभीरता जो बरती जानी चाहिए, वह नजर नहीं आती। यह गलत है। संक्रमण उसके इलाके में ही रोका जाना बेहद जरूरी है।

-डा. अनिल नौसरान, सचिव इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, मेरठ

संक्रमण के केसों का बढ़ना एक गंभीर चिंता का विषय है। लोगों को खुद भी जागरूक होना होगा। ये समझ लिया जाना चाहिए कि मास्क और हाथों को बार-बार धोना बेहद जरूरी है। संक्रमण कहीं से भी लग सकता है। उसको आगे बढ़ने से रोकने के लिए दो गज की दूरी जरूरी है। लोगों को खुद भी जागरूक रहना चाहिए।

-डा. एसके गर्ग, मेडिकल कॉलेज प्राचार्य

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