- मासूम बच्चों के कत्ल से उबर नहीं पा रहे गली के लोग
- हर कोई फांसी की मांग कर रहा, बच्चे कह रहे मेरा दोस्त अच्छा था
- खैरनगर में मासूमों के हत्याकांड पर उलेमा सख्त
- बोले-कातिलों ने खुद खोला अपने लिए जहन्नुम का दरवाजा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: खैरनगर की गूलर वाली गली में अपने दो मासूम बच्चों मैराब और कोनेन की निर्मम हत्या के बाद पूरे मोहल्ले में अभी तक लोग घटना से उबर नहीं पाये हैं। हर घर और हर गली में बस डबल मर्डर की चर्चा चल रही है। हर कोई निशा बेग को डायन बताकर फांसी की मांग कर रहा है। गली के बाहर हत्यारों को फांसी दो के नारे वाला बैनर लगा दिया है। बच्चों के मुंह से बस एक ही बात निकल रही है कि मेरा प्यारा दोस्त मैराब मुझसे दूर चला गया।

खैरनगर की सेन वाली गली और गूलर वाली गली काफी चर्चाओं में चल रही है। गूलर वाली गली में रहने वाली निशा बेग ने अपने प्रे्रमी सऊद सैफी के साथ मिलकर अपने दोनों बच्चों की हत्या करवा कर शवों को गंग नहर में फेंक दिया था। पुलिस ने निशा समेत छह लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस ने गंग नहर से बेटा मेहराब का शव बरामद कर लिया था। जबकि बेटी कोनेन का शव अभी तक बरामद नहीं हुआ है।

गाजियाबाद से आए एनडीआरएफ की टीम दिन भर बच्ची को ढूंढती रही, लेकिन कामयाबी हाथ नहीं लगी। गूलर वाली गली निवासी सरबत चौधरी ने बताया कि निशा डायन से भी ज्यादा खतरनाक निकली और बच्चों को खा गई। जिस सऊद के जरिये उसने कत्ल कराया उसे वो अपना सगे भाई से ज्यादा मानती थी। यह कहते हुए सरबत की आंखों में आंसू आ गए थे। दानिश चौधरी ने बताया कि इस घटना ने पूरे मौहल्ले को बदनाम कर दिया।

अब तय कर लिया है कि जमानत के बाद जब ये लोग आएंगे तो उनको घुसने नहीं दिया जाएगा। समाज से बायकाट कर दिया जाएगा। दानिश ने बताया कि गली के बाहर बैनर लगाया जा रहा है जिसमें हत्यारों को फांसी देने की मांग की गई है। वहीं हत्यारोपी निशा के घर में ताला लगा हुआ था क्योंकि वो चार दिन से गंग नहर की खाक छान रहा है।
मेरे जीने का बहाना छिन गया
हत्यारोपी निशा का पति शाहिद गमगीन है। उसका कहना है कि सऊद ने धोखा दिया और इससे बड़ा धोखा निशा ने दिया है। 20 साल से अधिक समय तक साथ रही और अवैध संबंधों को जीती रही। शाहिद ने बताया कि बच्चों को मारने के बजाय मुझे तलाक दे देती।
‘रोजा’ कातिलों की सजा का ‘मरहम’ नहीं बन सकता
खैरनगर में प्रेम प्रसंग के चलते एक मां और उसके आशिक द्वारा दो मासूमों का बेरहमी से कत्ल किए जाने से जहां पूरी इंसानियत तार तार हो कर रह गई, वहीं इस हत्याकाण्ड पर शहर के उलेमा भी खासे खफा हैं। इस हत्याकाण्ड में बच्चों की हत्यारी मां निशा का साथ उसकी पड़ौसी कौसर और मुसर्रत ने भी दिया था।
यह तीनों महिलाएं फिलहाल पुलिस कस्टडी में हैं लेकिन रमजान के पवित्र महीने के चलते यह तीनों रोजे भी रख रही हैं। इस पर क्या इनकी यह इबादत अल्लाह के यहां काबिल-ए-कुबूल है या नहीं, इस पर हमने शहर के प्रमुख उलेमाओं से बात की।
निशां और अन्य आरोपियों ने जो अपराध किया है। उसकी सजा उन्हें दुनिया में भी मिलेगी और आखिरत (मरने के बाद की जिन्दगी) में भी। हां इतना जरूर है कि रमजान में जो वो रोजे रख रही हैं उसका सवाब (पुण्य) खुदा के फैसले पर निर्भर करता है। वो चाहे तो इस इबादत का आरोपियों को अज्र दे चाहे न दे, लेकिन यह तय है कि रोजा कातिलों की सजा का मरहम नहीं बन सकता। -प्रो. जैनुस साजेदीन (शहर काजी)

जो गुनाह इन आरोपिरयों ने किया है। खुदा की बारगाह में वो गुनाह-ए-कबीरा है। जहन्नुम के दरवाजे इन्होंने अपने लिए खुद ही खोले हैं। कातिल भले ही रोजे रख रहे हों लेकिन यह रोजे इन कातिलों की सजा को खत्म नहीं कर सकते। हांलाकि यह अल्लाह पाक के ऊपर है कि वो इनकी इबादत को कुबूल करता है या नहीं लेकिन जो अपराध इन्होंने किया है वो इस दुनिया की निजाम में नाकाबिल-ए-कुबूल है। -कारी शफीकुर्रहमान कासमी (अध्यक्ष, मिल्ली काउंसिल)
नेकी और बदी का बदला सिर्फ अल्लाह पाक के हाथ में है। गुनाह करना और इबादत करना, यह दोनों अलग पहलू हैं। इस्लाम चूंकि किसी भी बेगुनाह के कत्ल की इजाजत नहीं देता, लिहाजा इनका ठिकाना तो जहन्नुम ही है लेकिन आखिरत (मरने के बाद की जिन्दगी) के सभी फैसले सिर्फ और सिर्फ खुदा ही करेगा क्योंकि वो ही ‘मालिकी यौम इद्दीन’ अर्थात ‘डे आॅफ जजमेंट का मालिक है’। -मौलाना मशहूदुर्रहमान चतुर्वेदी (मोहतमिम, मदरसा इमदादुल इस्लाम)

