Friday, March 20, 2026
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सीएम के सर्वे में नगरायुक्त की खराब रैंकिंग

  • फरियादियों की शिकायत पर सुनवाई न करने के चलते खराब प्रदर्शन से तीसरे नंबर पर, छिन सकती है नगरायुक्त की कुर्सी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कबाड़ से सौंदर्यीकरण के नाम पर पीठ थपथपाने वाले नगरायुक्त मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर रहे हैं। मुख्यमंत्री के सर्वे में नगरायुक्त अमित पाल शर्मा फ्लाप रहे, जिसके चलते खराब प्रदर्शन करने वालों में मेरठ नगर निगम प्रदेश में तीसरे पायदान पर रहा, जिससे नगरायुक्त की खासी किरकिरी हो रही हैं। सीएम के सर्वे में ये तथ्य भी सामने आया है कि नगर निगम मेरठ पर फरियादियों की समस्याएं नहीं सुनी जा रही हैं, जिसके चलते नगरायुक्त की कुर्सी छीन सकती हैं।

नगर निगम में अधिकारी जनता की समस्याएं सुनने में दिलचस्पी नहीं लेते हैं, जिसके चलते जनशिकायतों का निस्तारण नहीं हो रहा हैं। ऐसे अफसरों से मुख्यमंत्री खास नाराज हो गए हैं तथा कभी भी इनकी कुर्सी जा सकती हैं। मुख्य सचिव ने भी नगरायुक्त से जवाब तलब किया हैं। कुर्सी से तो ये हटेंगे ही, साथ ही इनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी की जा सकती हैं।

दरअसल, सुशासन के मद्देनजर योगी सरकार ने विभिन्न विभागों से संबंधित शिकायतों-समस्याओं के निवारण के लिए राज्य में एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली (आईजीआरएस)और हेल्पलाइन की व्यवस्था कर रखी हैं। कोई भी व्यक्ति इनके माध्यम से अपनी शिकायत समस्या का समाधान हासिल कर सकता हैं। आईजीआरएस और हेल्पलाइन पर दर्ज कराई जाने वाली शिकायतों के निस्तारण पर मुख्यमंत्री कार्यालय सीधे नजर रखता हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार आगामी लोकसभा एवं निकाय चुनाव को लेकर गंभीर दिखाई पड़ रही है। जहां एक तरफ व्यक्तिगत तौर पर जो शिकायतें की जाती हैं,उनका निस्तारण किस तरह से किया जा रहा है,उस पर तो सरकार का फोकस है, लेकिन दूसरी तरफ प्रदेश सरकार के द्वारा राज्य में एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली, आईजीआरएस और हेल्पलाइन की व्यवस्था कर रखी है।

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ताकि कोई भी फरियादी अपनी शिकायत दर्ज कराकर समस्या का समाधान करा सके, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद भी आईजीआरएस व हेल्पलाइन नंबरों पर की गई शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई उस पर संज्ञान लेते हैं, जिसमें कौन बेहतर कर रहा है तो किसका खराब प्रदर्शन है? उसकी भी उनके कार्यालय में समीक्षा की जाती है, जिसके बाद रैंकिंग तय की जाती है कि जिस जनपद की समस्या के निस्तारण में क्या स्थिति है?

जिनका खराब प्रदर्शन हुआ, उन अफसरोें के प्रति नाराजगी जताते हुये कड़ी कार्रवाई की भी चेतावनी दी, जिसमें प्रदेश के प्रमुख सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने खराब प्रदर्शन करने वालों को पत्र लिखकर जवाब तलब किया है, जिसमें प्रदेश के पांच नगरायुक्तों का खराब प्रदर्शन रहा और उन पांच नगरायुक्तों में मेरठ के नगरायुक्त का तीसरा स्थान रहा,

जिसको जिसको लेकर चर्चा जोर पकड़ रही है कि फरियादियों की शिकायतों का निस्तारण नहीं करने वालों में शामिल मेरठ के नगरायुक्त पर भी कभी भी गाज गिर सकती है। नगर निगम में शिकायत लेकर पहुंचने वाले अधिकतर फरियादी अधिकारी के कार्यालय में नहीं मिलने के चलते बैरंग ही लौट जाते हैं। यदि कोई मंगलवार को आयोजित होने वाली जनसुनवाई में शिकायत दर्ज करा भी दे तो जिस शिकायत का आसानी से समाधान हो सकता है।

उनका भी समाधान नहीं कराया जा रहा हैं। नगर निगम में भी मुख्यमंत्री पोर्टल एवं जनसुनवाई में शिकायतों का निस्तारण नहीं किया जा रहा हैं। शिकायत के मामले में नगर निगम टॉप पर हैं। एक मकान मालिक ने एक कलर्क पर निगम रिकार्ड में दो पिता के नाम दर्ज होने का आरोप लगाया था। इसकी शिकायत भी मुख्यमंत्री पोर्टल पर हैं। 23 कर्मचारियों के मामले की शिकायत भी सीएम पोर्टल पर हैं, मगर इनका निस्तारण नहीं हुआ। ऐसी करीब 200 से ज्यादा शिकायत सीएम पोर्टल पर हैं, मगर निस्तारण किसी का भी नहीं किया।

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