Sunday, May 24, 2026
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निगम के अधिकारियों का कई मामलों में वर्जन सवालों के घेरे में

  • हाल ही में नगरायुक्त, अपर नगरायुक्त और अन्य अधिकारियों के वर्जन बने गले की फांस

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: नगर निगम में नगरायुक्त, अपर नगरायुक्त समेत तमाम कई ऐसे निगम के अधिकारी एवं कर्मचारी हैं। जिनके द्वारा किसी मामले में जो वर्जन दिया जाता है। वह वर्जन रिकार्ड में कुछ दिखाई देता है,और उनके द्वारा मौखिक रूप से जो वर्जन कुछ अलग हटकर होता है। इसी तरह के कई मामले हाल फिलहाल में देखने को सामने आये। जिसमें अधिकारी रिकार्ड से हटकर जो वर्जन देते हैं, उसमें जिस साक्ष्य को छिपाने का प्रयास करते हुये वर्जन दिया जाता है।

उससे उन्हे राहत तो कम मिलती है। जब रिकार्ड से वर्जन का मिलान किया जाता है तो वह कुछ अलग होता है। इस तरह के मामलों में निगम के अधिकारियों को राहत कम मिलती है,और इस तरह के मामलों की स्पष्ट जांच हो जाये तो कई की गर्दन फंस सकती है। हाल ही के कुछ वर्जन एवं रिकार्ड को देखा जाये तो सबकुछ साफ समझ आता है कि आखिर सच्चाई और मामले में झोल कहां है।

मामला-1

हाल ही में निगम में कार्यरत 4 लिपिकों का जो स्थनान्तण किया गया है वह आचार संहिता से पूर्व हुआ या फिर बाद में उसको लेकर नगर निगम में चर्चाओं का बाजार गर्म हैं। लिपिकों ने बताया कि उन्हे स्थानांतरण का पता 18 अप्रैल को उस समय चला जब उनके पास स्थानांतरण की काफी रिसीव कराई गई। उनका कहना है कि 6 अप्रैल को स्थानांतरण किया गया था तो भले ही हमारे द्वारा 18 अप्रैल में स्थानांतरण की कापी रिसीव की गई थी, लेकिन सवाल उठता है कि जिन अन्य अधिकारियों को आदेश की काफी भेजकर रिसीव कराई गइै हैं

उनके रिसीव कापी पर 18 अप्रैल को हस्ताक्षर किये गये हैं। यदि उनका स्थानांतरण 6 अप्रैल को हो गया था तो भले ही उन्होंने काफी रिसीव नहीं की, लेकिन आचार संहिता से पूर्व अन्य अधिकारियों के रिसीव कापी पर हस्ताक्षर होने चाहिए थे। जबकि अपर नगरायुक्त ममता मालवीय का कहना है छह अप्रैल को आचार संहिता से पूर्व नियमानुसार स्थानांतरण किया गया है। आदेश की कापी रिसीव होना एवं वर्जन दोनों अलग-अलग कहानी बयां कर रहे हैं।

मामला-2

23 कर्मचारियों की फर्जी नियुक्ति का का मामला निगम निगम के अधिकारियों की जांच से शुरू हुआ और वह शासन एवं सीबीसीआईडी तक जा पहुंचा। इस मामले में अधिकारियों के द्वारा हर बार कुछ अलग वर्जन दिया गया,जबकि निगम के रिकार्ड में कुछ और ही चलता रहा। जिसके चलते मामला सीबीसीआईडी तक जा पहुंचा, लेकिन निगम के अधिकारी का रिकार्ड से मेल खाता वर्जन स्पष्ट रूप से नहीं दिया गया। जिस तरह से आज लिपिक अपने स्थानांतरण पर आदेश की कापी के रिसीव कराने की दिनांक पर सवाल खड़ा कर रहे हैं।

ठीक उसी तरह से निगम के अधिकारियों के वर्जन एंव रिकार्ड में कुछ अलग होने के बारे में बताते हुये साक्ष्य भी बताये। निगम के तत्कालीन मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डा. प्रेम सिंह के द्वारा बताया गया है कि 23 कर्मचारियों की फर्जी नियुक्ति के मामले में निगम के अधिकारी जांच के नाम पर खानापूर्ति कर मामले को लटकाये हुये हैं। निगम की अपर नगरायुक्त ममता मालवीय के द्वारा जो जांच रिपोर्ट हाल ही में उच्चाधिकारियों के पास भेजी है उसका पत्रांक संख्या-5671 दिनांक 29 जून 2021 के द्वारा गठित के आधार पर जांच रिपोर्ट तैयार कर भेजना बताया।

जिसमें उनके द्वारा अपने स्तर से ही कर्मचारियों को कलीन चिट दे दी गई। जबकि सीबीसीआईडी के द्वारा जो जांच चलना बताया जा रहा था और भेजी गई जांच में सीबीसीआईडी का कोई जिक्र नहीं किया गया। जबकि तत्कालीन नगरायुक्त मनीष बंसल के पत्र संख्या-5777 दिनांक 27/09/21 द्वारा गठित की गई थी। जिसमें पुरानी जांच के वर्जन एवं वर्तमान जांच के वर्जन में भी अंतर स्पष्ट है।

इसी तरह के अनेको मामले हैं। जिसमें नौचंदी मेले में निर्माण के दौरान घटिया सामग्री हटवाने के वर्जन के बाद भी घटिया स्तर की र्इंटों से निर्माण जारी रहा हो या फिर अन्य मामले, जिसमें वर्जन एवं रिकार्ड में काफी अंतर दिखाई देता है। यदि मामले के वर्जन एवं रिकार्ड का मिलान किया जाये तो न जाने कितना गोलमाल निगम के रिकार्ड में मिलेगा।

साहब! मेरे रिटायरमेंट की तिथि बीत गई, मुझे जानकारी तक नहीं

सोशल मीडिया पर एक शिकायती पत्र वायरल हो रहा है। जिसमें एक व्यक्ति के नाम से नगरायुक्त को शिकायती पत्र दिया गया उसके द्वारा खुद को नगर निगम का स्थाई सफाई कर्मचारी होना बताया। साथ ही बताया कि उसकी सेवा पुस्तिका में जन्मतिथि के आधार पर उसका रिटायरमेंट गत 31 मार्च 2023 को हो जाना चाहिए था, लेकिन विभाग के संबंधित लिपिक द्वारा उसे उसके रिटायरमेंट के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। अब उसके रिटायरमेंट को महीना बीतने को है, तब जाकर उसे जानकारी दी जा रही है।

जिसमें शिकायतकर्ता ने बताया कि यह सब संबंधित विभाग के लिपिक की गलती के कारण हुआ है। जिसके चलते जो उसे अपने रिटायरमेंट के दौरान रिकार्ड जमा करना था और उसे जो पैसा मिलना था। वह उसे समय पर नहीं मिल सका। जिसमें उक्त स्थाई सफाई कर्मचारी ने नगरायुक्त को जो शिकायती पत्र भेजा है। उसमें लिपिक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का जो पत्र पर नाम लिखा है। उसमें श्यामलाल पुत्र ननका सूरजकुंड जोन मेरठ वार्ड-58 लिखा है। उसके द्वारा जो पत्र दिया गया है।

उस पर निगम की रिसीव की छाया प्रति पर मुहर भी लगी है। इस संबंध में नगर निगम के संबंधित विभाग के लिपिक प्रदीप से बात की गई तो उन्होंने इस नाम के व्यक्ति के बारे में किसी भी जानकारी के होने से इनकार कर दिया। साथ ही बताया कि नगर निगम में करीब 400 से अधिक कर्मचारी हैं। सबके बारे में जानकारी नहीं रखी जा सकती। गुरुवार को नगर निगम में रिकॉर्ड देखने के बाद ही कुछ बताया जा सकता है। शिकायती पत्र पर उक्त श्यामलाल पुत्र ननका नाम पता तो लिखा है,

लेकिन मोबाइल नंबर नहीं लिखा होने के कारण उससे संपर्क नहीं हो सका। हालांकि निगम के ही कुछ सफाई कर्मचारी इस शिकायती पत्र को सही होने की पुष्टि भी कर रहे हैं। फिलहाल रिटायरमेंट का समय निकला, कर्मचारी को पता तक नहीं चला यह मामला चर्चा का विषय बना है। इस संबंध में प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी एवं पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डा. हरपाल सिंह के मोबाइल पर संपर्क किया गया तो उनकी कॉल रिसीव नहीं हो सकी।

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