- भ्रष्टाचार पर प्रहार: पॉलीथिन बिछाई, सीएम साहब! निगम ने खोजा कूड़ा निस्तारण का एक और नायाब तरीका
- परीक्षितगढ़ रोड पर गांवड़ी स्थित वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट की कूड़ा निस्तारण की पोल खुली तो मचा हड़कंप, बढ़ा निगम का बीपी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: सीएम साहब! निगम ने खोजा कूड़ा निस्तारण का नायाब तरीका नामक शीर्षक से जो समाचार 24 अप्रैल के अंक में जनवाणी ने प्रकाशित किया, उसके बाद निगम का बीपी बढ़ गया है। उसने जांच की आंच से बचने को फिर से एक और नायाब तरीका खोज निकाला है। अब उन गड्ढों से जेसीबी के द्वारा कूडा निकलवाकर खानापूर्ति को पॉलीथिन बिछाई जा रही है।
बुधवार को दिनभर दो जेसीबी इस कार्य में जुटी रही। निगम के द्वारा परीक्षितगढ़ रोड पर गांवड़ी स्थित वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट कूड़ा निस्तारण की समस्या के समाधान को एक जनवरी 2017 को स्थापना की गई थी, उसका सूरत-ए-हाल जानने को जनवाणी संवाददाता 23 अप्रैल को वहां पहुंचे। जैसे ही जेलचुंगी से परीक्षितगढ़ मार्ग की तरफ को चलते तो बीच रास्ते में जगह-जगह निगम के द्वारा कूड़ा निस्तारण कराया जाना देखा गया।

जिसमें बडेÞ-बड़े कूड़े के ढेर उनमें उठ रही बदबू मानों मार्ग से होकर गुजरने वाले राहगीरों का नगर निगम की तरफ से स्वागत कर रही हो। उसके बाद जैसे ही वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट के अंदर पहुंचे तो वहां का नजारा देखने वाला था। स्थानीय लोगों को यही कहते सुना कि आला अफसरों को कूड़ा निस्तारण प्लांट से कुछ प्रेरणा लेनी चाहिए कि निगम के द्वारा कूड़ा निस्तारण का नायाब तरीका जो खोजा है,
उसमें जेसीबी से गड्ढे खोदकर कूड़ा निस्तारण किस तरह से कराया जा रहा है। खबर छपी तो निगम में हड़कंप मच गया और निगम का बीपी बढ़ गया। जिसमें किसी भी जांच की आंच से बचने के लिये अब गड्ढों में जो सूखा-गीला कूड़ा एक साथ डाला गया था। अब उस उन गड्ढों से कूड़ा निकालकर खानापूर्ति को पॉलीथिन बिछाई जा रही है।

निगम के द्वारा कुछ हलचल वहां पर की गई या फिर पुराने तरीके से ही कूड़ा निस्तारण का कार्य जारी है। जैसे ही परीक्षितगढ़ रोड से होते हुये गांवड़ी स्थित वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट की तरफ का चले तो वहां पर निगम के ट्रैक्टर-ट्रॉली द्वारा कूड़ा डाला जा रहा था। इस दौरान जैसे ही कैमरे की फ्लैश पड़ी तो वह खाली ट्रॉली लेकर भाग खड़ा हुआ। वहीं उसके बाद प्लांट के अंदर जाकर देखा तो वहां पर दो जेसीबी मिट्टी खोदकर दबाये गये कूडेÞ को हटाया जा रहा था

और जांच की आंच से बचने को श्रमिकों द्वारा खानापूर्ति की पॉलीथिन बिछवाई जा रही थी, जिसमें एक साइड में पॉलीथिन बिछाकर मामले में लीपा-पोती की जा रही थी। वहीं, श्रमिकों से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि जब कूड़ा डाला गया, तब उन्हे पॉलीथिन बिछाने को नहीं कहा गया। जिस तरह से पॉलीथिन बिछवाई जा रही है। वह कूडेÞ से डलते-डलते फट रही है। उसका क्या फायदा या नुकसान यह तो निगम के अधिकारी जाने उन्हे तो जो बताया गया वह कर रहे हैं।
वहीं, पास में एक सेफ्टी टेंक के लिये गड्ढा खुदा था और उसमें एक ड्रम रखा था। उसके बारे में पूछा तो बताया गया कि जो कूडेÞ के नीचे से पानी बहकर निकलेगा वह इस टेंक में आकर गिरेगा। वहीं, कुछ श्रमिक आपस में बात कर रहे थे कि जिस तरह से मिट्टी में कूड़ा दबाया गया है, वह पक्का निर्माण के बाद इस तरह से दबाया जाना था, ताकि कूडेÞ का निस्तारण अच्छे से हो सके, लेकिन उन्हे जैसा बताया गया वह तो ऐसा ही कर रहे हैं।

श्रमिकों ने वहां पर देखरेख करने वाले गोविंद नाम के सुपरवाइजर से बात कराई तो उन्होंने बताया कि पॉलीथिन कूडेÞ के नीचे जमीनी सतह से पूरी तरह से कवर्ड होगी, ताकि कूडेÞ को पूरी तरह से ढका जा सके, श्रमिक एक साइड में बिछा रहे हैं तो गलत है। जिसके बाद जेसीबी से दोबारा कूड़ा हटवाना शुरू कर फिर से दूसरी तरफ पॉलीथिन बिछाने का कार्य शुरू किया गया। फिलहाल किसी भी जांच की आंच से बचने को नगर निगम हर रोज नायाब तरीका खोज रही है और भ्रष्टाचार के तमाम मुद्दों पर फिलहाल स्पष्ट वर्जन देने से अधिकारी बचते नजर आ रहे हैं।

