- अतिक्रमण हटाओ अभियान में भी कर दी जाती है, इन अवैध निर्माणों की अनदेखी
- नालों पर बने अवैध निर्माण का आखिर कैसे हुआ नक्शा पास
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: साहब! क्रांतिधरा पर घंटाघर के निकट जलभराव एवं बहुमंजिला कॉम्प्लेक्स में बेसमेंट निर्माण को डाकघर के क्षतिग्रस्त होने का कारण माना जा रहा है। डाकघर को तो छोड़िये कई अन्य जगहों पर भी नाले चोक होने एवं टंकी की पाइप लाइन के लीकेज होने के कारण भवनों को खतरा पैदा हो रहा है। ईव्ज चौराहा के पास बना बहुमंजिला भवन हरी लक्ष्मी लोक बना हुआ है।
उसके निकट भी टंकी की पाइप लाइन फटने की समस्या कई बार बन चुकी है। जिसमें सुधांशु महराज के साथ कई पत्र अधिकारियों को लिख चुके एंव धरना प्रदर्शन तक कर चुके हैं। जिसमें नगरायुक्त के द्वारा स्थलीय निरीक्षण कर समस्या का समाधान कराने का आश्वासन दिया गया, लेकिन वहां पर हालात जस के तस है।

घंटाघर के निकट मुख्य डाकघर के भवन की दीवार ही नहीं, बल्कि आधे से अधिक भवन में दरार आने के कारण मामला हाईप्रोफाइल हुआ तो बुधवार को उसके ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई है। डाकघर में दरार आने का मुख्य कारण नाला चोक होने व टंकी की पाइप लाइन फटने एवं पास में ही एक बहुमंजिला कॉम्प्लेक्स में बेसमेंट निर्माण को माना जा रहा है।
नाला निर्माण के दौरान कुछ हिस्से में नाले के चोक होने के कारण दूषित पानी की निकासी न होने के कारण भी डाकघर के आसपास जलभराव की समस्या होना बताया गया। आखिरकार डाकघर के भवन की दीवार में दरार एवं भवन के क्षतिग्रस्त होने का मामला नाले से जुड़ा हुआ है। वहीं, दूसरी ओर ईव्ज चौराहा के निकट हरी लक्ष्मी लोक की बहुमंजिला बिल्डिंग बनी है।

उसके निकट सीवर चौक होने एवं पानी की टंकी की पाइप लाइन में लिके के कारण अक्सर आये दिन सड़क पर जलभराव की समस्या बन जाती है। उधर, सुधांशु महाराज द्वारा अनेकों बार मुद्दा उठाया गया और उसके लिये धरना प्रदर्शन किया गया। नगरायुक्त समेत तमाम आलाधिकारियों ने समस्या के समाधान का आश्वासन दिया, लेकिन अभी तक समाधान नहीं हो सका।
ज्यादातर जगहों पर नालों पर नालों पर अस्थाई रूप से अतिक्रमण कर लिया जाता है, लेकिन कुछ जगहों पर नालों की भूमि पर पक्के निर्माण तक हो गये हैं। जब भी कभी नगर निगम अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाती है तो निगम केवल रिकॉर्ड का कारम पूरा करने के लिये जिन जगहों पर अस्थाई रूप से झुग्गी झोपड़ी या सामान रखकर अतिक्रमण किया जाता है। वहां से अतिक्रमण हटवाकर अभियान को सफलतापूर्वक संपन्न होना रिकॉर्ड में दर्शा देती है,
लेकिन जिन जगहों पर पक्के निर्माण हैं। उन जगहों पर या तो टीम अवैध निर्माण को हटाने जाती ही नहीं या फिर सेटिंग कर मामले को रफादफा कर देती है। जिस कारण भविष्य में चलकर इस तरह की छोटी-छोटी लापरवाही नगर निगम के गले का फांस बन जाती है। जैसे की आज मुख्य डाकघर के भवन को लेकर बनी हुई है। महानगर में यदि सर्वे किया जाये तो न जाने कितनी जगहों पर नालों पर पक्के निर्माण हो चुके हैं।
सड़क व मकान के बीच में नाला किस जगह है। पता तक नहीं चलता मकान के अंदर से जमीन में नाला होकर गुजरता है तो उसकी सिल्ट कैसे निकलेगी यह तो समझा जा सकता है। नाले से सिल्ट नहीं निकलना ही सड़क पर जलभराव का मुख्य कारण बन जाता है। छतरी वाले पीर से घंटाघर होते हुये करोड़ों रुपये की लागत से निर्माण कराया जा रहा है,

लेकिन घंटाघर के निकट जो अवैध निर्माण नाले पर बना है, उस हिस्से का नया निर्माण नहीं कराया जा रहा, वहीं नाले की साफ सफाई भी सही तरह से नहीं हो पाती। जिसके चलते भविष्य में घंटाघर की प्राचीन धरोहर को भी खतरा न पैदा हो कहा नहीं जा सकता। नगर निगम से चंद कदम की दूरी पर नाले पर अवैध निर्माण दिखाई देता है, लेकिन निगम इस तरफ से मौन बनी हुई है।
घंटाघर के निकट नाले पर जो निर्माण है देखा है। इस संबंध में किसी के द्वारा लिखित में शिकायत नहीं की गई। जिस कारण अभी तक मामले में संज्ञान नहीं लिया गया। यदि कोई शिकायत मिलती है तो जांच कर मामले में कार्रवाई कराई जायेगी। -डा. पुष्पराज गौतम, मुख्य अतिक्रमण अधिकारी, नगर निगम मेरठ।

