Wednesday, April 22, 2026
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रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल खतरनाक

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ALI KHANआज यह सर्वविदित है कि रासायनिक कीटनाशकों का कृषि क्षेत्र में उपयोग मानव जाति के साथ-साथ धरा की सेहत के लिए बेहद जोखिम भरा है। यह खेतों में काम कर रहे किसानों और मजदूरों के लिए भी बेहद जानलेवा साबित हो रहा है। इसी संबंध में नेचर जियोसाइंस में छपा शोध बताता है कि पूरी दुनिया में कृषि भूमि के 64 फीसदी हिस्से पर कीटनाशकों का कुप्रभाव पड़ रहा है, जिससे मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ जैव विविधता पर संकट का बढ़ना तय है। जानकार बताते हैं कि यह हालात भारत जैसे देश के लिए खासतौर पर चिंता का विषय है, जहां कीटनाशकों को नियंत्रित करने के लिए कोई प्रभावी कानून नहीं है। बता दें कि इस रिसर्च में शोधकतार्ओं ने 168 देशों में 90 से अधिक कीटनाशकों के प्रभाव का अध्ययन किया और पाया कि दुनिया की करीब दो-तिहाई कृषि भूमि यानी 245 लाख वर्ग किलोमीटर पर कीटनाशकों के कुप्रभाव दिख रहे हैं।

इसमें से लगभग 30 फीसदी भूमि पर यह खतरे कहीं अधिक गहरे हैं। शोध में रूस और यूक्रेन जैसे देशों में कीटनाशकों के प्रभाव को लेकर चेतावनी दी गई है, तो भारत और चीन भी उन देशों में हैं जहां जहरीले छिड़काव का खतरा सर्वाधिक है।

दरअसल, कीटनाशक रासायनिक या जैविक पदार्थों का ऐसा मिश्रण होता है, जो कीड़े मकोड़ों से होने वाले दुष्प्रभावों को कम करने, उन्हें मारने या उनसे बचाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह कहा जा सकता है कि कीटनाशक कीट की क्षति को रोकने, नष्ट करने, दूर भगाने अथवा कम करने वाला पदार्थ अथवा पदार्थों का मिश्रण होता है।

रसायनिक कीटनाशक के अधिक प्रयोग का मुख्य कारण यह है कि कीटों के अधिक प्रकोप होने पर रासायनिक कीटनाशक से नियंत्रण करना आसान हो जाता है। लिहाजा, मौजूदा वक्त में रासायनिक कीटनाशक के बिना कृषि की कल्पना करना मुश्किल मालूम पड़ता है। लेकिन इसका अन्य विकल्प तलाशने की आवश्यकता है।

जैसा कि कीटनाशक जहर के अधिक प्रयोग से प्रदूषण, मित्र कीटों का नुकसान, शारीरिक स्वास्थ्य का जोखिम बना रहता है। रासायनिक कीटनाशकों के अंधाधुंध व असंतुलित प्रयोग से पर्यावरणीय असंतुलन व प्रदूषण की समस्या उत्पन्न होने के साथ ही खेतों में पाये जाने वाले मित्र कीट भी अनजाने में मारे जाते हैं। मित्र कीट फसल की शत्रु कीटों से रक्षा करते हैं।

बताते चलें कि कीटनाशक हवा और मिट्टी को प्रदूषित करने के साथ नदी, पोखर और तालाबों जैसे जलस्रोतों और भूजल को भी प्रदूषित कर रहे हैं। रासायनिक कीटनाशक फसलों के जरूरी मित्र कीड़ों को मार कर उपज को हानि पहुंचाते हैं और तितलियों, पतंगों और मक्खियों को मारकर परागण की संभावना घटा देते हैं जिससे जैव विविधता को हानि होती है। कीटनाशक के ज्यादा इस्तेमाल से भूमि की उर्वरा शक्ति कम हो रही है। इंसानों के साथ-साथ पशु-पक्षियों और पर्यावरण को खासा नुकसान पहुंच रहा है।

अध्ययन बताते हैं कि कीटनाशक हमारी सेहत के लिए भी बेहद जोखिमभरा साबित हो रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, कीटनाशक मानव शरीर में लीवर, किडनी, फेफड़ों और आंतों के लिए बेहद खतरनाक हैं। फसलों में उपयोग से खाने के माध्यम से शरीर में आने पर धड़कन कम होना, आंतों में दुष्प्रभाव, याददाश्त कम होना इमीजिएट प्रभाव सामने आते हैं, जबकि लगातार उपयोग से कैंसर जैसी घातक बीमारी हो सकती है।

जहरीला पदार्थ नालों, नदियों या जल निकायों में बहकर जल प्रदूषण का कारण बनता है। विभिन्न शोधों में यह संकेत दिया गया है कि उर्वरकों का अप्रासंगिक उपयोग, कीटनाशकों और नाइट्रोजनयुक्त उर्वरकों से नाइट्रेट के निक्षालन के माध्यम से जल को प्रदूषित करता है।

इससे जलीय जंतुओं की मृत्यु भी हो सकती है। गौरतलब है कि अब तक, चीन पृथ्वी पर किसी भी अन्य देश की तुलना में अधिक कीटनाशकों का उपयोग करता है। चीन हर साल लगभग 1,806 मिलियन किलोग्राम कीटनाशकों का उपयोग करता है। जो वाकई धरती की सेहत के लिए बेहद जोखिम भरा है।

वहीं भारत अमेरिका, जापान और चीन के बाद दुनिया में कीटनाशकों का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक है। साल 2014 -15 और 2018-19 के बीच भारत में कीटनाशकों का उत्पादन 30 हजार टन बढ़ गया। गौरतलब है कि भारत में कुछ बेहद हानिकारक कीटनाशकों को कृषि में इस्तेमाल करने की भी अनुमति है, जिन्हें दूसरे कई देशों में प्रतिबंधित किया गया है।

यह बेहद चिंताजनक तथ्य है कि देश के आठ राज्य कुल कीटनाशकों का 70 फीसदी इस्तेमाल करते हैं। एक साल में देश में 72 हजार टन से अधिक रासायनिक कीटनाशकों के इस्तेमाल का आंकड़ा उपलब्ध है। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और पंजाब कीटनाशकों को इस्तेमाल करने में सबसे आगे हैं।

बता दें कि करीब 57 फीसदी कीटनाशक सिर्फ दो फसलों कपास और धान में इस्तेमाल किए जाते हैं। ऐसे में कपास और धान की उपज को बढ़ाने के लिए कीटनाशकों की जगह अन्य विकल्प तलाशने की आवश्यकता है। बड़ा सवाल की आखिर कीटनाशकों के बेतहाशा बढ़ते उपयोग को कैसे कम किया जा सकेगा?

उल्लेखनीय है कि जैविक खेती इस दिशा में प्रभावी और टिकाऊ समाधान साबित हो सकता है। साथ ही, कीटनाशकों के बढ़ते दुष्प्रभावों को देखते हुए, आज प्राकृतिक कीटनाशकों का इस्तेमाल करने की आवश्यकता है। जिससे कि मानव जाति के साथ-साथ पर्यावरण को महफूज रखा जा सकेगा।


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