चीन में इतिहास रचकर मातृभूमि पर लौटी अन्नू रानी, पारुल चौधरी और किरण बालियान का क्रांतिधरा पर भव्य स्वागत किया गया। ढोल-नगाड़ों की थाप पर लोग झूम उठे। तीनों खिलाड़ियों का ये स्वागत कार्यक्रम इतिहास के पन्नों दर्ज हो गया। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के लंबे काफिले के बीच तीनों खिलाड़ियों को लोगों ने पलकों पर बिठा लिया। तीनों महिला खिलाड़ियों का स्वागत अभूतपूर्व रहा। पुष्प वर्षा से लेकर आतिशबाजी तक लोगों ने खिलाड़ियों के स्वागत में की। अन्नु कुमारी कंकरखेड़ा पहुंची तो यहां चांदी का मुकुट पहनाकर उनका इस्तकबाल हुआ। कंकरखेड़ा से बहादरपुर, दबथुवा तक कई स्थानों पर उनके स्वागत में लोग सुबह से ही खड़े थे। इसी तरह से पारुल चौधरी के स्वागत के लिए ग्रामीणों की भीड़ ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के काफिले के साथ सिवाया टोल प्लाजा पर सुबह से ही पहुंच गई थी। यहां ढोल-नगाड़ों की थाप के आगे ग्रामीण नृत्य कर झूम रहे थे। ये नजारा देखते ही बन रहा था। हर कोई इस दृश्य को देखने के लिए उत्सुक था। दोपहर दो बजे पारुल चौधरी यहां गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंची, जहां उन्हें ओपन गाड़ी में बैठाया गया तथा फुल मालाओं से यहां ग्रामीणों ने उन्हें लाद दिया। चीन में तिरंगा लहरा कर लौटी अन्नू रानी, पारुल चौधरी और किरण बालियान के स्वागत में पलक-पांवड़े बिछा दिये थे। हांगझोउ में जारी एशियन गेम्स 2023 के 10वें दिन भारत की पारुल चौधरी और अन्नू रानी ने इतिहास रचते हुए चीन में स्वर्ण पदक जीत कर तिरंगा लहरा दिया था। पारुल ने 5,000 मीटर रेस में गोल्ड मेडल जीता है, वहीं अन्नू रानी ने महिलाओं की भाला फेंक स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता है।
भव्य स्वागत देख नम हुर्इं पारुल की आंखें
पारुल के स्वागत में राजनीतिक दलों के लोगों का उमड़ा हुजूम
जनवाणी संवाददाता |
मोदीपुरम: इकलौता गांव की पारुल चौधरी में रजत एवं गोल्ड मेडल जीतकर जहां देश का नाम रोशन किया। वहीं, पारुल चौधरी के स्वागत करने वालों की शनिवार को भारी भीड़ दिखाई दी। टोल प्लाजा से लेकर पारुल के गांव तक जगह-जगह फूलों की वर्षा के साथ हुए स्वागत को देख पारुल की आंखें नम हो गई।

सड़कों पर स्वागत करने के लिए ग्रामीणों की भीड़ का तांता लगा रहा। पारुल चौधरी का कहना था कि उन्हें ये मालूम नहीं था कि उनके स्वागत में ग्रामीणों की भीड़ जुट जाएगी। पारुल के स्वागत में जहां ग्रामीणों की भीड़ थी। वहीं, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता एवं सत्ताधारी पार्टी के जनप्रतिनिधि भी उसके स्वागत समारोह में शामिल हुए। इकलौता गांव का पारुल के नाम से जाना जा रहा है।

पारुल का कहना है कि अब उसका अगला कदम ओलंपिक में मेडल लाकर इतिहास रचना है और अपने देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन करना है। परिवार के लोगों ने उनकी हर संभव मदद की आज उसकी बदौलत उन्होंने अपना और अपने परिवार के साथ-साथ गांव का भी नाम रोशन कर दिया।
गोल्डन गर्ल का आतिशबाजी के साथ किया जोरदार स्वागत
मेरठ की क्रांतिकारी धरती के गांव इकलौता से एशिया गेम्स में रजत पदक और गोल्ड मेडल जीतने के बाद पहली बार गांव पहुंची पारुल चौधरी का ग्रामीणों ने जोरदार स्वागत किया। टोल प्लाजा से लेकर गांव तक जगह-जगह आतिशबाजी और ढोल नगाड़ों के साथ पुष्प वर्षा की गई। सिवाया टोल प्लाजा पर पहुंची पारुल चौधरी का केंद्रीय राज्यमंत्री डा. संजीव बालियान, भाजपा जिलाध्यक्ष शिवकुमार राणा, भाजपा नेता मनिंदरपाल सिंह, पूर्व श्रम कल्याण परिषद अध्यक्ष पंडित सुनील भराला ने बुके देकर स्वागत किया

और इसके बाद काफिले के साथ गांव पहुंचे और जोरदार स्वागत किया। गांव पहुंचने पर पारुल चौधरी की मां ने तिलक किया। मां को देखते ही पारुल चौधरी ने मेडल निकालकर मां के गले में डाल दिया और गले लगा लिया। इसके बाद एक के बाद एक माला से पारुल चौधरी का गला ऊपर तक भर गया।

