- फ्रांस, स्विट्जरलैंड व यूएई के वैज्ञानिक करेंगे सहयोग
- आईयूसीएन की बैठक में कल बूढ़ी गंगा पर होगी विस्तृत चर्चा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: हस्तिनापुर में बूढ़ी गंगा के दिन शायद अब बहुर जाएंगे। बूढ़ी गंगा पर भारत के साथ तीन देशों ने मिलकर काम करने की इच्छा जताई है। इन तीनों देशों के वैज्ञानिक बूढ़ी गंगा पर नेचुरल साइंसेज ट्रस्ट को अपना पूरा सहयोग प्रदान करेंगे। रविवार को बूढ़ी गंगा पर विस्तृत चर्चा होगी।
दरअसल, इन दिनों जेनेवा (स्विट्जरलैंड) में आईयूसीएन की बैठक चल रही है जिसमें विभिन्न देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। भारत से प्रो. प्रियंक भारती चिकारा (नेचुरल साइंसेज ट्रस्ट) भी इस बैठक में वर्चुअली भाग ले रहे हैं। प्रो. प्रियंक भारती ने बैठक के दौरान विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के बीच हस्तिनापुर की बूढ़ी गंगा का मुद्दा उठाया। इस पर प्रियंक भारती ने पूरी प्रजेंटेशन दी।

बैठक में भाग ले रहे विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने हस्तिनापुर की बूढ़ी गंगा के उद्धार को लेकर उत्सुकता दिखाई। बैठक के दौरान ही फ्रांस, स्विट्जरलैंड व यूएई के प्रतिनिधियों ने घोषणा की कि वो हस्तिनापुर की बूढ़ी गंगा के उद्धार के लिए अपना योगदान देंगे। प्रो. प्रियंक भारती ने बताया कि तीनों देशों के वैज्ञानिक बूढ़ी गंगा के लिए अपना पूरा सहयोग प्रदान करेंगे।
शोभित विवि के प्रो. प्रियंक ने बताया कि यूएई की प्रोफेसर ने तो अपने कोलैबोरेशन के लिए वॉइस नोट भी जारी कर दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि बूढ़ी गंगा अब विभिन्न देशों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है, क्योंकि यह नदी महाभारतकाल की एकमात्र साक्षी है। जेनेवा में चल रही बैठक में भाग ले रहे विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के अनुसार दूसरे देशों में जब भी हस्तिनापुर का नाम आता है तब वहां महाभारत की बात अवश्य होती है। प्रियंक भारती ने इसे एक उपलब्धि बताया।
विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने देखी ‘बूढ़ी गंगा’
जेनेवा (स्विट्जरलैंड) में चल रही आईयूसीएन की बैठक के तीसरे दिन उस समय भारत के लिए गौरान्वित करने वाले क्षण बन गए जब कई देशों के प्रतिनिधियों ने हस्तिनापुर की बूढ़ी गंगा को देखने की इच्छा व्यक्त की। इसके बाद नेचुरल साइंसेज ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रो. प्रियंक भारती ने इसकी व्यवस्था की और बैठक में शामिल विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों को आॅन लाइन बूढ़ी गंगा के दर्शन कराए। प्रियंक भारती के अनुसार 14 अक्टूबर को आईयूसीएन की बैठक के दौरान बूढ़ी गंगा पर विस्तृत चर्चा होगी।

