- नगर निगम की भी लगाई थी हाईकोर्ट ने क्लास
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: इलाहाबाद हाईकोर्ट की फटकार के बाद कूडेÞ के पहाड़ नहीं हटाए जा रहे हैं। इसको लेकर नगरायुक्त ने भी विभागीय अफसरों को कूड़े के पहाड़ हटाने के निर्देश दिये हैं,मगर फिलहाल कूड़े के पहाड़ ज्यो के त्यो बने हुए हैं। ये मामला है मंगतपुरम व लोहिया नगर का।
बता दें, एक जनहित याचिका की सुनवाई के बाद मेरठ डीएम को कूड़े का पहाड़ तीन महीने में हटाने के आदेश दिए थे। यह याचिका विनय गुप्ता ने हाईकोर्ट में दायर की थी, जिस पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की बेंच में याचिका को निस्तारित करते हुए डीएम को यह आदेश दिया गया है।
याचिका में आबादी के बीच मंगतपुरम और लोहियानगर में कूड़े के पहाड़ से जनहित को खतरा बताते हुए कार्रवाई की गुहार लगाई गई थी। हाईकोर्ट ने इसे गंभीर मामला बताते हुए डीएम को तीन महीने में निस्तारित कराने का आदेश दिया है। साथ ही याचिका को निस्तारित कर दिया है। मेरठ में लोहियानगर और मंगतपुरम को लेकर कई बार सवाल उठते रहे हैं। एनजीटी और ईपीसीए की ओर से भी इस मामले में सवाल उठाए गए हैं।
हाईकोर्ट की फटकार के बाद भी नगर निगम ने लगे कूड़े के पहाड़ हटाने की प्रक्रिया अभी तक आरंभ ही नहीं की है, जिससे लोगों को यहां बेहद दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। मंगतपुरम व लोहिया नगर में जिस तरह से कूड़े के पहाड़ लगे हैं, उनसे लोगों को दिक्कत हो रही है।
यहां का वायमंडल प्रदूषित हो रहा है, जिसके लिए नगर निगम की जवाबदेही बनती है, मगर नगर निगम के अधिकारी इसमें फिलहाल पहल नहीं कर पा रहे हैं। कूड़ा लोगों की मुसीबत बन गया है। नगरायुक्त भी एक बार इसको लेकर मीटिंग कर चुके हैं, मगर सबकुछ कागजी चल रहा है। धरातल पर कूड़े के पहाड़ हटाने की प्रक्रिया ठंडे बस्ते में डाल दी गई है।

जला दिया जाता है कूड़ा
महीनों से पड़ा कूड़ा अब मिट्टी के ढेर में तब्दील हो चुका है। वहीं, सफाई कर्मी भी इसमें आग लगा देते हैं। इससे आसपास के इलाके और पास ही स्थित स्कूल में प्रदूषित धुएं का गुबार छा जाता है। मंगलपुरम और लोहियानगर स्थित डंपिंग ग्राउंड की तरह ही यहां के हालात बेहद खराब हो चुके हैं।
कूड़े में लगाई जा रही आग, सांस लेना हुआ मुश्किल, पालिका कर्मचारी डालते हैं भूमि पर कूड़ा
सरधना तहसील रोड पर खाली पड़ी भूमि पर पालिका ने कूड़ाघर बना दिया है। इतना ही नहीं कूड़े में आग लगाकर लोगों का सांस लेना मुश्किल कर दिया है। एक ओर सरकार प्रदूषण रोकने के लिए पत्ती फूंकने वाले किसानों पर मुकदमे कर रही है। वहीं, दूसरी ओर कूड़े में आग लगाने वाले सरकारी सिस्टम को कोई कुछ कहने वाला नहीं है। रविवार को भी कूड़े से उठते धुएं ने लोगों का सांस लेना मुश्किल कर दिया। सबसे अधिक परेशानी बीमार व वृद्धों को उठानी पड़ रही है।
तहसील रोड पर खाली पड़ी पालिका की भूमि को रोडवेज बस अड्डे के लिए निर्धारित किया गया था। बस अड्डा तो नहीं बना। मगर लोगों जिंदगी नारकीय जरूर बन गई। क्योंकि पालिका ने इस भूमि को कूड़ाघर बनाकर रख दिया है। नगर पालिका के सफाई कर्मचारी कस्बे से कूड़ा जमा करके यहां डाल देते हैं। जिससे भूमि पर कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। इस कूड़े को नष्ट करने के लिए जलाया जाता है।
कूड़े से निकलने वाला धुआं लोगों के लिए श्राप बना हुआ है। आसपास बस्ती में धुआं ही धुआं रहता है। ऐसे में लोगों का सांस लेना तक मुश्किल हो गया है। सबसे अधिक परेशानी बीमारों व वृद्धों को उठानी पड़ती है। वैसे तो प्रदूषण रोकने के लिए शासन द्वारा खेतों में पत्ती जलाने वाले किसानों पर भी कार्रवाई की जा रही है।
मगर इतने बड़े स्तर पर किए जा रहे प्रदूषण से अधिकारियों को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। इस नरक से निजात पाने के लिए बस्ती के लोग कई बार हंगामा कर चुके हैं। मगर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। लोगों ने पालिका से मनमानी बंद करने की मांग की है।

