Friday, May 1, 2026
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भूमाफियाओं ने बेच डाली निगम की जमीन

  • अब्दुल्लापुर की तर्ज अन्य जगह भी गरजेगी जेसीबी
  • जांच को जहां भी नगरायुक्त पहुंचे वहीं मिले अवैध कब्जे
  • लेखपाल को कारण बताओ नोटिस, गंदगी मिलने पर लगाई फटकार

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: पूर्ववर्ती कुछ अफसरों से सांठगांठ कर नगर निगम के स्टाफ ने करोड़ों रुपये कीमत की जमीन महानगर के अलग-अलग इलाकों में मौजूद हैं, भूमाफियाओं के उन मोटा लेन-देन कर कब्जे करा दिए। इसका खुलासा हो गया है। यह खुलासा तब हुआ जब आज खुद नगरायुक्त खुद महानगर में निरीक्षण को निकले थे।

दरअसल नगरायुक्त ने अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार के साथ मौके पर जाकर नगर निगम की जमीनों की स्थल पर उपलब्धता की सत्यतता की जांच की। सर्वप्रथम नगर आयुक्त ने बाइपास रोड स्थित ईरा गार्डन कालोनी का निरीक्षण किया गया। जहां पर जांचोपरान्त निगम की 6000 वर्ग मीटर जमीन पायी गयी। इसी प्रकार बाइपास रोड स्थित ऋषि नगर कालोनी का अवलोकन करने पर यहां पर तीन तरफ रास्ते से जुड़ी 7220 वर्ग मीटर भूमि चिन्हित हुई।

उसके बाद दांतल क्षेत्र का निरीक्षण करने पर तालाब की जमीन पर काफी अधिक संख्या में मकान बने पाये गये। इसी प्रकार खड़ौली में स्थित नगर निगम तीन जमीनों पर भी काफी संख्या में अवैध रूप से बने मकान पाये गये। इस पर नगर आयुक्त ने संबंधित लेखपाल राजकुमार द्वारा अपने कार्य के प्रति लापरवाही को देखते हुए कारण बताओं नोटिस जारी करने के साथ ही उन्हे आवंटित क्षेत्र की समस्त जमीनों का चिन्हिकरण करके वस्तुस्थिति की रिपोर्ट तैयार करने व नजरी-नक्शा तैयार कर तीन दिन के अंदर प्रस्तुत करने के लिए कड़े निर्देश जारी किए।

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इसके अतिरिक्त नगर आयुक्त ने वार्ड-32 व वार्ड-8 तथा दिल्ली रोड बाइपास का भी सफाई व्यवस्था का निरीक्षण किया गया। वार्ड-32 में कैलाश डेरी के पास कूड़ा पाये जाने संबंधित मुख्य सफाई एवं खाद्य निरीक्षक ब्रह्मपाल सिंह को कड़े निर्देश देने के साथ ही बैजल भवन से आयुक्त आवास चौराहे तक की सड़क के दोनों ओर की सफाई व्यवस्था कराने के लिए निर्देश दिये।

राजकुमार के पेट में छिपा निगम की खुर्द जमीनों का राज

नगरायुक्त ने जिस लेखपाल राजकुमार को फटकार लगाते हुए उससे स्पष्टीकरण तलब किया है, नगर निगम के स्टाफ का कहना है कि सरकारी जमीनों को खुर्दबुर्द करने के जितने भी अब तक मामले हैं, उन सबका राज लेखपाल राजकुमार के सीने में दफन है। यदि अफसर सख्ती करें तो वर्तमान के ही नहीं दशकों पुराने मामले में भी बेपर्दा हो जाएंगे। करोड़ों नहीं अरबों रुपये की जमीन पर भूमाफियाओं के कर्जे का राजफाश हो सकता है। निगम के एक सूत्र ने नाम न छापे जाने की शर्त पर बताया कि उक्त लेखपाल अरसे से इस सारे खेल से जुड़ा रहा है।

रेलवे के नोटिस बोर्ड को किसानों ने उखाड़ा, टकराव के हालात

मेरठ: रेलवे ने जो बोर्ड लगाकर रास्ता बंद कर दिया था, उसे किसानों ने शुक्रवार को उखाड़ दिया। किसानों और रेलवे के बीच टकराव के हालात बनते दिख रहे हैं। किसानों में इस बात को लेकर आक्रोश था कि उनके रास्ते को बोर्ड लगाकर बंद क्यों किया गया। इसको लेकर आक्रोशित किसान शुक्रवार को मौके पर पहुंचे तथा लगाये गए बोर्ड को उखाड़कर फेंक दिया। दरअसल, किसानों के सामने रास्ते की समस्या पैदा हो गई थी, जिसके चलते रास्ते पर लगाये गये बोर्ड को उखाड़ा गया।

भारतीय किसान यूनियन के नेता महबूब अली शौलाना व मंडल महासचिव मोनू ढिढाला किसानों को लेकर मौके पर पहुंचे। किसानों की भीड़ ने कहा कि किसानों के रास्ते को बंद करना आसान नहीं होग। ये रास्ता मोहिउद्दीनपुर, भूड़बराल से होकर बहादरपुर, सैदपुर आदि गावों को होकर गुजरता है। किसानों का ये लिंक रोड हैं। इससे ज्यादा आवागमन हैं। रेलवे के आधिकारियों ने इस रास्ते को बंद कर दिया था।

 

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भारतीय किसान यूनियन के नेता महबूब अली शौलाना व मंडल महासचिव मोनू ढिढाला ने रेलवे के अधिकारियों से मांग की है कि जब तक वहा वैकल्पिक रास्ते का प्रबंध करने की व्यवस्था कराई जाए। किसानों के रास्ते को बंद करने से बड़ी समस्या खड़ी हो गई थी। इस समस्या का समाधान किया जाएगा। लोगों को किसी तरह की समस्या नहीं होनी चाहिए। रिंकू विकल, अरुण प्रधान भूड़बराल, गजेंद्र मास्टर, आर्यन आदि क्षेत्रीय किसान बोर्ड उखाड़ने के दौरान मौजूद रहे।

जोनल प्लान पर फाइनल मुहर लगाने को हुई मीटिंग

मेरठ: मोहिउद्दीनपुर से लेकर दौराला तक जोनल प्लान फाइनल किया जा रहा हैं। रैपिड रेल के दोनों किनारों के लिए जोनल प्लान तैयार किया जा रहा हैं। इसका सर्वे भी पूरा हो चुका हैं। इसको लेकर मेडा में शुक्रवार को मैराथन मीटिंग चली, जिसमें कई मुद्दों को लेकर चर्चा हुई। क्योंकि रैपिड रेल के अधिकारी जो तय करेंगे, वहीं निर्माण रैपिड के किनारों पर होगा। क्या-क्या निर्माण रैपिड के किनारे पर किया जा सकता हैं, इसके लिए ही जोनल प्लान तैयार किया जा रहा हैं। इसको लेकर मीटिंग का पूरा फोकस रहा।

दरअसल, जोनल प्लान तैयार करने के लिए ली एसोसियेट्स को जिम्मेदारी दी गई हैं। इसी कंपनी ने सर्वे पूरा कर लिया हैं। कहां ग्रीन वर्ज होग? कहां पर ग्रीन वर्ज नहीं होगा? किस स्थान पर कौन सा निर्माण किया जा सकता हैं या फिर नहीं? उसका पूरा जोनल प्लान तैयार किया जा रहा हैं। इसको लेकर फाइनल मुहर लगाने के लिए मीटिंग शुक्रवर को मेडा के सभागार में चली। मीटिंग में मेडा उपाध्यक्ष अभिषेक पांडेय, टीपी विजय कुमार, एनसीआरटीसी के अधिकारी, एसोसियेट्स के अधिकारी मौजूद रहे। मोहिउद्दीपुर से दौराला तक जोनल प्लान जो तैयार किया हैं,

उसको लेकर एक-एक बिन्दू पर समीक्षा की गई। कादराबाद पुलिस चौकी से जोनल प्लान तैयार किया गया हैं, जो दौराला कस्बे तक रखा हैं। विस्तार मास्टर प्लान को शासन से स्वीकृति मिल गई हैं। प्राधिकरण के स्तर से भी मास्टर प्लान को स्वीकृति देते हुए एक तरह से लागू कर दिया गया हैं। अब इसमें सरधना और मवाना, हस्तिनापुर को भी शामिल किया गया हैं, वहां भी मास्टर प्लान के अनुसार विकास कार्य किये जाएंगे। सरधना और मवाना कस्बे में भी विकास की संभावनाएं बन गई हैं।

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