Saturday, May 16, 2026
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भ्रष्टाचार के बीच निशाने पर व्हिसिल ब्लोअर्स

Nazariya 22


TANVIR ZAFARIहमारे देश में भ्रष्टाचार मिटाने, भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने जैसे दावे तो लगभग सभी सरकारों द्वारा बड़े ही जोर शोर से किए जाते रहे हैं। परंतु हकीकत शायद इससे कुछ अलग ही है। दिन प्रतिदिन भ्रष्टाचार बड़े पैमाने पर फलफूल रहा है। भ्रष्टाचार में संलिप्त लोग सत्ता के संरक्षण में स्वयं को सुरक्षित कर रहे हैं। देश के लाखों करोड़ रुपए लेकर तमाम ठग व भगौड़े विदेशों में पनाह ले चुके हैं। ऐसे भ्रष्टाचारियों की पोल खोलने व उन्हें बेनकाब करने वाले व्हिसिल ब्लोअर्स की सुरक्षा भी एक बड़ी चिंता का विषय बानी हुई है। हमारे देश में व्हिसिल ब्लोअर्स की हत्या से लेकर उनपर हमलों व मुकदमों जैसी अनेक घटनाएं हो चुकी हैं। व्हिसल ब्लोअर को ‘व्हिसलब् लोअर्स संरक्षण अधिनियम, 2014’ द्वारा संरक्षित भी किया जाता है। कानून में उनकी पहचान की सुरक्षा के साथ-साथ उनके उत्पीड़न को रोकने के लिये कठोर मानदंडों को भी शामिल किया गया है। परंतु पिछले दिनों जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मालिक मालिक जैसे वरिष्ठ नेता के करीब 30 ठिकानों पर सीबीआई द्वारा की गई छापेमारी के बाद एक बार यह सवाल फिर उठने लगा है कि सरकार आखिर किसके साथ है? भ्रष्टाचारियों या रिश्वतखोरों के साथ या व्हिसलब्लोअर्स के साथ? सत्यपाल मलिक ने कहा कि उनके घर पर सीबीआई ने जो छापा मारा है वो ‘नहीं होना चाहिए था’ क्योंकि जिस किरू हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट के सिलसिले में उनके घर पर छापा डाला गया है उसमें वो असल में व्हिसल ब्लोअर और शिकायतकर्ता थे। मैंने जिन गुनहगारों के नाम लिए थे उनके खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय सीबीआई ने व्हिसलब्लोअर के खिलाफ ही कार्रवाई करने का फैसला किया। मलिक ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार अपने आलोचकों को चुप कराना चाहती है। विपक्षी दल भी पूर्व राज्यपाल के ठिकानों पर की गयी सी बी आई छापेमारी को असंतोष की आवाजों को दबाने वाला कदम बता रहे हैं। इसे भारतीय किसानों के गुस्से से ध्यान भटकाने की कोशिश भी बताया जा रहा है। तो क्या जिसे मदर आॅफ डेमोक्रेसी बताया जा रहा है, उस देश की वास्तविक हकीकत ही यही है कि यहां भ्रष्टाचारियों व आर्थिक व व्यवसायिक अनियमितता बरतने वालों को नहीं बल्कि आरटीआई एक्टिविस्ट या व्हिसलब्लोअर्स अथवा भ्रष्टाचार पर उंगली उठाने वालों को ही परेशानी उठानी पड़ सकती है?

पूर्व राजयपाल सत्यपाल मलिक द्वारा गत वर्ष अप्रैल-मई महीने में कई प्रमुख पत्रकारों,टी वी चैनल्स व यू ट्यूब मीडिया चैनल्स को साक्षात्कार दिये गए थे जिसमें मलिक ने पुलवामा हमले को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्हीं साक्षात्कारों में सत्यपाल मालिक यह भी कह चुके हैं कि कश्मीर का राज्यपाल रहते उनके पास दो फाइलें आई थीं। एक प्रोजेक्ट से आरएसएस के एक बड़े व्यक्ति जुड़े थे और एक प्रोजेक्ट से उद्योगपति मुकेश अंबानी। वे आरएसएस के उस बड़े व्यक्ति का नाम (राम माधव) भी ले चुके हैं। परंतु छापेमारी न तो अंबानी के किसी परिसर में हुई न ही राम माधव के किसी ठिकाने पर? इसी तरह याद कीजिये दो वर्ष पूर्व अयोध्या में कथित जमीन घोटाले को लेकर आप सांसद संजय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रÞेंस कर कई दस्तावेजी सुबूत पेश करते हुए विश्व हिन्दू परिषद् नेता चम्पत राय पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाये थे। परंतु आज, सांसद संजय सिंह तो किसी दूसरे मामले में जेल में हैं जबकि चम्पत राय राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के मुख्य मेजबान रहे हैं। यहां तक कि 22 जनवरी को अयोध्या के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पहला निमंत्रण देने का भी सौभाग्य उन्हीं को हासिल है?

राहुल गांधी अडानी के व्यवसाय सम्बंधित अनेक अनियमितताओं पर मुखरित होकर बोलने वाले देश के इकलौते साहसी नेता हैं। परंतु उन की न केवल सांसदी छीनने की कोशिश की जा चुकी, बल्कि और भी अनेक मुकदमों में उन्हें उलझाकर उनकी बुलंद आवाज को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। हैरत की बात तो यह है कि असम के जिस मुख्यमंत्री हिमंत विस्वा सरमा के द्वारा राहुल गांधी को उलझने की कोशिश हो रही है वह भाजपा में आने से पूर्व स्वयं भाजपा द्वारा सबसे भ्रष्ट बताये जाने वाले नेताओं में प्रमुख थे। इसी तरह अजित पवार एनसीपी में रहने तक महाभ्रष्ट थे, परंतु अब भाजपा के सहयोगी व महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री बनने के बाद शायद उनसे बड़ा ईमानदार ही कोई नहीं?

अडानी व सत्ता के विरुद्ध संसद में जमकर बोलने वाली तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा की लोकसभा सदस्यता तो जा ही चुकी अभी उन पर और भी शिकंजा कसने की तैयारी हो रही है। ठीक इसी तरह सत्यपाल मलिक के जम्मू कश्मीर के राज्यपाल रहते उनके कार्यालय द्वारा रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड को जम्मू-कश्मीर में सरकारी कर्मचारी व स्वास्थ्य देखभाल बीमा योजना का ठेका देने और एक निजी फर्म को किरू हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट के सिविल कार्यों के संबंध में ठेका देने में अनियमितता के आरोप लगाए गए थे। इन मामलों में वित्त विभाग, बिजली विकास विभाग और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से रिपोर्ट मांगी गई थी। इन रिपोर्टों पर विचार करने के बाद इन मामलों को जांच के लिए सीबीआई को भेजने व सीबीआई से इन मामलों की जांच करने का अनुरोध किया गया था। परंतु न अंबानी से कोई पूछताछ न ही बिचौलिये व दलाली करने वालों से कोई सवाल? सवाल बलवती हो रहा है कि आखिर भारत में बढ़ते भ्रष्टाचार के मध्य निशाने पर व्हिसिल ब्लोअर्स ही क्यों हैं, भ्रष्टाचारी क्यों नहीं?


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