- उनकी निगाहें से कुछ भी नहीं हो सकती चूक
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: मुख्यमंत्री आॅफिस प्रदेश के सभी विकास प्राधिकरणों पर सीधे निगरानी रखेगा। प्रॉपर्टी कितनी हैं? कितनी प्रॉपर्टी खाली पड़ी हैं? किस प्राधिकरण के पास कितना लैड बैंक हैं? आवंटित प्रॉपर्टी कितनी हैं? इस तरह से हर जगह मुख्यमंत्री आॅफिस की निगाहें होगी। उनकी निगाहें से कुछ भी चूक नहीं हो सकती। दरअसल, प्रदेश सरकार ने विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद पर शिकंजा कसने के लिए डैशबोर्ड से इंटीग्रेटेड करने के आदेश दिये गए हैं। इसके लिए सभी प्राधिकरण उपाध्यक्षों को प्रमख योजनाओं को सीएम डैशबोर्ड से जोड़ने का आदेश दिये गया हैं।
मुख्यमंत्री कार्यालय तमाम विभागों को सीएम डैशबोर्ड से इंटीग्रेटेड करने के प्रयास में लगा है। इन्हें कीप परफॉमेंर्स इंडिकेटर प्रोजेक्ट के रूप में सीएम डैशबोर्ड पर इंटीग्रेटेड किया जा रहा है। इसके लिए प्रदेश के सभी विकास प्राधिकरणों तथा आवास विकास को आदेशित किया गया है। सभी को भी सीएम डैशबोर्ड से इंटीग्रेटेड करने के लिए कहा गया है। इसके जुड़ने से प्रदेश के प्राधिकरणों की स्थिति सीएम कार्यालय को हमेशा पता चलती रहेगी। सीएम डैशबोर्ड से प्रदेश के विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद सभी जुड़ेंगे।
इससे सीएम कार्यालय की इन प्राधिकरणों की योजनाओं पर सीधी नजर रहेगी। नक्शे पास करने से लेकर प्राधिकरण की आय और संपत्तियों की खरीद फरोख्त की जानकारी भी रहेगी। क्योंकि संपत्तियों को लेकर प्राधिकरणों में बड़ा घालमेल होता रहा हैं, इसको दृष्टिगत रखते हुए भी ये निर्णय लिया गया हैं। इसमें लैंड बैंक बढ़ाने स्वीकृत नक्शों का विवरण भी होगा। गैर आवासीय प्लॉट जिनके नक्शे स्वीकृत है उसका भी विवरण रहेगा। आवासीय प्लॉट न बिकने वाले प्लॉट मकानों की संख्या कितने बिके कितने रिक्त हैं? ये भी सीएम डैशबोर्ड पर होगा।
आवास विकास परिषद और प्राधिकरण के पास रिक्त अनियोजित जमीन, नियोजित जमीन का विवरण रहेगा। सीएम डैशबोर्ड पर तथ्य गलत या भ्रामक नहीं होगा। कोई भी सूचना गलत हुई तो जिम्मेदार अफसरों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। सात मार्च को इस संबंध में शासन के अनुसचिव अरुण कुमार ने प्रदेश के सभी विकास प्राधिकरणों और उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद को पत्र जारी कर आदेशित किया है। प्रदेश सरकार ने वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लिए कुछ विभागों को कीप परफॉमेंर्स इंडिकेटर को प्रोजेक्ट के रूप में सीएम डैशबोर्ड पर लाया जा रहा है।
इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत करने के साथ पता चलेगा कि कौन से प्राधिकरण अच्छा काम कर रहे हैं और कौन नहीं? कहां लोगों के नक्शे पास हो रहे हैं और कहां नहीं? किस प्राधिकरण के पास कितनी जमीन है और किसका लैंड बैंक खाली है। कौन लैंड बैंक बढ़ा रहे हैं और कौन नहीं? इन सबकी जानकारी सीओ आॅफिस को रहेगी।

