Friday, March 27, 2026
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महानगर में खूब साइकिल चली, ठाकुर बाहुल्य गांवों में बूथ पड़े रहे सूने

  • रेलवे रोड स्थित वर्धमान अकादमी में बनाए गए पिंक बूथ नंबर 44 को बहुत ही आकर्षक ढंग से सजाया गया

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: जनवाणी टीम रोहटा रोड स्थित गॉडविन पब्लिक स्कूल में बनाए गए मतदान केंद्र पर पहुंची। जहां 1:40 बजे तक बूथ 178 में उस समय तक 41 प्रतिशत मतदान हो चुका था। इस बूथ पर 1272 मतदाताओं में 522 अपने मताधिकार का प्रयोग कर चुके थे। बूथ 179 पर 1225 में 473, बूथ 180 पर 1191 में 461 यानी 38.7 प्रतिशत वोट डाले जा चुके थे। रेलवे रोड स्थित वर्धमान अकादमी में बनाए गए पिंक बूथ नंबर 44 को बहुत ही आकर्षक ढंग से सजाया गया। जहां लगभग 2:00 बजे तक 955 में से 350 वोट डाले जा चुके थे।

इसी केंद्र पर बनाए गए बूथ 45 पर 1050 में 437 वोट डल चुके थे। घंटाघर चौराहे पर स्थित डीएन कॉलेज में 2:15 बजे तक बूथ नंबर 37 पर 1144 में 439, बूथ 40 पर 773 में 325 वोट डाले गए। वहीं बूथ नंबर 39 पर 903 में 475 यानि 50 प्रतिशत से अधिक मतदान हो चुका था। बूथ नंबर 38 में 993 में 395 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर चुके थे। इसी मतदान केंद्र में बने बूथ नंबर 33 में 779 में 301, बूथ नंबर 34 में 1126 में 338, बूथ 35 पर 1170 में 492 वोट डाले जा चुके थे।

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2:50 बजे तक कैलाश प्रकाश स्टेडियम में बनाए गए बूथ नंबर 352 में 823 में से 301, बूथ 353 पर 955 में 294, बूथ 354 पर 839 में 328, बूथ 355 में 768 में 270 और बूथ 356 पर 980 में 374 वोट डाले जा चुके थे। इन बूथों में अधिकांश के मतदाताओं ने अपने रुझान में बताया कि मेरठ-हापुड़ सीट पर भाजपा और सपा प्रत्याशियों के बीच सीधी फाइट रही है। गैर दलित हिन्दू बाहुल्य इलाकों में मतदाताओं की पहली पसंद कमल का फूल रहा। वहीं दलित और मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में साइकिल को खूब वोट मिली।

मेरठ में ऐसी रही बूथों की व्यवस्था

मेरठ लोकसभा क्षेत्र की चारों विधानसभाओं में बनाए गए 1645 बूथों पर इतनी ही पोलिंग पार्टियों ने चार-चार सदस्यीय टीम के साथ मतदान का कार्य कराया। किठौर विधानसभा क्षेत्र में 176 मतदान केंद्र पर 395 बूथ बनाए गए। मेरठ कैंट में 144 मतदान केंद्रों पर 439 बूथ, मेरठ शहर में 129 मतदान केंद्रों पर 323 बूथ, मेरठ साउथ में 166 मतदान केन्द्रों पर 488 बूथों पर मतदान किया गया। जबकि बागपत लोकसभा क्षेत्र में आने वाली सिवालखास विधानसभा के 182 मतदान केन्द्रों पर बनाए गए 371 बूथों पर भारी सुरक्षा के बीच मतदान कराया गया। सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए किठौर विधानसभा तीन जोन और 39 सेक्टर, मेरठ शहर विधानसभा चार जोन और 32 सेक्टर, मेरठ दक्षिण विधानसभा पांच जोन और 51 सेक्टर, मेरठ कैंट विधानसभा चार जोन और 41 सेक्टर में बांटा गया।

वहीं बागपत के अंतर्गत आने वाली सिवाल खास विधानसभा तीन जोन और 41 सेक्टर में विभक्त किया गया। यह भी उल्लेखनीय है कि मेरठ-हापुड़ सीट की चारों विधानसभाओं में 348 बूथों को क्रिटिकल-सेमी क्रिटिकल श्रेणी में रखा गया। इनमें किठौर के 117, मेरठ कैंट के 51, मेरठ शहर के 78 और मेरठ साउथ के 102 बूथ शामिल रहे। जबकि बागपत लोस क्षेत्र में आने वाली सिवाल खास के 75 बूथों को क्रिटिकल-सेमी क्रिटिकल श्रेणी में रखा गया। जनपद की पांचों विधानसभा क्षेत्र में शांतिपूर्ण मतदान कराने और निगरानी रखने के लिए 1024 बूथों पर वेब कैमरे लगाए गए। इसके अलावा ड्रोन से भी निगरानी रखते हुए वीडियोग्राफी भी कराई गई।

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भाजपा के गढ़ में वोटों में हुआ बिखराव

सरूरपुर: सिवालखास विधानसभा में भाजपा की जीत का गढ़ माने जाने वाले सरूरपुर ब्लॉक के ठाकुर बाहुल्य गांवों में भाजपा के बहिष्कार का असर साफ तौर पर दिखाई दिया। सुबह से लेकर शाम तक ठाकुर बाहुल्य गांव गोटका, डाहर मुल्हेडा, बपारसी में बूथ सूने पड़े रहे और ठाकुर समाज के लोगों ने मतदान करने में खास दिलचस्पी नहीं दिखाई। कई गांव में मतदान प्रतिशत 40 तक भी नहीं पहुंच पाया कई गांव में 30% पर ही मतदान सिमट गया। कुल मिलाकर ठाकुर बाहुल्य समाज के लोगों ने भाजपा के विरोध का सिलसिला जारी रखते हुए अपने मत का प्रयोग ही नहीं किया।

30 से 40 फीसदी तक हुए मतदान में भी ठाकुर समाज के लोगों की वोटो में पहली बार बिखराव देखने को मिला, जो भाजपा के सहयोगी दल रालोद के लिए खतरे की घंटी है। सिवालखास विधानसभा में यह गांव भाजपा के गढ़ और जीत के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस बार भाजपा के विरोध मुखर के चलते ठाकुर बाहुल्य समाज के गांव में सुबह से लेकर शाम तक भूत सूने पड़ रहे और लोगों ने वोट डालने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई कुछ प्रतिशत मतदान हुआ भी, लेकिन उसमें भी ठाकुर समाज के लोगों की वोटो में बिखराव देखने को साफ तौर पर मिला।

इसे लेकर रालोद प्रत्याशी की जहां धड़कनें बढ़ी हुई है, वहीं सिवाल खास विधानसभा में जीत का गढ़ माने जाने वाले भाजपा के इन गांव में पार्टी को खासा नुकसान देखने को मिल रहा है। ठाकुर बाहुल्य इन गांव में भाजपा कार्यकर्ताओं व आम वोटर ने भी कोई खास रुचि नहीं दिखाई और मतदान प्रतिशत बेहद कम रहा। भाजपा के नेताओं की अपील का साफ असर दिखाई देने को मिला। जिसे लेकर भाजपा के सहयोगी दल रालोद के प्रत्याशी की ठाकुरों की चुप्पी से धड़कन बढ़ गई है।

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