Friday, May 15, 2026
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ईवीएम की ड्यूटी पर जाम छलकाने वाले 12 कर्मचारी सस्पेंड

  • नगर पंचायत के ईओ ने की कार्रवाई, बौखलाए कर्मचारी

जनवाणी संवाददाता |

फलावदा: लोकसभा के द्वितीय चरण में ईवीएम ड्यूटी में तैनात किए गए नगर पंचायत के कर्मचारियों ने शराब पीकर हंगामा खड़ा कर दिया। कर्मचारियों के बीच जमकर मारपीट हुई। फजीहत होने पर ईओ ने दर्जन भर कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई से बौखलाए कर्मचारी बहाली के जुगाड़ सॉफ्ट कॉर्नर ढूंढते घूम रहे हैं।

लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण की वोटिंग के लिए एडीएम (प्रशासन)के निर्देश पर स्थानीय नगर पंचायत से दर्जन भर कर्मचारियों को निर्वाचन क्षेत्र 49 मेरठ दक्षिण के चुनाव में ड्यूटी पर लगाया गया था। नगर पंचायत फलावदा के दर्जनभर कर्मचारियों को साकेत मेरठ स्थित आईटीआई से सेक्टर मजिस्ट्रेट को रिजर्व मशीन उपलब्ध कराने तथा मतदान के पश्चात अवशेष मशीनों को स्ट्रांग रूम में जमा कराने के लिए तैनात किया गया था। बताया गया है कि तैनात दर्जन भर कर्मचारियों में कई ने ड्यूटी की परवाह न करते हुए जमकर जाम छलकाए।

उन्होंने नशे में धुत होकर फसाद खड़ा कर दिया। इतना ही नहीं आपस में मारपीट भी की गई। बताया यह भी गया है कि मामला अफसरों तक पहुंचा तो ईओ ने ड्यूटी पर लगाए गए सभी 12 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया। कार्रवाई के बाद कर्मचारी अपनी बहाली का जुगाड़ ढूंढते के लिए सॉफ्ट कॉर्नर तलाश रहे हैं। कर्मचारियों ने पंचायत अध्यक्ष के समक्ष उपस्थित होकर मामला निपटने की गुहार लगाई है। यह मामला नगर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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केंद्र से कर्मचारी लौटे बैरंग, नहीं हुआ मेडिकल

स्थानीय नगर पंचायत की ईओ सचिन कुमार द्वारा स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी को पत्र लिखकर स्थाई कर्मी मोनू, संविदाकर्मी विनोद, देवदत्त, पप्पू राकेश के अलावा आउटसोर्सिंग कर्मचारी सागर, अंकित कुमार, राजा, जयकरण, राहुल, राजू, आशु आदि को मेडिकल परीक्षण कराने के लिए कस्बे के सरकारी अस्पताल भेजा, लेकिन यहां सुविधा न होने के कारण अस्पताल से सभी कर्मचारियों को बैरंग लौटा दिया गया। अस्पताल के स्टाफ द्वारा मेडिकल करने में असमर्थता जताई गई। तत्पश्चात किसी भी कर्मचारी का मेडिकल परीक्षण नहीं हो सका है।

डीएम ने घटना से पूरी तरह अनभिज्ञता जताई

ईवीएम जमा कराने की जगह सरकारी कर्मचारियों के जाम छलकाने तथा आपस में मारपीट की घटना पर जिलाधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी दीपक मीणा ने पूरी तरह से अनभिज्ञता जताई है। डीएम का साफ कहना है कि उनके संज्ञान में न तो यह मामला आया है और न ही उन्होंने किसी कर्मचारी या अधिकारी को चुनाव ड्यूटी में लापरवाही बरतने के मामले में निलंबित किया है और न ही कोई कार्रवाई की है।

बीमारी का बहाना बनाकर ली छुट्टी और प्रचार में जुटे

मेरठ: जब सरकारी कर्मचारियों का किसी पार्टी विशेष से मोह हो जायेगा तो फिर उसे चौबीसो घंटे सोते-उठते और बैठते सिर्फ राजनीतिक पार्टी ही नजर आयेगी। कुछ ऐसा ही हाल नगर निगम के सरकारी कर्मचारियों का रहा। जब चुनाव ड्यूटी निभाने की बारी आई तो यह कर्मचारी बीमारी का बहाना बनाकर ड्यूटी से नाम कटवाकर सीधे राजनीतिक पार्टी के प्रचार-प्रसार में जुट गये। विरोधी भी कहां चुप बैठने वालों में थे। उन्होंने भी इन सरकारी कर्मचारियों की बाकायदा वीडियो बनाकर अधिकारियों के दरबार तक पहुंचा दी है। अब इन कर्मचारियों पर निलंबन की तलवार लटक गई है।

परमानेंट करवा लीं निगम में अपनी कुर्सी

नगर निगम के कर्मचारियों ने अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के प्रति आस्था बना रखी है। कुछ कर्मचारी पूर्व विधायक योगेश वर्मा के आस्थावान बताये जाते हैं। जब उनकी पत्नी सुनीता वर्मा महापौर बनीं। तब इन कर्मचारियों की आस्था और योगेश वर्मा के प्रति बढ़ गई। इस आस्था में बड़ी संख्या में अधिकारियों की भी जमात शामिल है। सरकारी सेवा नियमावली यह कहती है कि हर तीन वर्ष में कर्मचारियों और अधिकारियों का तबादला या पटल परिर्वतन किया जाता है।

इसके पीछे यह मंशा होती है कि एक ही सीट पर रहकर अधिकारी या कर्मचारी अपने पद का दुरुपयोग न करने लगे। लेकिन योगेश वर्मा से नजदीकी होने का इन अधिकारियों ने यह फायदा उठाया कि कई अधिकारियों ने महापौर बनीं सुनीता वर्मा के समय में ही यह विशेष कृपा करवा ली कि शासन स्तर पर अपनी स्थाई नियुक्ति नगर निगम और विशेष विभागों के लिए नियमित करवा ली। सुनीता वर्मा और योगेश वर्मा इन अधिकारियों और कर्मचारियों का खेल नहीं समझ सके और उन्होंने इन अधिकारियों और कर्मचारियों की स्थाई कुर्सी की व्यवस्था करा ली।

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भाजपा के प्रति अधिक दिखाते हैं निष्ठा

नगर निगम के ही कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों ने भाजपा के प्रति निष्ठावान होने की प्रतिज्ञा ले रखी है। कई अधिकारी तो ऐसे हैं, जो सीएम योगी आदित्यनाथ के परिवार से अपने कुल के होने का दावा भी करते हैं। कुछ अधिकारियों को यह अहंकार है कि भाजपा के दम से ही उनकी नौकरी चल रही है। इसलिए वह जैसा चाहेंगे, ऐसा करते रहेंगे। जब कोई आम नागरिक अपनी समस्या लेकर नगर निगम आता है तो भाजपा का लबादा ओढे हुए यह अधिकारी और कर्मचारी उस नागरिक पर ऐसी टीका टिप्पणी करते हैं कि शिकायतकर्ता शर्म से गड़ जाता है। सत्ता के नशे में यह समस्या लेकर आने वालों को धरती पर बोझ तक बता देते हैं।

चुनाव ड्यूटी छोड़, वोट डलवाने में मसरूफ

अब चुनाव का मौका चल रहा है तो यह अधिकारी और कर्मचारी चुनाव ड्यूटी से बचते हुए सीधे अपने-अपने खेमे की सियासी पार्टी के खेमे में पहुंच गये। प्रचार में खुलकर अपनी मर्जी के प्रत्याशी के लिए प्रचार करते रहे, लेकिन जब प्रशासन ने मतदान के लिए इन अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटियां लगार्इं तो इन आस्थावान पार्टी वर्करों ने पहले तो ड्यूटियां कटवानी चाहीं, लेकिन जब डीएम ने निलंबन का खौफ दिखाया तो यह आस्थावान कर्मचारी ड्यूटी स्थल पर उल्टी करने लगे। कुछ कर्मचारियों ने पेट पकड़कर दर्द होने का स्वांग रचा।

मौके पर इनकी मनोदशा देखते हुए इनको चुनाव ड्यूटी से मुक्त कर दिया गया। इसके बाद यह सभी कर्मचारी अपनी-अपनी मनमर्जी के नेता के खेमे में पहुंच गये। गत दिवस मतदान के दिन भी यह पार्टी विशेष की गाड़ियों में प्रचार के साथ-साथ बूथ वार वोट प्रतिशत बढ़वाने में कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ रहे थे। लेकिन इनमें से आठ अधिकारियों व कर्मचारियों की वीडियो बनाकर नगर आयुक्त को सौंपी गई है। वीडियो में पार्टी विशेष के लिए मतदान में वोट कराने की कोशिश करने वाले इन अधिकारिेयों और कर्मचारियों के चेहरे भी साफ दिखाई दे रहे हैं।

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