Tuesday, March 3, 2026
- Advertisement -

बागपत-बिजनौर सीटें जीतने से बढ़ा जयंत का कद

  • पश्चिमी यूपी की 14 में से पांच सीटें ही जीत सकी भाजपा
  • भाजपा के साथ गठबंधन का रालोद को मिला पूरा फायदा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: पश्चिमी यूपी में अपनी खास भूमिका निभाने वाले राष्ट्रीय लोकदल के दोनों प्रत्याशियों ने विजयश्री हासिल कर नया इतिहास रचा है। कुछ ऐसा ही करिश्मा हुआ है, जो 2009 में भाजपा से गठबंधन कर उसने पांच लोकसभा की सीटें हासिल किया था। भाजपा के साथ गठबंधन का रालोद को तो पूरा फायदा मिला, लेकिन भाजपा को कोई खास लाभ पश्चिम में नहीं उठा सकी। 14 में से सिर्फ पांच सीटें ही उसकी झोली में आयीं। केंद्रीय राज्यमंत्री संजीव बालियान तक को हार का मुंह देखना पड़ा।

रालोद के लिए भाजपा के साथ गठबंधन भाग्यशाली साबित हुआ। भाजपा को उम्मीद थी कि पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को मरणोपरांत भारत रत्न देकर और राष्ट्रीय लोकदल को साथ लेने से पश्चिमी यूपी में नाराज चल रहे जाटों व किसानों को शांत कर उसका राजनीतिक फायदा मिल सकेगा। इसके चलते ही रालोद मुखिया जयंत चौधरी संग भाजपा नेताओं ने कई मंच भी साझा किये। पार्टी के जाट नेताओं की फौज को चुनाव प्रचार के लिए उतारा। प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल में रालोद कोटे से एक विधायक अनिल को जगह मिली तो एक एमएलसी की सीट भी मिल गई।

गठबंधन में बागपत और बिजनौर दो सीटें भी मिली। माना जाने लगा कि अगर रालोद अपनी दोनों सीटें निकाल लेता है तो निश्चित रूप से जयंत चौधरी का कद तो बढ़ेगा ही, उन्हें केंद्रीय मंत्रीमंडल में जगह मिल सकेगी, लेकिन जिस तरह के चुनाव नतीजे सामने आए हैं, उससे परिस्थितियां काफी बदली हैं। अन्य राज्यों की बात छोड़ दें तो उत्तर प्रदेश में नतीजे भाजपा के लिए काफी निराशाजनक रहे।

पश्चिमी यूपी में आए परिणामों को लेकर भाजपा को सबसे ज्यादा असहज होना पड़ा है। मेरठ से चुनावी शंखनाद करने वाली पार्टी को पश्चिम में अधिकांश सीटों पर जीत की उम्मीद थी। रालोद को भी इस बात का पूरा भरोसा था कि भाजपा का साथ मिलने से वह कम से कम अपनी राजनीतिक पंूजी को सहेज सकेगा। जयंत का मिशन तो कामयाब हो गया और बागपत व बिजनौर सीटें जीतकर अपना कद भी बना लिया, लेकिन भाजपा को मुजफ्फरनगर, नगीना, सहारनपुर जैसी सीटोें को गंवाना पड़ा।

मुजफ्फरनगर में केंद्रीय मंत्री डा. संजीव बालियान का विरोध था। तीसरी बार उन्हें टिकट मिला था। सरधना क्षेत्र में पूर्व विधायक संगीत सोम से चल रही अदावत से उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ा। दूसरी सीटों पर दलित और मुस्लिमों का सपा की तरफ झुकाव होना भारी पड़ा। जबकि रालोद गठबंधन का पूरा लाभ मिला और दोनों सीटें जीतने से राजनीतिक कद भी बढ़ा। पार्टी को संजीवनी भी मिली है। पिछले चुनावों में रालोद को जो नुकसान उठाना पड़ा, उसकी काफी हद तक भरपाई भी हुई है। अगर भाजपा एक बार फिर से केंद्र में सरकार बनाती है तो निश्चित रूप से जयंत चौधरी के लिए भी मंत्रिमंडल का दरवाजा खुल सकता है।

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

Chandra Grahan 2026: ग्रहण समाप्ति के बाद तुरंत करें ये 5 काम, जीवन में सुख-शांति का होगा वास

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत...

US: टेक्सास में गोलीबारी में भारतीय मूल की छात्रा समेत चार की मौत, 14 घायल

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: अमेरिका के टेक्सास राज्य की...
spot_imgspot_img