- सूबे में मनमाफिक प्रदर्शन न करने पर नेतृत्व नाराज
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव का रिजल्ट आने के बाद से भाजपा के अंदरखाने में हलचल तेज हो गई है। पिछले 10 सालों में भाजपा को सबसे बड़ी हार का सामना प्रदेश में करना पड़ा है। इसके बाद समीक्षाओं का दौर शुरू हो रहा है। लोकसभा चुनाव में भाजपा को 29 सीटों का नुकसान हुआ है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी के वोट बैंक में भी करीब 8 फीसदी का नुकसान होता दिख रहा है। ऐसे में चूक कहां हुई? इसके लिए जिम्मेदार कौन है? इन मसलों पर समीक्षा शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी को दिल्ली बुलाया गया है। वहीं, प्रदेश संगठन महामंत्री भी दिल्ली तलब किए गए हैं।
उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में से महज 33 सीटों पर भाजपा जीत कर पाई है। वहीं, सहयोगी दलों के खाते में तीन सीटें आई हैं। वहीं, दूसरी ओर इंडिया गठबंधन ने 43 सीटों पर कब्जा जमाया है। अकेले समाजवादी पार्टी ने 37 सीटों पर जीती हैं। वहीं, कांग्रेस के खाते में 6 सीटें आई हैं। एक सीट आजाद समाज पार्टी के पास गई है। भाजपा की इस करारी हार को लेकर बड़े स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है।
उत्तर प्रदेश की 80 में से 75 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने अपने उम्मीदवार उतारे थे। भाजपा की ओर से उम्मीदवार तय करने की जिम्मेदारी संगठन की थी। पार्टी ने निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार बदलने की मांगों को नजरअंदाज किया। अपने स्तर पर उम्मीदवार तय किए। इस प्रकार के आरोप हार के बाद लगने लगे हैं। भाजपा के एक खेमे से भी दावा किया जा रहा है कि उम्मीदवारों के चयन में प्रदेश शीर्ष नेतृत्व की सहमति नहीं ली गई।
भाजपा के माइंड गेम में फंसी आम आदमी पार्टी
मेरठ: आम आदमी पार्टी को माइंड गेम में फंसाकर भाजपा ने दिल्ली की सभी सातों सीटों को जीतने का कारनामा लगातार तीसरी बार कर दिखाया है। जबकि कांग्रेस के साथ गठबंधन करके सीटें शेयर करने के बावजूद आम आदमी पार्टी को करारी शिकस्त का मुंह देखना पड़ा है। इसको लेकर आप कार्यकर्ताओं में मायूसी देखने को मिली है, हालांकि पंजाब में पार्टी के हिस्से में आर्इं तीन सीटों ने कहीं न कहीं मरहम लगाने का काम भी किया है। पांच राज्यों की 22 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली आम आदमी पार्टी को दिल्ली, हरियाणा, गुजरात और असम में गठबंधन के बावजूद कोई कामयाबी नहीं मिल सकी है।
मतदाताओं के मिजाज के समझने में विभिन्न राजनीतिक दल इस बार पूरी तरह नाकामयाब रहे। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की अगर बात की जाए, तो दोनों ने दिल्ली की सात सीटों पर गठबंधन किया, जिनमें चार पर आम और तीन पर कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों को चुनाव लड़ाया। इस बीच शराब घोटाले के मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को जेल भेज दिया गया। जिनको हालांकि सुप्रीम कोर्ट से चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत मिली, लेकिन इस दौरान भाजपा अपने प्रत्याशियों के चयन से लेकर चुनाव प्रचार तक में उससे काफी आगे निकल गई। वहीं आम आदमी पार्टी नेता पूरे मामले पर सफाई देने, और धरना-प्रदर्शन करने में उलझकर रह गए।

