Thursday, March 26, 2026
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जांच में खुला विकास के नाम पर अवैध पेड़ कटान का महाखेल

  • गंगनहर पटरी पर पेड़ कटान की जांच करने पहुंचे वन विभाग के अधिकारी

जनवाणी संवाददाता |

सरधना: चौधरी चरण सिंह कांवड़ मार्ग की दाई गंगनहर पटरी निर्माण के नाम पर उजाड़ी जा रही हरियाली के खिलाफ विधायक अतुल प्रधान द्वारा चलाई जा रही मुहीम के तहत गुरुवार को अधिकारी जांच करने पहुंचे। महज नानू से सरधना पुल तक पटरी पर टीम को कई जगह अवैध कटान मिला। जहां पेड़ों को काटने की जरूरत नहीं थी। वहां से भी बेहद पुराने पेड़ों को काट लिया गया।

यहां तक की जिन छोटे पेड़ों का प्रतिरोपण किया जाना था, ठेकेदार उन्हें भी काट कर ले गए। मंढियाई के निकट ग्रामीणों ने भी अधिकारियों को हरियाली को लीलने के इस खेल से अवगत कराया। विकास के नाम पर जरूरत और मानक से कई गुना अधिक पेड़ों का कटान कर दिया गया। इस छोटे टुकड़े पर मिले अवैध कटान के सुबूत को देखते हुए अधिकारियों ने तय किया कि मेरठ के साथ गाजियाबाद और मुजफ्फरनगर क्षेत्र में भी जांच कराई जानी चाहिए।

सरकार द्वारा चौधरी चरण सिंह कांवड़ मार्ग की दाई गंगनहर पटरी का निर्माण कराया जा रहा है। क्योंकि पटरी पर लाखों की संख्या में पुराने पेड़ लगे हुए थे। इसलिए प्रोजेक्ट को शुरू करने में काफी समय लगा था। कम से कम पेड़ कटान की योजना बनाने की वजह से जितना समय लगा, धरातल पर अधिकारियां ने पानी फेर दिया। विकास के नाम पर लाखों पेड़ों का कटान कर दिया गया। वैसे तो सड़क बनाने के लिए यहां से 1.12 लाख पेड़ों का कटान होना था। मगर उससे कई गुना अधिक पेड़ काट दिए गए। जिसका विरोध विधायक अतुल प्रधान कर रहे हैं। कई दिन से विधायक ने अवैध कटान के खिलाफ मुहीम चला रखी है।

बीते बुधवार को कमिश्नर से मिलने के साथ ही मुख्य वन रक्षक के कार्यालय पर धरना दिया था। कमिश्नर के आदेश पर गुरुवार को वन विभाग व पीडब्ल्यूडी के अधिकारी जांच करने पहुंचे। विधायक अतुल प्रधान भी समर्थकों के साथ यहां पहुंच गए। वन रक्षक रमेश चंद व डीएफओ राजेश कुमार समेत वन विभाग का तमाम स्टाफ यहां मौजूद रहा। नानू से लेकर सरधना पुल तक पटरी पर पेड़ों के कटान का निरीक्षण किया गया। टीम को कई जगह दिखा कि जहां पेड़ों के कटान की जरूरत नहीं थी, वहां भी पेड़ काटे गए हैं।

14 मीटर के स्थान पर 30-40-50 मीटर चौड़ाई तक पेड़ों को काट लिया गया। विकास के नाम पर हरियाली को बड़े स्तर पर नष्ट करने का काम किया जा रहा है। अधिकारियों ने खुद माना कि पांच किलो मीटर के टुकड़े में तीन जगह ऐसी हैं, जहां अवैध कटान हुआ है। जिस पर तय किया गया कि मेरठ के अलावा गाजियाबाद व मुजफ्फरनगर क्षेत्र में भी कटान की जांच होना जरूरी है। वहीं हरियाली संरक्षण ट्रस्ट ने वन विभाग के अधिकारियों को इस संबंध में एक ज्ञापन सौंपा गया है।

एनजीटी के आदेश भी नहीं माने

क्षेत्रीय लोगों द्वारा इसका लगातार विरोध हो रहा है। कई लोगों ने एनजीटी में इसकी शिकायत भी कर रखी है। पहले पटरी बनाने के लिए 20 मीटर चौड़ाई तक पेड़ काटने की अनुमति थी। मगर बाद में एनजीटी के आदेश पर 14 मीटर चौड़ाई। तक ही पेड़ काटने के आदेश हुए थे। मगर ठेकेदारों ने एनजीटी के आदेश भी नहीं माने और बेहद पुराने पेड़ों को काटकर ले गए। अब 8 जुलाई को एनजीटी में मामले की सुनवाई होनी है।

विधायक खुद लेकर चले फीता

विधायक अतुल प्रधान समर्थकों के साथ पटरी पहुंचे। पटरी की चौड़ाई नपवाने के लिए विधायक ने खुद फीता उठा लिया। विधायक ने स्वयं पटरी को नापने का काम किया। अधिकारियों ने उन्हें कहा भी कि वह कर लेंगे। मगर विधायक ने स्वयं नपाई कराने का काम किया।

ग्रामीणों ने खोल दी पोल

मंढियाई गांव के निकट ग्रामीणों ने अधिकारियों को पेड़ों के कटान की हकीकत बताई। कहा कि ठेकेदार के लोग उन पेड़ों को भी काटकर ले गए जो पटरी निर्माण की जद में नहीं आ रहे थे। यहां तक की छोटे पेड़ भी नहीं छोड़े, जबकि नियमानुसार छोटे पेड़ों का प्रतिरोपण किया जाना था।

लोकसभा में उठेगा मुद्दा

विधायक अतुल प्रधान ने अधिकारियों से कहा कि इस खेल को उजागर करके रहेेंगे। वह खुद विधानसभा में इस मुद्दे को उठाएंगे। साथ ही लोकसभा में मुद्दा उठाने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष को भी पत्र लिखा है।

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