Friday, March 20, 2026
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डबल हुआ यूनिपोल का साइज, सिकुड़ा मवाना रोड का डिवाइडर

  • मेडा अफसरों की छत्रछाया में पल रहे ठेकेदार, डिवाइडर के रखरखाव को लेकर लापरवाही

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मवाना रोड पर डिवाइडर पर लगाए जाने वाले यूनिपोल का साइज तो साल दर साल बढ़ता चला गया, लेकिन मेडा अफसरों की छत्रछाया में पल रहे विज्ञापन ठेकेदार की लापरवाही के चलते कई जगह या तो डिवाइडर पूरी तरह से खत्म हो गया या वो सिकुड़ गए। मवाना रोड से डिफेंस कालोनी के बीच के रास्ते की यदि बात की जाए तो रोड के बीचोंबीच बने डिवाइडर पर मेरठ व मवाना दोनों साइड से ठेकेदार ने बडेÞ-बडेÞ यूनिपोल तो लगा दिए हैं, लेकिन यूनिपोल लगाने के साथ मवाना रोड के डिवाइडर की रखरखाव की शर्त ठेकेदार बिसराए बैठा है।

ऐसा नहीं कि मवाना रोड के डिवाइडर की बुरी दशा की जानकारी मेरठ प्राधिकरण के अफसरों को जानकारी नहीं है। उन्हें इसकी पूरी जानकारी भी है और यह भी पता है डिवाइडर पर लगाए जाने वाले यूनिपोल का साइज लगातार साल दर साल बढ़ा ही जा रहा है। मवाना रोड के डिवाइडर पर यूनिपोल के ठेके के साथ यह शर्त भी थी कि ठेकेदार डिवाइडर का भी रखरखाव करेगा ताकि इस खतरनाक मोड़ वाले रास्ते पर वाहन चालकों के हादसों से बचाया जा सके, लेकिन ठेकेदार केवल यूनिपोल लगाने का तो ध्यान रखा, डिवाइडर के रखखाव का ध्यान बिलकुल नहीं रखा गया।

डिवाइडर के रह गए अवशेष

कमिश्नर आवास से लेकर डिफैंस कालोनी के डिवाइडर की यदि बात करें तो डिवाइडर के नाम पर कई स्थानों पर डिवाइडर के अवशेष भर रह गए हैं। कमिश्नर आवास से मवाना रोड से वाया डेयरी फार्म व भगत लाइन से आगे कसेरूखेड़ा नाला तक तक रोड के बीचों बीच डिवाइडर का बुरा हाल है। रखरखाव न होने की वजह से यह पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है। कुछ स्थानों पर तो यह गायब ही हो गया है। डिवाइडर की करीब एक फुट से ज्यादा की दीवार पर लोहे का बड़ा जाल लगा है। इस पर जगह-जगह मेडा के छोटे-छोटे नेमप्लेट साइज के बोर्ड लगे हैं।

ये बोर्ड बता रहे हैं कि इस डिवाइडर के रखरखाव की जिम्मेदारी मेडा के यूनिपोल लगाने वाले ठेकेदार की है। लेकिन डिवाइडर ही नहीं उस पर लगी लोहे का फ्रेम भी किसी काम का नहीं रह गया है। अरसे से रिपेयर न होने की वजह से वह बुरी तरह गल गया है। हाथ लगाने भर से डिवाइजर पर लगा लोहे का यह जाल चूर-चूर होने लगा। कई जगह से यह टूटकर मुड़कर सड़क में नीचे की ओर धंस गया है। मवाना रोड का टूटा हुआ डिवाइडर और उस पर लगा लोहे का जाल जिस प्रकार से टूटकर सड़क के बीच वाले रास्ते पर आ गया है वो सड़क हादसों को दावत देता नजर आता है। तेज रफ्तार कोई दो पहिया वाहन चालक यदि इस मार्ग से होकर जाता है

तो डिवाइडर के टूूटे हुए जाल का पूर्वानुमान न होने की वजह से वह हादसे का भी शिकार हो सकता है। डेयरी फार्म के सामने भी डिवाइडर का जाल रखरखाव न किए जाने की वजह से जगह-जगह से टूटकर सड़क की ओर आ गया है। इसी प्रकार भगत लाइन और आगे कसेरूखेड़ा की समीप भी इसका ऐसा ही बुरा हाल बना दिया गया है। लोगों ने बताया कि आए दिन यहां हादसे होते रहते हैं। एक तो ठेकेदार डिवाडर का रखरखाव नहीं कर पा रहा है दूसरे डिवाडर का जाल जिस प्रकार से टूटकर लटक गया है वो बडेÞ हादसे की वजह से बनेगा।

वीसी को क्यों रखा है अंधेरे में?

आमजन के मामलों को लेकर पूरी तरह से सजग मेडा वीसी अभिषेक पांडेय को मवाना रोड के डिवाइडर व उस पर लगे लोहे की क्षतिगस्त हो चुकी जाल की बदहाली की जानकारी नीचे के अफसरों ने क्या नहीं दी। जबकि मेडा के तमाम कर्मचारी व अधिकारी जानते हैं कि वीसी ऐसे मामलों को लेकर हमेशा ही प्राथमिकता के आधार पर निर्णय व कार्रवाई करते हैं। या फिर यह मान लिया जाए कि ठेकेदार को संरक्षण देने में मातहत इतने खोए हुए हैं कि उन्हें मवाना रोड के अवशेष में बदलते डिवाइडर व लगातार बढ़ रहे ठेकेदार के यूनिपोल के साइजों की जानकारी मेडा वीसी को देने की फुर्सत ही नहीं है। या फिर यह मान लिया जाए कि यहां किसी बडेÞ हादसे का इंतजार मातहत कर रहे हैं। हादसा होने पर जब बवाल शुरू होगा तो सारी बात वीसी पर आ जाएगी। बेहतर तो यही होता कि उससे पहले ही मेडा के नीचे के अफसर इसकी जानकारी वीसी के संज्ञान में लाकर ठेकेदार से डिवाइडर की मरम्मत कराएं।

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