- शॉर्ट सर्किट से हुआ हादसा, दमकल की छह गाड़ियों ने पाया आग पर काबू
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: दिन निकलते ही क्षेत्र में बने कपड़ों के गोदाम में भीषण आग लगने से अफरातफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने पहले तो खुद ही आग पर पानी डालकर बुझाने का प्रयास किया, लेकिन चंद मिनट में ही आग ने विकराल रुप धारण कर लिया। अग्निशमन विभाग को सूचना दी गई। जिसके बाद मौके पर पहुंची छह गाड़ियों ने चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। घटना में 20 लाख का कपड़ा जलकर राख हो गया।
रविवार को लिसाड़ी गेट की शाहजहां कॉलोनी में स्थित कपड़े के गोदाम में शार्ट सर्किट से भीषण आग लग गई। कुछ मिनट में ही आग ने विकराल रुप धारण कर लिया। आग का धुआं पांच किमी दूर से भी देखा जा रहा था। बताया जा रहा है इकबाल निवासी गली नंबर-9 शाहजहां कॉलोनी ने अपने घर के पीछे ही कपड़ो का गोदाम बना रखा है। सुबह करीब पौने सात बजे अचानक शार्ट सर्किट से निकली चिंगारी से गोदाम में रखे कपड़ो में आग लग गई। आग लगते ही क्षेत्र में अफरातफरी मच गई। आसपास रहने वाले लोग अपने घरों को छोड़कर दूर भागने लगे।
इसी बीच कुछ स्थानीय निवासियों ने बाल्टियों से पानी डालकर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन वह कामयाब नहीं हो सके। महज 15 मिनट में ही आग ने विकराल रुप धारण कर लिया। आग की उंची लपटों से क्षेत्र में काला धुआं फैल गया, इस वजह से लोगों को सांस लेने में भी खासी परेशानी होने लगी। इसी बीच किसी ने फायर ब्रिगेड को सूचना दी। जिसके बाद छह गाड़ियां किसी तरह मौके पर पहुंची।
तंग रास्ता होने की वजह से फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को भी घटना स्थल पर आने में समय लगा। अग्निशमन की टीम ने चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। गनीमत रही कि अग्निकांड में किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं है, लेकिन घटना में 20 लाख का कपड़ा जलकर राख हो गया।
मेडिकल के निजी वार्ड से क्यों दूरी बनाते हैं तीमारदार?
मेरठ: बरसात के मौसम में अचानक संचारी रोगियों की संख्या बढ़ जाती है इनमें सबसे ज्यादा बुखार के मरीज होते हैं। अकेले मेडिकल कॉलेज में ही इन दिनों रोजाना बुखार, उल्टी-दस्त व संक्रमण के करीब पांच सौ मरीज पहुंच रहे हैं। इमरजेंसी में कोई भी बेड खाली नहीं है, जबकि वेटिंग एरिया में भी मरीजों के लिए उपलब्ध सभी बेड फुल है। वहीं, दूसरी ओर इमरजेंसी के चंद कदम की दूरी पर ही स्थित निजी वार्ड में नाममात्र के लिए मरीज इलाज करा रहे हैं। सवाल ये कि ऐसी वजह है कि मरीज निजी वार्डों से दूरी बनाते हैं।
एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में मरीजों के लिए 1200 बेड हैं, जबकि कुल 24 विभाग है। मरीजों को निजी अस्पताल जैसी इलाज की सुविधाएं देने के लिए 20 कमरों का निजी वार्ड भी है। जिसमें छह ऐसी व 14 नॉन एसी कमरे हैं। इन कमरों का चार्ज भी काफी कम है, जो एसी रूम के लिए एक हजार व नॉन एसी के लिए 600 रुपये प्रतिदिन निर्धारित है। बावजूद इसके निजी वार्ड में मरीजों की संख्या काफी कम रहती है। शनिवार को भी केवल तीन मरीज ही यहां इलाज के लिए भर्ती थे, जबकि इमरजेंसी समेत संचारी रोग वार्ड में बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए भर्ती है।
बताया जा रहा है कि जनवरी से पहले निजी वार्ड में कमरों का किराया नॉन एसी के लिए 125 व एसी के लिए 600 रुपये था। जिसे बाद में बढ़ाकर 250 व एक हजार रुपये कर दिया गया। मेडिकल में मरीजों को मुफ्त इलाज की सुविधा मिलती है। जिसमें दवाओं से लेकर मरीजों व एक तीमारदार का नाश्ता, दोपहर व रात का खाना भी शामिल है, लेकिन निजी वार्ड में भर्ती मरीज को कुछ भी मुफ्त नहीं मिलता, शायद यही सबसे बड़ी वजह है। ऐसे में शासन को चाहिए कि निजी वार्ड में भर्ती मरीजों को भी यदि मुफ्त दवाओं व भोजन की सुविधा उपलब्ध हो जाए तो उम्मीद है कि जो मरीज इमरजेंसी में इलाज के लिए वेटिंग में है, वह निजी वार्ड का रुख कर सकते हैं।

