Sunday, May 24, 2026
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लाइसेंस निरस्त होने के बाद भी धड़ल्ले से चल रहे अस्पताल

  • आवास विकास ने कार्रवाई के लिए दो दर्जन से ज्यादा अस्पतालों को थमाए नोटिस

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: जिला स्वास्थ्य चिकित्सा एवं परिवार कल्याण विभाग अवैध रूप से चल रहे अस्पतालों पर मेहरबान है। यहां लाइसेंस निरस्त होने के बावजूद कई अस्पताल धड़ल्ले से चल रहे हैं। इन अस्पतालों में क्रिटिकल मरीज भर्ती होने का बहाना बनाकर कार्रवाई को टाल-मटोल कर दिया जाता है। एक अस्पताल पर सील की कार्रवाई भी कर दी गई, जिसे धता बताते हुए अस्पताल को शुरू कर दिया गया। जिसमें मरीजों का उपचार किया जा रहा है।

आवास विकास परिषद की ओर से कई ऐसे अस्पतालों को चिन्हित कर नोटिस दिए हंै, जिनका संचालन रिहायशी कॉलोनियों में किया जा रहा है। इन अस्पतालों की संख्या करीब 20-25 है। इन अस्पतालों को लाइसेंस को निरस्त करते हुए इन्हें बंद कराने की कार्रवाई के लिए परिषद ने सीएमओ को भी पत्र लिखा है। इनमें से दो अस्पताल ऐसे भी है, जिनके लाइसेंस निरस्त होने के बावजूद भी वह धड़ल्ले से चल रहे है। शास्त्री नगर के एल ब्लॉक स्थित प्रमोद हॉस्पिटल और आई ब्लॉक में स्थित सरस्वती हॉस्पिटल का लाइसेंस निरस्त है, लेकिन वह चल रहे और उनमें मरीजों को भी भर्ती करने के साथ-साथ उन्हें परामर्श दिया जा रहा है।

इसके अलावा भी कई अस्पताल है, जिनके लाइसेंस निरस्त की कार्रवाई तो कर दी गई, लेकिन सील की कार्रवाई के लिए मामले को लगातार टाला जा रहा है। आवास विकास परिषद के सहायक अभियंता इंद्रजीत सिंह ने बताया की इन अस्पतालों में किसी तरह की सुविधा नहीं है। इमरजेंसी गेट, पार्किंग आदि की व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा यह छोटी सी जगह में ही दो से तीन मंजिला अस्पताल बनाए गए है। अस्पताल आने-जाने के लिए एक ही गेट बनाया गया है। यह मरीजों की सुरक्षा के लिहाज से किसी भी तरह से ठीक नहीं है।

बेसमेंट में बनाई गई इमरजेंसी

शास्त्री नगर के आई ब्लॉक में स्थित सरस्वती हॉस्पिटल में बेसमेंट भी बनाया गया है। जिसमें इमरजेंसी चलाई जा रही है। अगर किसी तरह का हादसा होता है, यहां बचने के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए है। साथ ही बेसमेंट में से ही लिफ्ट भी लगाई गई है।

सील के बावजूद कैसे चला अस्पताल

सरस्वती हॉस्पिटल को हाल में सील भी कर दिया गया था, लेकिन बावजूद इसके यह फिर से कैसे चल गया, यह बड़ा सवाल है। आखिरकार जब लाइसेंस निरस्त कर दिया गया तो किसकी सह पर यह अस्पताल चलाए जा रहे है। आवास विकास और स्वास्थ्य विभाग पर कई सवालियां निशान खड़े होते है।

जांच कर कराई जाएगी कार्रवाई: सीएमओ

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक कटारिया का कहना है कि वह इस तरह के अस्पतालों की जांच कराएंगे। अस्पतालों को चिन्हित करते हुए टीम मौके पर जाकर जांच करेगी। जो अस्पताल मानकों के अंतर्गत नहीं चल रहे है, उनपर सील की कार्रवाई की जाएगी।

रजिस्टर्ड 300, चल रहे 1000 से ज्यादा नर्सिंग होम

जिले में एक हजार से ज्यादा नर्सिंग होम और हॉस्पिटल चल रहे हैं, लेकिन मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय में केवल 311 ही रजिस्टर्ड है। ऐसे में बड़ी संख्या में अवैध नर्सिंग होम संचालित हैं जिन्हें रोकने और कार्रवाई करने वाला कोई नहीं। स्वास्थ्य विभाग भी इस तरह से अंजान बना हुआ है। हालांकि इसके पीछे नर्सिंग होम संचालकों से मिलीभगत के आरोप लग रहे हैं।

आए दिन फर्जी अस्पतालों में मरीजों की मौत की खबर आती है। इन खबरों के बाद ही स्वास्थ्य विभाग कुंभकर्णी नींद से जागता है। कुछ दिन तक अभियान चलाकर कुछ अस्पतालों को सीज किया जाता है, लेकिन उसके कुछ ही दिन बाद वह अस्पताल फिर से चलते पाए जाते हंै। मेरठ में ऐसे ही बड़ी संख्या में अस्पताल है, जिनका रिजस्ट्रेशन तक नहीं है। उनका सीएमओ आॅफिस में कोई रिकॉर्ड नहीं है। बावजूद इसके वह, बेखौफ तरीके से मरीजों का उपचार करते है। स्वास्थ्य विभाग की अधिकृत वेबसाइट के मुताबकि जिले में 311 हॉस्पिटल/नर्सिंग होम/मैटरनिटी होम, 137 लैब, 495 क्लीनिक और कुल 175 ही अल्ट्रासाउंड सेंटर रजिस्टर्ड है।

इन आंकड़ों से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि पूरे जिले में कितने अस्पताल, पैथोलॉजी लैब, नर्सिंग होम और मैटरनिटी होम फर्जी व अवैध तरीके से चल रहे होंगे। जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक कटारिया का कहना है कि अवैध रूप से संचालित अस्पतालों के लिए अभियान चलाया जाएगा। अभी तक उनके कार्यकाल में तीन अस्पतालों को सील किया गया है। उन्होंने कहा कि जो भी अवैध रूप से अस्पताल संचालित होंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। शिकायत मिलने के बाद भी तुरंत ही अस्पताल में टीम भेजकर जांच कराई जाती है। उधर, एसीएमओ डॉ. कांता प्रसाद ने बताया कि उन्होंने जिले के करीब 20 अस्पतालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। इन्हें बंद करा दिया गया। यह अस्पताल अवैध रूप से संचालित थे। उन्होंने कहा कि रोजाना फील्ड में घूमकर अवैध अस्पतालों की जांच की जाती है।

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