जनवाणी संवादाता |
मेरठ: नगर निगम में करीब 23 कर्मचारियों की फर्जी नियुक्ति और बाद में उनके नियमितिकरण का मामला हाईकोर्ट में पहुंचा गया है। इस मामले में बुधवार की सुनवाई के लिए तारीख लगी है। इस संबंध में कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गयी है।
जनहित याचिका में साल 2008 से लेकर 2010 के मध्य की गयी करीब 23 कर्मचारियों की नियुक्ति पर को गैर संवैधानिक बताते हुए कोर्ट को अवगत कराया गया है कि तत्कालीन दो पूर्व नगरायुक्त मणि प्रसाद व डीके सिंह ने भी अपनी जांच में नियुक्तियों को लेकर लगाए गए आरोपों को सही पाया था।
साथ ही इस संबंध में शासन को पत्र लिखकर कार्रवाई का आग्रह किया था। ये भी आरोप है कि फर्जी नियुक्ति मामले को लेकर इस मामले में लिप्त स्टाफ जो भी अधिकारी इस मामले में कलम चलता है उस पर प्रेशर बनाया जाता है। इनकी पहुंच शासन तक बतायी जाती है।
जनहित याचिका को लेकर हाईकोर्ट ने निगम प्रशासन से जवाब मांगा है। हालांकि पता चला है कि बुधवार को होने वाली सुनवाई के लिए यह केस हाईकोर्ट की कोर्ट संख्या 29 को भेजा गया था, लेकिन उक्त कोर्ट ने यह केस स्वीकार नहीं किया। बापस इसको चीफ जस्टिस की कोर्ट में भेज दिया गया।
बताया गया है कि दरअसल सीएम योगी का कार्यक्रम लगा होने की वजह से चीफ जस्टिस की कोर्ट में सुनवाई नहीं हो सकी। इसकी सुनवाई की नयी तारीख शीघ्र दी जाएगी।
गबन के मामले की जांच में देरी पर फटकार
निगम के लिपिक राजेश त्यागी के कथित एक करोड़ के गवन मामले में जांच में देरी व कार्रवाई किए जाने पर शासन ने नाराजगी व्यक्त की है। इस संबंध में शासन के उप सचिव कल्याण बनर्जी ने नगरायुक्त को विगत 12 नवंबर को एक पत्र भी लिखा है। नगरायुक्त को मामले की बिना देरी जांच कर शासन को कार्रवाई से अवगत करने का निर्देश दिया गया है।

