- मनरेगा से लगभग एक करोड़ की लागत से बनकर तैयार हुई नर्सरी, किसानों के बीज की पौध होती है तैयार
जनवाणी संवाददाता |
दौराला: मछरी गांव में मनरेगा के तहत लगभग एक करोड़ की लागत से नर्सरी बनाई गई है। इस नर्सरी की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को दी गई है, ताकि उन्हें गांव में ही रहकर रोजगार मिल सके और उनकी आय बढ़े। महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने को लेकर नर्सरी बनाई गई है। ग्राम प्रधान गुरविंदर सिंह ने बताया कि गांव में लगभग एक करोड़ की लागत से मनरेगा से लगभग दो बीघा में नर्सरी बनाई गई है।
इस नर्सरी की जिम्मेदारी शिव शक्ति समूह व गायत्री समूह को दी गई है। इन दोनों समूहों की 10 महिलाएं नर्सरी में रोजगार कर अपनी आय बढ़ा रही है। प्रधान ने बताया कि इस नर्सरी में किसान अपना बीज देकर पौध तैयार करा सकते है। बताया कि बीज देकर पौध तैयार कराने के बाद किसान को एक या दो रुपये प्रति पौध दी जाती है। जबकि, यदि कोई किसान सीधे पौध खरीदता है तो उसके अलग अलग रुपये तय किए गए है।
दिनभर महिलाएं पौध की देखभाल करती है। नर्सरी में बैंगन, शिमला, प्याज, मिर्च, टमाटर आदि की पौध फिलहाल तैयार की जा रही है। उन्होंने बताया कि जिले में पांच नर्सरी बनाई गई है, जिनमें एक मछरी में बनाई गई। वर्ष 2023 में यह नर्सरी बनकर तैयार हो गई थी और स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने यहां कार्य करना शुरू कर दिया। इस नर्सरी को बनाने के पीछे महिलाओं को सशक्तिरण के साथ गांव में ही उन्हें रोजगार देना है,
ताकि वह अपने परिवार की आय बढ़ाकर घर खर्च में हाथ बंटा सके। मंगलवार को इस नर्सरी का राज्यपाल आनंदी बेन को निरीक्षण करना था, लेकिन समय के आभाव के चलते वह निरीक्षण करने नहीं पहुंच सकी। हालांकि, राज्यपाल के आने की सूचना पर अधिकारी पहले ही मछरी गांव स्थित नर्सरी पर पहुंच गए थे। राज्यपाल के न आने के बाद वह वापस लौट गए।
कायाकल्प की टीम ने जिला अस्पताल में पार्इं खामियां
मेरठ: कायाकल्प की मुरादाबाद से आई टीम ने जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। टीम ने ओपीडी, पैथालॉजी लैब से लेकर इमरजेंसी व कई अन्य वार्डांे का निरीक्षण किया और सफाई को परखा। टीम ने कर्मचारियों से स्वच्छता के लिए किए जाने वाले उपाए के बारे में जानकारी ली। कई कर्मचारी सही जवाब नहीं दे पाए। कायाकल्प के डिवीजनल प्रोजेक्ट मैनेजर मुरादाबाद हुमैरा बिन सलमा, प्रशांत श्रीवास्तव, डीपीएम रघुवीर सिंह दोपहर को जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होेंने सबसे पहले प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक के कार्यालय का निरीक्षण किया।
वहां डस्टबिन को देखा। कुछ अलमारियों पर धूल देखकर उन्होंने कर्मचारियों से सफाई के बारे में पूछा। टीम ने इमरजेंसी वार्ड में नर्सिंग स्टाफ से दस्ताने पहनने का तरीका पूछा, नर्स ने सही बताया। उन्होंने बायो वेस्ट को लाल डस्टबिन में कौन सी वेस्ट को, नीले डस्टबिन में कौन सी वेस्ट और पीले डस्टबिन में कौन सी वेस्ट डालने के बारे में पूछा। एक नर्स ने एक डस्टबिन के बारे में गलत जवाब दिया। उन्होंने दवाइयों के रखरखाव को देखा। इंजेक्शन, ड्रिप के डिस्पोजल के बारे में पूछा। पैथोलॉजी लैब में उपकरणों के स्टिरलाइजेशन के बारे में जानकारी ली।
एक कर्मचारी सही जानकारी नहीं दे पाया। टीम ने आर्थोपैडिक वार्ड में गंदगी पाई। टीम ने मेडिसन वार्ड, ओपीडी का निरीक्षण भी किया। टीम ने अस्पताल की किचिन और फीमेल वार्ड को भी देखा, कर्मचारियों से मरीज को इंजेक्शन लगाकर सीरिंज कहां फेकी जाती है के बारे में पूछा। कर्मचारियों ने नीडिल को कटर से काटने व सीरिंज को डस्टबिन में फेंकने की बात कही। टीम ने एनआरसी में जाकर सफाई को देखा। इस वार्ड की दीवारों पर गंदगी देकर टीम ने नाराजगी जताई।
टीम ने चिकित्सा अधीक्षक डा. कौशलेन्द्र से अस्पताल में रोजाना कितने मरीज आते हैं, कितने डाक्टर हैं और कितना स्टाफ आदि जानकारी ली। डा. कौशलेन्द्र ने बताया कि रोजाना डेढ़ से दो हजार मरीज आते हैं, 31 स्थाई और 19 संविदा के चिकित्सक हैं। 113 स्थाई व 226 संविदा के कर्मचारी हैं। एसआईसी के कक्ष में जिला अस्पताल के बारे में एक प्रिजेंटेशन भी प्रोजेक्टर के माध्यम से दिया गया।

