जनवाणी ब्यूरो |
देहरादून: विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन विपक्ष ने भ्रष्टाचार के मुद्दों पर सरकार को घेरते हुए हंगामा किया। सदस्यों ने काफी देर तक नारेबाजी भी की। संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने कहा कि विपक्ष का होमवर्क बेहद खराब है और सुनी सुनाई बातों पर बिना तथ्यों के आरोप लगा रहा है। सरकार ने जवाब से संतुष्ट न होने पर विपक्ष ने भोजनावकाश के बाद सदन का वाक आउट कर दिया।
बुधवार को प्रश्न काल शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष डा. इंदिरा हृदयेश, उप नेता करन माहरा, कांग्रेस प्रांतीय अध्यक्ष प्रीतम सिंह आदि ने सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। उन्होंने कर्मकार कल्याण बोर्ड, एनएच 74 जांच, छात्रवृत्ति घोटाला, स्टिंग, लोकायुक्त के मुद्दे पर हंगामा करते हुए नियम 310 में इस पर चर्चा कराने की मांग की। विपक्ष ने सीएम के औद्योगिक सलाहकार केएस पंवार की कंपनी सोशल ग्रुप पर भी कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए।
हंगामे के बीच स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल ने साफ किया कि जिन मामलों में कोर्ट में सुनवाई चल रही है, उस पर सदन में चर्चा नहीं हो सकती। हालांकि, सीएम के सलाहकार की कंपनी पर लगे आरोपों की नियम 58 में चर्चा कराई गई। भोजनावकाश के बाद भी विपक्ष ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर हंगामा जारी रखा। बाद संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक के जवाब से असंतुष्ट होकर सदन वॉकआउट कर दिया।
सरकार क्यों गई सुप्रीम कोर्ट
विपक्ष ने सवाल उठाया किया कि सरकार का एक स्टिंग सामने आया। सत्ता में बैठे लोगों के रिश्तेदारों पर खनन के मामलों में पैसे के लेनदेन के आरोप लगे। हाईकोर्ट ने हाल ही में एक प्रकरण में सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए। इस पर सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई। इससे साफ है कि सरकार भ्रष्टाचार को दबाने पर तुली है। यदि सभी पाक साफ हैं, तो क्यों इस मामले में जांच से बचा जा रहा है।
विपक्ष ने छात्रवृति घोटाले में अभी तक कोई बड़ी कार्रवाई न होने पर भी सवाल उठाए। कहा कि करोड़ों रुपये का गबन करने वाले अधिकारियों और स्कूल संचालकों के खिलाफ भी कोई कारवाई अभी तक नहीं हुई। आरोप लगाया कि इसमें सत्तापक्ष के कई लोगों पर भी आंच आना तय है। बड़ी मछलियों को बचाने को छोटी मछलियों पर कार्रवाई का दिखावा किया गया।
एनएच 74 में पहले कार्रवाई, बाद में क्लीन चिट
विपक्ष ने एनएच 74 घोटाले में सरकार पर लीपापोती का आरोप लगाया। नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश, कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि पूरी जांच अधर में है। पहले दिखावे को आईएएस अफसरों को निलंबित किया गया, बाद में उन्हें ही क्लीन चिट देकर बहाल कर दिया गया।
बुधवार को किसान दिवस के अवसर पर, पहाड़ के किसानों की समस्या उजागर करने के लिए कांग्रेस विधायक माल्टा की टोकरी ओर मंडुआ, झंगोरा की थेलियां लेकर विधानसभा पहुंचे। यहां विधायकों ने सरकार पर स्थानीय उपजों के प्रति उदासीनता बरतने का आरोप लगाया। कांग्रेस विधायक मनोज रावत, काजी निजामुद्दीन, आदेश चौहान और ममता राकेश सदन की कार्यवाही में शामिल होने के लिए जाते समय, विधानसभा के गेट पर जमा हुए।
मनोज रावत माल्टा की टोकरी लिए हुए थे। मनोज रावत ने कहा कि पहाड़ में इस बार माल्टा की अच्छी फसल हुई है। लेकिन सरकार मात्र सात रुपए का मूल्य दे रही है। उस पर भी खरीद केंद्रों की व्यवस्था नहीं की गई है। जिस कारण माल्टा उत्पादक किसान मायूस हैं। मनोज ने कहा कि कोदा, झंगोरा, राजमा, चौलाई उत्पादक किसानों की भी यही स्थिति है।
जबकि सरकार के मंत्री खुले आम, पहाड़ी उपजों का मजाक उड़ा रहे हैं। विधायक ममता राकेश ने कहा कि भाजपा सरकारों की उदासीनता के चलते ही किसान दिवस पर भी देशभर का किसान सड़कों पर आंदोलनरत है। काजी निजामुद्दीन ने कहा कि सरकार ने गन्ना किसानों के भुगतान पर भी आधी अधूरी जानकारी दी है। हालांकि गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें माल्टा और दूसरे अनाज को अंदर नहीं ले जाने दिया।

