जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: आज गुरूवार को जम्मू-कश्मीर को दोबारा पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में आज हुई सुनवाई ने देशभर में राजनीतिक और कानूनी हलचल तेज कर दी है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई की एक अहम टिप्पणी ने सबका ध्यान खींचा। उन्होंने कहा कि “राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए ज़मीनी हालात को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है।”
Supreme Court, while hearing pleas seeking direction to restore the statehood of the Union Territory of Jammu and Kashmir, observes that in granting statehood, the ground situation has to be taken into consideration.
— ANI (@ANI) August 14, 2025
“You cannot ignore what happened in Pahalgam," says CJI BR… pic.twitter.com/qIYliZOsVU
क्या कहा कोर्ट ने?
चीफ जस्टिस ने याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनते हुए स्पष्ट किया कि अदालत सिर्फ संवैधानिक ढांचे को ही नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत और सुरक्षा हालात को भी गंभीरता से देख रही है। CJI ने पहलगाम में हाल ही में हुई घटनाओं का हवाला देते हुए कहा, “पहलगाम में क्या हुआ, उसे आप नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते।”
सरकार ने क्या कहा?
सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि चुनाव के बाद राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किया गया है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर गंभीर है, लेकिन जम्मू-कश्मीर की “विशेष परिस्थिति” को ध्यान में रखकर फैसला लिया जाएगा। सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट से इस मुद्दे पर सरकार से निर्देश लेने के लिए 8 हफ्तों का समय मांगा।
मामले की पृष्ठभूमि
2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A को हटाने के बाद राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों — जम्मू-कश्मीर और लद्दाख — में विभाजित कर दिया गया था।
तब से लगातार वहां के लोगों और राजनैतिक दलों की ओर से पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग की जा रही है। इस मुद्दे पर कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं।
क्या कहती है सुप्रीम कोर्ट की दिशा?
कानून के साथ ज़मीनी हकीकत पर भी फोकस
सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता को प्राथमिकता
राज्य का दर्जा जल्द देने पर कोर्ट की जल्दबाज़ी नहीं
पहलगाम का ज़िक्र क्यों अहम?
हाल के महीनों में पहलगाम और आसपास के इलाकों में आतंकी घटनाओं में वृद्धि देखी गई है। CJI द्वारा इस क्षेत्र का जिक्र सीधे तौर पर इस बात की ओर इशारा करता है कि अमन और कानून व्यवस्था बहाल होना राज्य का दर्जा देने की पूर्वशर्त है।
लोगों की उम्मीदें और आशंकाएं?
उम्मीद
राजनीतिक स्वायत्तता की वापसी
स्थानीय विकास और रोजगार के अवसर
संवैधानिक अधिकारों की बहाली
चिंता
प्रक्रिया में हो सकती है देरी
अस्थिरता के चलते हो सकता है टालना
उम्मीदें बनाम सुरक्षा चुनौतियाँ
आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई में केंद्र सरकार अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकती है। चुनावों की संभावनाएं, सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट, और स्थानीय नेताओं का रुख इस मुद्दे पर बड़ा असर डाल सकते हैं।

