Tuesday, March 17, 2026
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Karwa Chauth 2025: करवा चौथ का पर्व आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और आरती

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को देशभर में सुहागिन महिलाएं करवा चौथ का पावन व्रत रखती हैं। इस वर्ष यह पर्व 10 अक्तूबर यानी आज मनाया जा रहा है। यह दिन प्रेम, समर्पण और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि की कामना के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। धार्मिक मान्यता है कि जो महिलाएं करवा चौथ के दिन श्रद्धा और भक्ति से करवा माता की पूजा-अर्चना करती हैं, उन्हें अखंड सौभाग्य, दांपत्य सुख और पारिवारिक समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके साथ ही करवा चौथ में चंद्र देव की पूजा का विशेष विधान है। व्रत का पारण चंद्र दर्शन के बाद ही किया जाता है, क्योंकि बिना चंद्रमा की पूजा किए यह व्रत अधूरा माना जाता है।

करवा चौथ

पंचांग के मुताबिक चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 9 अक्तूबर को देर रात 10 बजकर 54 मिनट से हो चुका है।

इस तिथि का समापन 10 अक्तूबर को शाम 07:38 मिनट पर होगा।

तिथि के अनुसार 10 अक्तूबर यानी की आज करवा चौथ का व्रत मान्य होगा।

करवा चौथ पर शाम 5 बजकर 57 मिनट से लेकर शाम 7 बजकर 11 मिनट तक पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा।

करवा चौथ पर शुभ योग

करवा चौथ पर कृत्तिका नक्षत्र बना हुआ है, जो शाम 5 बजकर 31 मिनट तक है।

इसपर सिद्ध योग का संयोग है, जो शाम 5:41 मिनट तक है और इसके बाद ही व्यतीपात योग प्रारंभ होगा।

चन्द्रमा वृषभ राशि में रहेंगे।

राहुकाल सुबह 10 बजकर 40 मिनट से दोपहर 12:07 मिनट तक रहेगा।

अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12:30 तक रहने वाला है।

पूजा विधि

करवा चौथ पर पूजा के लिए एक साफ चौकी पर करवा माता की तस्वीर रखें।

चौकी के पास कलश में साफ जल भरकर रखें।

साफ थाली में सिंदूर, दीपक, गंगाजल, अक्षत और हल्दी रखें।

थाली में फूल और गुड़ भी अवश्य रखें।

दीपक और धूपबत्ती जलाएं।

माता करवा को फूल माला पहनाएं और देवी को फूल अर्पित भी करें।

इस दौरान कुछ पैसे, हल्दी, मिठाई, अक्षत और ताजे फल भी रखें।

करवा चौथ के व्रत की कथा सुनें और दान के लिए जरूर सामग्रियों को निकाल के रखे दें।

रात को चंद्रमा के निकलने के बाद फिर चंद्रदेव की पूजा करें और उन्हें जल से अर्घ्य दें।

फिर छलनी से चंद्रमा देखें।

इसी छलनी से फिर पति की ओर देखें और उनके हाथों से जल ग्रहण करें।

अब पित के पैर छूकर आशीर्वाद लें और व्रत का पारण करें।

करवा चौथ पूजा सामग्री

मिट्टी का एक कलश, चंदन और तांबे का लोटा रख लें।

फूल, फूल माला, दीपक ,धूप रोली, चावल, मिठाई, फल।

मेवे, करवा चौथ की कथा की पुस्तक।

छलनी शुद्ध जल, दूध और दान का सामान।

करवा चौथ व्रत के 5 खास नियम

करवा चौथ के दिन सूर्योदय से पहले ही सरगी ग्रहण करना शुभ होता है, इसके बाद किसी भी चीज का सेवन न करें।

करवा चौथ के व्रत की कथा का पाठ हमेशा 16 श्रृंगार और लाल जोड़े में करना चाहिए।

चंद्रमा देखने के बाद ही व्रत का पारण करें अन्यथा व्रत अधूर माना जाता है।

इस दिन निर्जला उपवास रखें।

व्रत में तामसिक चीजों का सेवन करें और नुकीली चीजों का उपयोग न करें।

पूजन मंत्र

श्रीगणेश का मंत्र – ॐ गणेशाय नमः

शिव का मंत्र – ॐ नमः शिवाय

पार्वतीजी का मंत्र – ॐ शिवायै नमः

स्वामी कार्तिकेय का मंत्र – ॐ षण्मुखाय नमः

चंद्रमा का पूजन मंत्र – ॐ सोमाय नमः

उपाय

करवा चौथ के दिन करवा माता की पूजा करें और उनकी कथा का पाठ करें। इससे जीवन में सुख-समृद्धि वास करती हैं।

इस दिन सुहागिन महिलाओं को सुहाग की चीजों का दान करें। यह शुभ होता है।

इस तिथि पर भगवान गणेश और गौरी शंकर की पूजा-अर्चना करें। इससे व्रत का संपूर्ण फल मिलता है।

करवा चौथ पर सोलह श्रृंगार के साथ चंद्रदेव की पूजा करें। इससे वैवाहिक जीवन सुखमय बनता है।

7 सुहागिन महिलाओं का आशीर्वाद लेकर व्रत का पारण करने से जीवन सुखमय बनता है।

आरती

ओम जय करवा मैया, माता जय करवा मैया।
जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया।।

सब जग की हो माता, तुम हो रुद्राणी।
यश तुम्हारा गावत, जग के सब प्राणी।।

कार्तिक कृष्ण चतुर्थी, जो नारी व्रत करती।
दीर्घायु पति होवे , दुख सारे हरती।।

ओम जय करवा मैया, माता जय करवा मैया।

जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया।।
होए सुहागिन नारी, सुख संपत्ति पावे।

गणपति जी बड़े दयालु, विघ्न सभी नाशे।।
ओम जय करवा मैया, माता जय करवा मैया।

जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया।।
करवा मैया की आरती, व्रत कर जो गावे।

व्रत हो जाता पूरन, सब विधि सुख पावे।।
ओम जय करवा मैया, माता जय करवा मैया।

जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया।।

व्रत कथा

प्राचीन समय की बात है, एक साहूकार था जिसके सात बेटे और एक बेटी थी। करवा चौथ के दिन उसकी बहुओं और बेटी ने व्रत रखा। पूरे दिन उपवास रखने के बाद शाम को सब चांद निकलने का इंतजार करने लगे।बेटी बहुत भूखी और कमजोर हो गई थी, यह देखकर उसके भाइयों को उसकी हालत पर दया आ गई। वे नहीं चाहते थे कि उनकी बहन और ज्यादा कष्ट झेले, इसलिए उन्होंने एक चाल चली। वे नगर से बाहर गए और एक ऊंचे स्थान पर आग जलाकर एक छलावा किया ताकि वह आग का प्रकाश चांद जैसा लगे।भाइयों ने बहन से कहा कि चांद निकल आया है।

बहन ने बिना जांचे-परखे उनकी बात मान ली और अग्नि को चांद समझकर अपना व्रत तोड़ दिया। लेकिन जैसे ही उसने व्रत तोड़ा, उसी समय उसका पति बीमार पड़ गया और घर की सारी दौलत इलाज में खत्म हो गई।बाद में जब बहन को सच्चाई का पता चला, तो उसे अपने छल से टूटे व्रत पर बहुत पछतावा हुआ। उसने पूरी श्रद्धा से भगवान गणेश की पूजा की और अपनी गलती के लिए क्षमा मांगी। उसकी सच्ची प्रार्थना और पूजा से उसका पति धीरे-धीरे ठीक हो गया और घर में फिर से सुख-शांति लौट आई।

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