Wednesday, January 28, 2026
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फाइल आगे बढ़ाता है भ्रष्टाचार

हमारा देश त्योहारों का देश है, उसी तरह भ्रष्टाचार का भी देश है। यहां हर जगह इसका बोल बाला रहता है। हमे हर दिन भ्रष्टाचार की खबरे पढ़ने व सुनने की मिल ही जाती। अब आप सोच रहे होंगे की मैं इसे भष्टाचार क्यों कह रहा हंू, वो इसलिए कह रहा हूं कि वर्तमान परिदृश्य मे जहां सब कुछ बदल सा गया है, शहरों-गांवों के नाम बदल गए हैं, यहां तक कि गली, मोहल्लों तक के नाम बदल गए हैं तो बदलते परिवेश में इसके भी नाम में जरा परिवर्तन कर दिया गया है और कहा भी गया है कि परिवर्तन ही संसार का नियम है।

इस भ्रष्टाचार की तारीफ और प्रशंसा करना होगी कि इसके कारण व्यक्ति का हर काम आसान हो गया है और वह भी घर बैठे ही। फिल्म अमर अकबर एंथेनी का बहुत फेमस गाना था कि अनहोनी को होनी कर दे और होनी को अनहोनी को, जब जमा हों अमर अकबर एंथेनी। बस ठीक उसी तरह असंभव काम भी संभव और संभव को असंभव कर देता है, जहां हो भष्टाचार। सालों का काम महीनों में, महीनों का काम दिनों में और तो और दिनों का काम घंटों में और अभी तो रुको, घंटों का काम मिनटों में हो जाता है। जिसे अपना काम करवाना होता है, वह तो चाहता है कि कैसे भी बस काम हो जाए।

सबका काम हो और काम करने वालों का विकास हो, इसी में हमारा विश्वास है और होना भी चाहिए। सोचो अगर यह भष्टाचार न होता तो क्या होता। आप -हम सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाते ही रहते, चप्पलें घिस जातीं। दादा, बेटा और पोता मतलब तीन- तीन पीढ़ियां तक उस फाइल को नीचे से ऊपर तक नहीं करा सकती तो बड़े साहब को तो छोड़ो, छोटे साहब की टेबल तक पर भी यह क्या खाक पहुंचती। देखो इस चमत्कारिक भष्टाचार का कमाल, सबसे नीचे दबी फाईल तीन पंखों वाली तितली की तरह उड़ कर धड़ाम से छोटे साहब नहीं, सीधे सबसे बड़े साहब के पास पहुंच जाती है। अगले ही दिन वह वापस कम्प्लीट हो कर बिना किसी व्यवधान के बुलेट ट्रेन की स्पीड से आपके घर तक पहुंच जाती है। अगर भ्रष्टाचार न होता तो क्या ऐसा संभव हो सकता था। कभी संभव नहीं हो पाता। भ्रष्टाचार है, तो काम हो रहा है, अगर नहीं होता तो कोई फाइल को एक इंच भी आगे नहीं बढ़ाता। फाइल आगे बढ़वानी है तो भ्रष्टाचार की आसरा है।

तो देखा ना आपने यह भष्टाचार कितने अजब और गजब का है। आप सपने में भी कभी नहीं सोच सकते, यह इतना चमत्कारिक है। कितने चमत्कार कर सकता है। अगर आपको विश्वास नहीं हो रहा हो तो इस भष्टाचार के पैंतरे को सिर्फ और सिर्फ एक बार जरा आजमा कर देखें। आप मुझे धन्यवाद जरूर देंगे। हां, पर पहले आप इसे इस्तेमाल करना, फिर विश्वास करना। आपको एक व्यक्तिगत रूप से चेतावनी देता हूं कि इसे पहले आप छोटे रूप में आजमा कर देखना। हो सकता है कभी-कभी यह पैंतरा फेल भी हो जाता है और जो दिया, वो वापस भी नहीं आता है। इसलिए ध्यान रखें, यह जोखिम के अधीन है। जोखिम से बचें।

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