– वन विभाग ने प्रवासी पक्षियों की निगरानी के लिए किए पुख्ता इंतजाम
– भीकुंड और आसपास की दलदली झीलों में नजर आ रहे विदेशी पक्षी
जनवाणी संवाददाता ।
हस्तिनापुर : क्या तुमको सुनाऊं मैं अपना फसाना
ना कोई मेरा घर है ना कोई ठिकाना, मैं तो बेघर हूं।।
फिल्म सुहाग के गीत की ये पंक्तियां प्रतिवर्ष वन आरक्षित क्षेत्र आने वाले प्रवासी पक्षियो पर एकदम सटीक बैठती है। हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर वन आरक्षित क्षेत्र की दलदली झीलों में महीनों तक अपना डेरा जमाने वाले विदेशी मेहमान सर्दी का मौसम शुरू होते ही अपनी आमाद दर्ज करते नजर आ रहे है। लगभग छः महीनों का समय गुजारने के साथ अपनी प्रजनन क्रिया पुरी करने के बाद विदेशी मेहमान अपने वतन वापस लौटने लगते है।
तापमान में कमी के साथ हस्तिनापुर सेंचुरी में विदेशी पक्षियों की चहचहाहट गूंजने लगी है। साइबेरिया, चीन और रूस जैसे देशों से हज़ारों किलोमीटर दूर से प्रवासी पक्षी सर्दी के मौसम में हर साल प्रवास पर हस्तिनापुर सेंचुरी के भीमकुंड, मखदूमपुर घाट के बुढी गंगा की दलदली झीलों के आस पास फरवरी तक अपना डेरा जमाते है। विदेशी परिदों की आमद के साथ सेंचुरी का प्राकृतिक सौंदर्य बढ़ जाता है। प्रवासी पक्षियों की आमद के बाद वन विभाग भी पक्षियों की सुरक्षा के लिए सभी ज़रूरी व्यवस्थाएं के साथ टीमों की तैनाती और पक्षी प्रेमियों के लिए व्यवस्था, ताकि पक्षियों को कोई नुकसान न पहुंचे और पर्यटक उन्हें देख सकें।
कहां से आते है विदेशी मेहमान
सर्दियों का मौसम में रूस, चीन और साइबेरिया जैसे देशों में अत्यधिक ठंड और बर्फबारी होने के कारण इन पक्षियों के भोजन की कमी हो जाती है। अनुकूल वातावरण और भोजन की प्रचुरता में हस्तिनापुर सेंचुरी क्षेत्र उन्हें आकर्षित करता है, जिससे वे यहाँ आते हैं।
ये प्रजातियॉ प्रतिवर्ष वन क्षेत्र में जमाती है डेरा
प्रतिवर्ष सर्दीयों के मौसम में स्पून बिल, सारस क्रेन, इंडियन स्कीमर, ब्लैक नेक्ड स्ट्रोक, यूरेशियन कर्लीव, सुर्खाब, बार-हेडेड हंस, ग्रेलैग हंस और पेरेग्रीन फाल्कन जैसी सैकड़ों प्रजातियां वन आरक्षित क्षेत्र में देखने को मिलती है। वन क्षेत्र में सर्दीयों के मौसम में दिखार्द देने वाले विदेशी पक्षियों की ऊँचाई एक फुट से लेकर पाँच फुट तक होती है।
सूर्य हवा के बहाव आदि के साथ करते है हजारो किलोमीटर की दूरी तय
सर्दीयों के मौसम में वन क्षेत्र में आने वाले विदेशी मेहमान की दर्जनों बाते चौकाने वाली है। हजारों किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए विदेशी मेहमान झुंड में यात्रा करने के साथ तारों, सूर्य, हवा के बहाव और जमीन के प्राकृतिक बनाव से अपना रास्ता तय करते है। विदेशी मेहमान हस्तिनापुर सेंचुरी तक पहुचाने में पृथ्वी का चुंबकी क्षेत्र इनके माइग्रेशन में मददगार होता है।
क्या कहते है वन विभाग के अधिकारी
क्षेत्रीय रेंज अधिकारी खुशबू उपाध्याय का कहना है कि विदेशा से आने वाले प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये है। वन विभाग की टीम हर समय प्रवासी पक्षियों की निगरानी कर रही है।

