जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: सोमवार से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने जा रहा है, लेकिन सत्र की शुरुआत से ही कई मुद्दों को लेकर सरकार और विपक्ष में तनाव देखने को मिल रहा है। खासकर ‘वंदे मातरम’ और ‘जय हिंद’ जैसे राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर अब हंगामा होने की संभावना जताई जा रही है। 24 नवंबर को जारी राज्यसभा सचिवालय के बुलेटिन में सांसदों से निर्देश दिया गया था कि वे संसद में इन नारों का इस्तेमाल न करें। इस आदेश के बाद विपक्ष ने भाजपा समर्थित केंद्र सरकार पर स्वतंत्रता और राष्ट्रीय प्रतीकों से असहज होने का आरोप लगाया है। तृणमूल कांग्रेस ने भी स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक वाले इन नारों पर केंद्र के किसी भी निर्देश का पालन नहीं करेगी।
राज्यसभा सचिवालय के बुलेटिन में सांसदों के लिए निर्देश
बुलेटिन में सांसदों को स्थापित मानदंडों का पालन करने की याद दिलाई गई है। बुलेटिन में कहा गया है कि सदन की कार्यवाही के दौरान मर्यादा और गंभीरता के तहत ‘धन्यवाद, थैंक यू, जय हिंद, वंदे मातरम’ या किसी भी अन्य तरह के नारे नहीं लगाए जाने चाहिए।
ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा
इसे लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए सीएम ममता बनर्जी ने कहा- कि क्यों नहीं बोलेंगे? हम जय बांग्ला, बांग्ला में बोलते हैं, वंदे मातरम कहते हैं। यह हमारी आजादी का नारा है, राष्ट्रगीत है, जय हिंद नेताजी का नारा है, जिस नारे को लेकर हम लोगों ने लड़ा है। यह हमारे देश का नारा है, इससे जो टकराएगा, चूर-चूर हो जाएगा। वहीं वंदे मातरम् की काट के तौर पर तृणमूल कांग्रेस ने ‘बांग्लार माटी, बांग्लार जोल’ गीत का गायन राज्य के सभी सरकारी और सरकार से सहायता प्राप्त स्कूलों में अनिवार्य किया है। इस गीत को पश्चिम बंगाल में राज्यगीत का दर्जा दिया गया है।
सामूहिक गायन का कार्यक्रम आयोजित किया था
वहीं, पश्चिम बंगाल में भाजपा ने 7 नवंबर को राष्ट्रगीत के 150 साल पूरे होने पर कई जगहों पर सामूहिक गायन का कार्यक्रम आयोजित किया था। इसे पार्टी ने बंगाल की संस्कृति और अस्मिता से जोड़कर पेश करने की कोशिश की थी। दरअसल, मुस्लिम समुदाय के विरोध के कारण कांग्रेस पार्टी ने वर्ष 1937 में मूल पाठ से कुछ पंक्तियां हटा दी थीं। भाजपा इसे बंगाली अस्मिता से जोड़ रही है। बंकिमचंद्र चटर्जी की तरफ से लिखा गया और रविंद्रनाथ टैगोर की तरफ से गाया गया यह गीत न सिर्फ 1905 के बंगाल विभाजन, बल्कि स्वतंत्रता सेनानियों की आवाज बना था।
मदनी ने कहा
मदनी ने वंदे मातरम को लेकर भी विवादित बयान दिया था। मदनी ने कहा कि किसी भी नारे या गीत को किसी कौम के पर थोपा नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि ‘मुर्दा कौमें सरेंडर करती हैं, जबकि जिंदा कौमें हालात का मुकाबला करती हैं।’ मदनी ने वंदे मातरम के कुछ अंश हटाने को विभाजन से जोड़ने वाले प्रधानमंत्री मोदी के बयान को भ्रामक करार दिया था।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा
वहीं रविवार को सर्वदलीय बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, ‘वंदे मातरम बहुत महत्वपूर्ण है। हमारे स्वतंत्रता संग्राम में, हमने वंदे मातरम का नारा लगाकर अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी और बंकिम चंद्र चटर्जी को वंदे मातरम लिखे हुए 150 साल हो गए हैं। पूरा देश इस पर विश्वास करता है। यह कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है। 150 साल हो गए हैं। अगर हमें इस पर चर्चा भी करनी है, तो मैं इसे सभी दलों के सामने रखूंगा। मैं इसे बीएसी में उठाऊंगा। मैं यहां एजेंडा की घोषणा नहीं कर सकता।’
अमित मालवीय ने सीएम ममता बनर्जी पर बोला हमला
एक दिन पहले भाजपा नेता अमित मालवीय ने कांग्रेस और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि संसद में जारी हालिया निर्देश को लेकर दोनों दल जिस तरह आपत्ति जता रहे हैं, वह पूरी तरह ‘राजनीतिक नौटंकी’ है, जबकि यह नियम दशकों से लागू है और किसी सरकार की तरफ से नहीं, बल्कि लोकसभा और राज्यसभा के पीठासीन अधिकारी की तरफ से बनाया गया था। दोनों दलों के बीच वार-पलटवार के बीच अब संसद सत्र में उनकी रणनीति ही राज्य के विधानसभा चुनाव की नींव तैयार करती दिखेगी।

