जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को चुनौती देने वाली विभिन्न राजनीतिक दलों की याचिकाओं पर सुनवाई की तारीख तय कर दी है। इस मुद्दे पर केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के कई दलों ने आपत्तियां दर्ज कराई हैं। सोमवार को अदालत ने अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेट्ट्री कझगम (TVK) द्वारा दायर याचिका पर भी सुनवाई के लिए सहमति दे दी, जिसमें तमिलनाडु में चल रहे SIR प्रक्रिया को चुनौती दी गई है। यह मामला अब 4 दिसंबर को अन्य तमिलनाडु से जुड़ी लंबित याचिकाओं के साथ एकसाथ सुना जाएगा।
क्या कहा गया है याचिका में?
टीवीके की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और स्कूल शिक्षकों पर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के रूप में अत्यधिक दबाव डाला जा रहा है। उन्हें तय लक्ष्य हर हाल में पूरा करने के लिए कहा जाता है, और ऐसा न करने पर जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 32 के तहत नोटिस भेजे जाते हैं। इस धारा में तीन महीने तक की सजा और नौकरी खोने का खतरा भी शामिल है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि इसी तरह के दबाव की वजह से अब तक 21 BLO के आत्महत्या करने के मामले सामने आए हैं। अदालत को यह जानकारी भी दी गई कि चुनाव आयोग ने SIR फॉर्म जमा करने की अंतिम तारीख 4 दिसंबर से बढ़ाकर 11 दिसंबर कर दी है।
सुप्रीम कोर्ट में अन्य राज्यों से जुड़े मामले भी
सुप्रीम कोर्ट एसआईआर से जुड़ी याचिकाओं पर अलग-अलग तारीखों में सुनवाई कर रहा है। केरल की याचिका पर 2 दिसंबर को, तमिलनाडु की याचिका पर 4 दिसंबर को और पश्चिम बंगाल की याचिका पर 9 दिसंबर को सुनवाई होगी।
मंगलवार को कोर्ट केरल में एसआईआर के खिलाफ CPI की याचिका पर सुनवाई करेगा। वहीं, केरल सरकार ने भी स्थानीय निकाय चुनावों का हवाला देते हुए एसआईआर प्रक्रिया को फिलहाल टालने की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को भेजा नोटिस
पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश से आए हिंदू, बौद्ध, ईसाई और जैन शरणार्थियों की ओर से दायर याचिका पर भी सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस भेजा है। याचिकाकर्ता एनजीओ ‘आत्मदीप’ की तरफ से पेश हुई वरिष्ठ अधिवक्ता करुणा नंदी ने बताया कि ये शरणार्थी 2014 से पहले धार्मिक उत्पीड़न से बचकर भारत आए थे, लेकिन सीएए के तहत उनके नागरिकता आवेदन अब तक आगे नहीं बढ़े हैं।
उनका अनुरोध है कि नागरिकता प्रक्रिया पूरी होने तक उन्हें एसआईआर के दौरान अस्थायी रूप से मतदाता सूची में शामिल किया जाए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नागरिकता से जुड़े मामलों का फैसला सामूहिक रूप से नहीं किया जा सकता, बल्कि हर मामले को अलग आधार पर देखा जाएगा। इस याचिका की विस्तृत सुनवाई 9 दिसंबर को होगी।
EC के पास चुनाव सूची संशोधन का अधिकार
इससे पहले, 26 नवंबर को शीर्ष अदालत ने कहा था कि यह तर्क कि एसआईआर पहले कभी नहीं हुआ, चुनाव आयोग के फैसले की वैधता पर प्रश्न उठाने का आधार नहीं हो सकता। चुनाव आयोग को मतदाता सूची की प्रविष्टियों की सत्यता सुनिश्चित करने का अधिकार है।

