Saturday, March 21, 2026
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गाजीपुर बार्डर पर दहाड़ रही पूनम पंडित ने जौहड़ी व बड़ौत में सीखी शूटिंग

  • गाजीपुर बार्डर के किसान आंदोलन में सभी की चहेती बनी हुई है बुलंदशहर की बेटी

जनवाणी संवाददाता |

बड़ौत: दिल्ली के गाजीपुर बार्डर पर किसानों के चल रहे आंदोलन में किसान कृषि कानूनों के खिलाफ मुखर हो रहे हैं। इस आंदोलन में एक लड़की टीवी चेनलों व सोशल मीडिया पर सुर्खियों में है। नेशनल शूटिंग में गोल्ड मेडल हासिल करने वाली बुलंदशहर की बेटी पूनम पंडित ने शूटिंग का ककहरा बड़ौत व जौहड़ी की शूटिंग रेंज में सीखा।

बेबाक शब्दावाली से परिपूर्ण महिला शूटर ने सभी नौकरियों को लात मार सामाजिक कार्यों को प्राथमिकता दी। बिग बॉस में शामिल रहने वाली फेमस सपना चौधरी ने साथ वह कुछ समय तक ही रह पाईं। चूंकि बंदिश पूनम पंडित के खून में नहीं है। कृषि कानूनों के खिलाफ वह अब गाजीपुर बार्डर पर चल रहे आंदोलन में शामिल होकर किसानों की आवाज बनी हुई है।

साधारण किसान परिवार में जन्मी पूनम पंडित का बचपन कष्ट में बीता। प्राथमिक शिक्षा जैसे-तैसे बीता। आगे की शिक्षा के लिए वह अपनी बहन, भाई व माता के साल अपने पिता के पास मेरठ में शिफ्ट हो गई। हाइस्कूल तक किसी तरह पहुंची। लेकिन पाठ्य सामग्री के लिए पूनम को पड़ोसियों के कपड़े व बर्तन धोने पड़े। पूनम पंडित बताती है कि उसने ग्रेजुएशन तक की शिक्षा ली है।

सन 2013 में उसे मेरठ में ही एक पुलिस में नौकरी करने वाले अंकल जी ने शूटिंग के लिए उत्साहित किया था। शूटिंग को लेकर उसे यही पता था कि फिल्मों के लिए शूटिंग की जाती है। लेकिन, जब उसने मुझे जोहड़ी भेजा तो तब मेरी समझ में आया कि निशाना लगाना भी शूटिंग होती है।

मैंने जोहड़ी में शूटिंग सीखी। वहां की कोच नीतू श्योराण ने मुझे बहुत सहयोग दिया। इससे पहले मैं बड़ौत में वीर शाहमल राइफल क्लब में भी शूटिंग सीखी थी। उसने स्टेट लेवल से लेकर और उसके बाद नेशनल स्तर गोल्ड मेडल प्राप्त किया।

कई बार बीएसएफ व सीआईएसएफ आदि में नौकरी के लिए ऑफर मिले। लेकिन उसने इंकार कर दिया था। वह कोई नौकरी नहीं करना चाहती थी। लेकिन घर चलाने के लिए उसे खर्च भी चाहिए था। इसलिए उसने बिग बॉस में रही व हरियाणा की प्रसिद्ध सिंगर सपना चौधरी की कंपनी में नौकरी मिल गई।

वहां वह सपना चौधरी के संपर्क में रही। लेकिन एक दिन उसने अचानक वहां से भी नौकरी छोड़ दी। यहां से नौकरी छोड़ने के बाद घर पर आ गई। घर पर फिर उसके परिजनों ने उसे उत्साहित किया। वह उसने ध्यानचंद स्टेडियम में भी नौकरी की।लेकिन वहां मन नहीं लगा।

उसने बताया कि जनप्रतिनिधियों की ओर से भी प्रोत्साहन रूप धनराशि दिलवाने के प्रयास किए। लेकिन उसने वह स्वीकार नहीं की। क्योंकि वह खुद में कुछ करना चाहती थी। उस पर शादी का दबाव आया लेकिन उसने शादी नहीं की। शादी के लिए उसके घर में पैसे नहीं थे।

अपनी छोटी बहन की उसने किसी तरह शादी की। बचपन में उनके दिन कैसे व्यतीत हुए याद करके पूनम पंडित की आंखों में आंसू आ जाते हैं। उसने बताया कि अब वह बिल्कुल संतुष्ट है। सामाजिक कार्य में भागीदार करती रहती है। कृषि कानूनों को किसान विरोधी होने की जब उसने आवाज सुनी तो वह किसानों के संग धरने में शामिल होने आ गई।

वह वर्तमान में अखिल भारतीय प्रधान संगठन की महासचिव है। किसान आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग ले रही हैं बेबाक हाजिर जवाबी के लिए पूनम पंडित गाजीपुर बॉर्डर पर विभिन्न चैनलों व सोशल मीडिया में प्रसिद्धि पा रही है। इस संबंध में जोहड़ी की साईं की कोच नीतू श्योरान ने बताया कि पूनम पंडित बड़ी ही होशियार लड़की रही है। अनुशासित तरीके व एकाग्र मन से शूटिंग सीखी।

इस संबंध में पूनम पंडित कहती है कि शूटिंग के कैरियर में नीतू श्योरान का उसे विशेष योगदान मिला। वह मुझे बड़ा योगदान मिला। अभी भी मेरे और नीतू के अच्छे संबंध है।

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