जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: भारत के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई दिशा देते हुए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने पहली बार अपने एस्ट्रोनॉट दल में आम नागरिकों को शामिल करने की तैयारी शुरू कर दी है। अब तक अंतरिक्ष यात्रियों के चयन में भारतीय वायुसेना के टेस्ट पायलटों को प्राथमिकता दी जाती थी, लेकिन भविष्य के मिशनों को ध्यान में रखते हुए यह नीति बदली जा रही है।
क्या है गगनयान मिशन?
गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है, जिसके तहत तीन अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी से करीब 400 किलोमीटर ऊंची कक्षा में भेजा जाएगा। यह मिशन लगभग तीन दिन तक चलेगा और इसके बाद क्रू को सुरक्षित भारतीय समुद्री क्षेत्र में उतारा जाएगा। इस मिशन की सफलता के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा, जिन्होंने अपने दम पर इंसानों को अंतरिक्ष में भेजा है।
दूसरी टीम में 10 एस्ट्रोनॉट्स
रिपोर्ट के अनुसार, इसरो की एस्ट्रोनॉट चयन समिति ने दूसरे बैच में 10 अंतरिक्ष यात्रियों को शामिल करने की सिफारिश की है:
- 6 सदस्य सैन्य विमानन पृष्ठभूमि से होंगे
- 4 सदस्य नागरिक विशेषज्ञ होंगे (STEM क्षेत्र से)
- पहले बैच में केवल वायुसेना अधिकारी
गगनयान के पहले बैच में चुने गए चारों अंतरिक्ष यात्री भारतीय वायुसेना के टेस्ट पायलट हैं:
- एयर कमोडोर प्रशांत बी. नायर
- ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला
- ग्रुप कैप्टन अजीत कृष्णन
- ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप
इनका चयन शुरुआती मिशनों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किया गया था।
हेलिकॉप्टर पायलटों को भी मौका
दूसरे बैच में फाइटर पायलटों के साथ-साथ कॉम्बैट हेलिकॉप्टर पायलटों को भी शामिल किए जाने की संभावना है।
नागरिक कब जाएंगे अंतरिक्ष?
हालांकि नागरिकों का चयन दूसरे बैच में होगा, लेकिन उन्हें गगनयान के चौथे मिशन से अंतरिक्ष यात्रा का मौका मिल सकता है। शुरुआती मिशनों में अनुभवी सैन्य पायलटों को ही प्राथमिकता दी जाएगी।
स्पेस स्टेशन की तैयारी
इसरो का यह कदम सिर्फ गगनयान तक सीमित नहीं है। भविष्य में भारत नियमित मानव अंतरिक्ष मिशन, अंतरिक्ष में वैज्ञानिक शोध और अपने स्पेस स्टेशन की स्थापना की दिशा में काम कर रहा है। इसके लिए एक स्थायी एस्ट्रोनॉट कैडर तैयार किया जाएगा।
तीसरे बैच में बढ़ेगी नागरिकों की संख्या
समिति के अनुसार:
तीसरे बैच में 12 अंतरिक्ष यात्री होंगे
2 मिशन पायलट
10 नागरिक विशेषज्ञ
भविष्य में कुल 40 एस्ट्रोनॉट्स का कैडर तैयार करने की योजना है।
4.5 साल की ट्रेनिंग
एक अंतरिक्ष यात्री के चयन से लेकर मिशन के लिए तैयार होने तक पूरी प्रक्रिया में लगभग 4.5 साल का समय लगेगा। फिलहाल इसरो के पास अस्थायी प्रशिक्षण सुविधा है, लेकिन जल्द ही एक पूर्ण विकसित एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किया जा सकता है।

