जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा से जुड़े कथित कैश कांड में जांच समिति की रिपोर्ट से बड़ा खुलासा हुआ है। लोकसभा अध्यक्ष की ओर से गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने उनके खिलाफ लगाए गए तीनों आरोपों को सही माना है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा को दोषी ठहराया है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मामले में किसी तरह की साजिश के संकेत नहीं मिले।
यह मामला मार्च 2025 में नई दिल्ली के 30, तुगलक क्रिसेंट स्थित जस्टिस वर्मा के आधिकारिक आवास के स्टोररूम में आग लगने के बाद बड़ी मात्रा में नकदी मिलने से सामने आया था। नकदी मिलने के बाद उसके स्रोत और स्वामित्व को लेकर सवाल उठे थे।
स्टोररूम में मिले थे ₹500 के नोट
जांच समिति के मुताबिक, जस्टिस वर्मा के आधिकारिक आवास के स्टोररूम में पर्याप्त संख्या में ₹500 मूल्यवर्ग के नोट मिले थे। समिति ने कहा कि जस्टिस वर्मा यह संतोषजनक तरीके से स्पष्ट नहीं कर सके कि ये नोट वहां कैसे पहुंचे, उनका स्रोत क्या था और उन पर किसका स्वामित्व था।
रिपोर्ट में नकदी की मौजूदगी को लेकर जस्टिस वर्मा के स्पष्टीकरण पर भी सवाल उठाए गए हैं। समिति ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर उनके जवाब को संतोषजनक नहीं माना।
नकदी से जुड़े साक्ष्यों के संरक्षण पर भी सवाल
समिति ने स्टोररूम में मिले भौतिक साक्ष्यों के संरक्षण को लेकर भी गंभीर टिप्पणी की है। रिपोर्ट के अनुसार, कानूनी तरीके से सील करने और निरीक्षण किए जाने से पहले स्टोररूम की स्थिति में बदलाव हो गया था। बाद में वहां मिले नकदी के नोट भी उपलब्ध नहीं रहे।
समिति ने इस बात को गंभीर माना कि नकदी से जुड़े साक्ष्यों को सुरक्षित नहीं रखा गया और यह भी स्पष्ट नहीं हो सका कि बाद में ये नोट कहां गए।
22 मार्च 2025 के जवाब को भी माना असंतोषजनक
जांच समिति ने जस्टिस वर्मा की ओर से 22 मार्च 2025 को दिए गए जवाब और उसके बाद अपनाए गए रुख पर भी सवाल उठाए। समिति के मुताबिक, उनके जवाब में परिस्थितियों के अनुरूप अपेक्षित स्पष्टता, पारदर्शिता और संस्थागत जिम्मेदारी नहीं दिखाई दी।
समिति ने स्वतंत्र आधिकारिक गवाहों और अन्य पुष्टिकारक सामग्री के साथ उनके जवाब की तुलना करने के बाद उसे टालमटोल वाला और असंतोषजनक माना।
अगस्त 2025 में गठित हुई थी जांच समिति
जस्टिस वर्मा के खिलाफ जांच के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 12 अगस्त 2025 को तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। बाद में समिति का पुनर्गठन किया गया। इसमें सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति अरविंद कुमार, बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर और वरिष्ठ अधिवक्ता बीवी आचार्य शामिल रहे।
समिति ने अपनी रिपोर्ट मई 2026 में लोकसभा अध्यक्ष को सौंप दी थी। इस बीच जस्टिस वर्मा ने 9 अप्रैल 2026 को राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इसके बावजूद रिपोर्ट को संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखने की प्रक्रिया जारी रही।
क्या है पूरा कैश कांड?
मार्च 2025 में जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास के स्टोररूम में आग लगने के बाद बड़ी मात्रा में ₹500 के नोट मिलने की बात सामने आई थी। इसके बाद नकदी के स्रोत और स्वामित्व को लेकर विवाद खड़ा हो गया।
जस्टिस वर्मा ने नकदी से किसी भी तरह का संबंध होने से इनकार किया था और मामले में साजिश की आशंका जताई थी। बाद में मामले की जांच के लिए समिति गठित की गई।
अब समिति ने अपनी रिपोर्ट में तीनों आरोपों को सही माना है। इनमें नकदी के स्रोत और स्वामित्व को लेकर संतोषजनक स्पष्टीकरण न देना, साक्ष्यों के संरक्षण में गंभीर चूक और जांच के दौरान दिए गए जवाब को असंतोषजनक पाया जाना शामिल है। हालांकि, समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया है कि उसे मामले में किसी प्रकार की साजिश के संकेत नहीं मिले।

